रांची, राज्य ब्यूरो। Jharkhand News झारखंड में सूखे के हालात हैं। महज 50 प्रतिशत बारिश होने से किसानों ने धान की रोपाई नहीं की है। ऐसे किसानों को राहत देने के लिए झारखंड सरकार ने वैकल्पिक खेती की संभावना तलाशी है। पानी की कमी वाले खेतों में सितंबर से दलहन और तेलहन फसल की बुआई की जाएगी। कृषि निदेशालय ने किसानों को मसूर, कुर्थी, चना, मटर जैसे फसलों के बीज निश्शुल्क और अनुदानित दर पर उपलब्ध कराने के लिए प्रक्रिया शुरु कर दी है। झारखंड सरकार करीब तीन लाख हेक्टेयर जमीन पर दलहनी फसलों के उत्पादन का लक्ष्य लेकर चल रही है। इसके साथ ही हल्की बारिश से जिन खेतों में नमी रह गई है उनपर मक्का लगाने की योजना बनाई गई है।

पलामू प्रमंडल में दाल की खेती की संभावना

डालटेनगंज, गढ़वा और लातेहार में किसान पिछले कुछ सालों से दलहन की खेती करते रहे हैं। इस बार वैसे किसान जो धान की खेती करते थे, उन्हें दलहन की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। उपरी भूमि के करीब एक लाख हेक्टेयर वाले इस क्षेत्र में मसूर और कुर्थी उत्पादन के लिए किसानों को आसानी से बीज उपलब्ध करा दिया जाएगा।

संथाल परगना में तिलहन और दलहन पर जोर

कृषि निदेशालय की योजना के मुताबिक संथाल परगना में धान की खेती नहीं कर पाए किसानों को सरसों, तीसी और सरगूजा की खेती के लिए बीज उपलब्ध कराया जाएगा। हाल के दिनों में वैश्विक बाजार में मोटे अनाज की मांग को देखते हुए राज्य सरकार रागी, मड़ुआ जैसे अन्न के उत्पादन को बढ़ावा देने की योजना भी बना रही है। अभी तीन हजार हेक्टेयर में इनकी खेती हो रही है। इसके लिए समुचित प्रोत्साहन भी किसानों को नहीं मिल रहा है। अभी सूखे पड़े पांच हजार हेक्टेयर और क्षेत्र में सरकार इन फसलों की खेती के लिए संसाधन उपलब्ध कराने की योजना बना रही है। खास बात यह है कि इन फसलों के लिए कम पानी के साथ किसी रासायनिक खाद की आवश्यक्ता नहीं होती है।

बाजार में सीधे बीज उपलब्ध कराने की भी योजना

सरकारी क्रय केंद्रों के अलावा किसानों को दलहन, तेलहन समेत अन्य फसलों के बीज खुले बाजार में भी आसानी से मिल सकें इसके लिए सरकार योजना बना रही है। बाजार से बीज खरीदने वाले किसानों को खाते में अनुदान राशि दी जा सकती है।

जिलों से मिली रिपोर्ट का हो रहा अध्ययन

सुखाड़ की स्थिति का आकलन करने के लिए जिलों में भेजी गई विशेषज्ञ समिति से कृषि विभाग को रिपोर्ट मिल चुकी है। अब इसका अध्ययन कर राज्य सरकार को अवगत कराया जाएगा। इसके बाद सरकार सुखाड़ के राहत उपायों की घोषणा करेगी। जिलों से मिली रिपोर्ट में भी 20 प्रतिशत के आसपास धान की खेती होने की जानकारी दी गई है।

झारखंड में दलहन और तेलहन की खेती की अपार संभावना है: कृषि विभाग

कृषि विभाग के निदेशक समेति डा. सुभाष कुमार का कहना है कि झारखंड में दलहन और तेलहन की खेती की अपार संभावना है। सितंबर-अक्टूबर में मसूर, मटर और सरसों की खेती करने वाले किसान बंपर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। मक्का के लिए पानी की जरूरत होती है। ऐसे में जिन खेतों में नमी है, वहां इसकी बुआई हो सकती है।

Edited By: Sanjay Kumar