मेरठ, जागरण संवाददाता। Har Ghar Tiranga मेरठ सहित पूरे वेस्‍ट यूपी में हर घर तिरंगा फहराने के लिए हर स्तर पर प्रयास जारी है। यात्रा निकालने के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम व तिरंगा वितरण किया जा रहा है। शहर का माहौल तिरंगे के रंग में सराबौर हो रहा है।

तिरंगे का सर्वोच्च सम्मान

शान से अपने घर पर तिरंगा फहराने की तैयारी की जा रही है। तैयारियों के बीच तिरंगे के सम्मान और सुरक्षा की जिम्मेदारी भी हम आपकी ही है। ध्यान रखें कि तिरंगे का सर्वोच्च सम्मान कायम रहे।

75 साल से सुरक्षित है तिरंगा

24 नवंबर 1946 को पंडित जवाहरलाल नेहरू ने मेरठ के विक्टोरिया पार्क में आजादी से पहले कांग्रेस के अंतिम अधिवेशन हुआ था। इसी अधिवेशन में पंडित नेहरू ने चरखा छपा खादी का तिरंगा फहराया था। हस्तिनापुर के रहने वाले मेजर जनरल कर्नल गणपत राम नागर के पौत्र देव नागर ने इस तिरंगे को 75 वर्ष से सहेज कर रखा है। 75 साल पुराने खादी के तिरंगे को नागर परिवार सतर्कता के साथ सुरक्षित रखते हुए हैं। झंडे को नमी से बचाव के लिए सिलिका जेल कैप्सूल के साथ मोड़कर, पैक और सील करके रखा जाता है। हर 2 महीने में इसे धूप दिखाकर फिर सिलिका में रखते हें।

तिरंगा फहराने का नियम

- तिरंगा हमेशा काटन, सिल्क या फिर खादी का ही बना होना चाहिए।

- तिरंगे को हमेशा सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच ही फहराया जा सकता है।

- तिरंगे को दूसरे झंडे से ऊंचा या ऊपर लगाया जाना चाहिए।

- पर्याप्त रोशनी में राष्ट्रीय ध्वज को संस्थान या घर पर स्थाई रूप से लगा सकते है।

- तिरंगे का आकार आयातकार होना चाहिए।

- झंडे का आकार लंबाई और चौड़ाई का अनुपात 3:2 का होना चाहिए।

- तिरंगा फहराते समय केसरिया रंग को सबसे उपर होना चाहिए।

ऐसा कभी न करें

- तिरंगे को कभी जमीन पर नहीं रखा जा सकता है।

- कभी भी फटा या मैला-कुचैला तिरंगा नहीं फहराया जाता है।

- झंडे के किसी भाग को जलाने, नुकसान पहुंचाने या इसका अपमान करने पर जेल हो सकती है।

- झंडे को कभी पानी में डुबोया नहीं जा सकता।

- झंडे का व्यवसायिक इस्तेमाल नहीं कर सकते।

- तिरंगे की यूनिफार्म बनाकर पहनना गलत है।

- झंडे को कभी झुकाया नहीं जाता। सरकारी आदेश के बाद ही सरकारी इमारतों पर झंडे को आधा झुकाकर-फहराया जा सकता है। 

Edited By: Prem Dutt Bhatt