संसू, रायकोट: पंजाब ही नहीं अपितु सारे देश में होम्योपैथी में नाम कमाने वाले डा परमजीत सिंह राणु ने श्री कृष्ण गोशाला में लंपी स्किन बीमारी से पीड़ित गोवंश के लिए निश्शुल्क दवा उपलब्ध करवाई।

इस मौके राणू ने कहा कि होम्योपेथी 1830 में भारत में तब आई, जब महाराजा रणजीत सिंह के घोड़ों के इलाज के लिए जर्मन से डा. होनीगबरगर को पंजाब बुलाया गया। उन्होंने बताया कि तब महाराज के सभी घोड़े बीमारी से रहित हो गए थे। उन्होंने कहा कि जानवरों में लंपी चमड़ी रोग में होम्योपैथी सस्ता और सुरक्षित इलाज उपलब्ध करवा सकती है।

राणू होम्यो क्लीनिक पिछली तीन पीढि़यों से जानवरों व इंसानों की सेवा करते आ रहे हैं। उनके पिता स्वर्गीय डा. सज्जन सिंह राणा ने 1979 में रायकोट में होम्योपैथी की प्रैक्टिस शुरू की थी।

उन्होंने कहा कि राणू होमियो क्लिनिक पशुओं को भार पढ़ना, चमड़ी रोग, पाक्स वायरस, बैक्टीरियल इनफेक्शन ,लम्पी चमड़ी रोग, रसोली, दूध का कम होना, थनो में गांठे होना, मैस्टाइटिस, गल हीरा ,मुंह खुर, जेर ना पड़ना ,ब्रीच प्रेजेंटेशन ,गठिया, बुखार ,भूख ना लगने, निमोनिया, आंतड़ी रोग, कुत्तों में पार्बो बीमारी का शर्तिया इलाज करते हैं। उन्होंने ऐलान किया कि शहर की सभी गोशाला को लम्पी स्किन की दवाई फ्री दी जाएगी। जो दूध का धंधा करते हैं मतलब कमर्शियल यूज के लिए दवा को 10 प्रति पशु की लागत से दवाई दी जाएगी। इस मौके उनकी धर्मपत्नी डा इंद्रजीत कौर राणू, बेटे डा नवजोत सिंह राणू मौजूद रहे।

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