कैथल, जागरण संवाददाता। आनलाइन बिजली का बिल भरने के लिए लोग ई-पे कंपनी का सहारा लेते थे और अपना बिल भर देते थे। उपभोक्ताओं की तरफ से बिजली का बिल दे दिया गया है, लेकिन आगे कंपनी ने बिल की राशि बिजली निगम के पास जमा नहीं करवाई है।

प्रदेश भर में कंपनी के अधिकारियों के विरुद्ध लगातार मुकदमें दर्ज हो रहे हैं। अकेले कैथल में कंपनी की तरफ से बिजली निगम के साथ करीब 37 लाख रुपये की धोखाधड़ी की जा चुकी है। बिजली निगम के एसडीओ मनीष कुमार ने सिविल लाइन थाने में शिकायत दी है।

शिकायत में आरोप लगाया है कि ई-पे कंपनी के अधिकारियों ने कैथल की चार डिविजनों में 12 लाख 72 हजार रुपये की धोखाधड़ी की है। सिटी वन में 98 हजार रुपये, सिटी टू में एक लाख 85 हजार रुपये, सब यूनिट वन में नौ लाख 42 हजार और सब यूनिट टू में 47 हजार रुपये की धोखाधड़ी की गई है। यह राशि कंपनी की तरफ से साल 2021 में जमा करवानी थी, लेकिन जमा नहीं करवाई गई है। जांच अधिकारी एएसआइ कुलदीप सिंह ने बताया कि पुलिस ने शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

यहां हो चुकी इतने की धोखाधड़ी

पूंडरी कस्बे में 377 उपभाेक्ताओं से 17 लाख रुपये की ठगी का मुकदमा सबसे पहले दर्ज हुआ था। उसके बाद सीवन और राजौंद में भी मुकदमें दर्ज हो चुके हैं। यूएचबीवीएन के एसडीओ आशीष गौतम ने सीवन थाना में दर्ज करवाई एफआइआर में बताया कि ई-पे कंपनी के पास बिजली बिलों को भरने का काम था।

कंपनी के कर्मचारियों ने उपभोक्ताओं से बिजली बिल की कुल राशि दो लाख 91 हजार 859 रुपये एकत्र की, जोकि बिजली विभाग के पास जमा नहीं करवाई। इसके लिए ई-पे कंपनी के निदेशक केपी सिंह, जिला समन्वयक राकेश कुमार व सीनियर मैनेजर अनुज रावल के खिलाफ सीवन थाना में शिकायत दी है।

राजौंद में 153 उपभोक्ताओं की पांच लाख 68 हजार रुपये की बिल की राशि ना भरने पर ई-पे कंपनी के दो अधिकारियों केपी सिंह और अनुज के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया गया है। इस मामले में बिजली निगम के एसडीओ योगेश कुमार ने राजौंद थाने में शिकायत दी थी।

Edited By: Anurag Shukla