जमशेदपुर : विश्व फुटबॉल की सर्वोच्च संचालन संस्था फीफा ने तीसरे पक्ष द्वारा गैर जरूरी दखल का हवाला देकर अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) को मंगलवार को निलंबित कर दिया और उससे अक्टूबर में होने वाले अंडर-17 महिला विश्व कप के मेजबानी अधिकार छीन लिए।यह पिछले 85 साल के इतिहास में पहला अवसर है जबकि फीफा ने एआईएफएफ पर प्रतिबंध लगाया। फीफा ने कहा है कि निलंबन तुरंत प्रभाव से लागू होगा ।

अक्टूबर से शुरू होने वाला है आइएसएल

उधर, फीफा द्वारा लगाए गए प्रतिबंध का असर इंडियन सुपर लीग (आइएसएल) पर भी पड़ना तय है। चूंकि आल इंडिया फुटबाल फेडरेशन की मान्यता खत्म हो गई है। ऐसे में कोई भी विदेशी खिलाड़ी आइएसएल में नहीं खेल सकता। आइएसएल के नियम के अनुसार अंतिम एकादश में चार विदेशी खिलाड़ी का होना जरूरी है, जबकि दो अन्य एशियाई खिलाड़ी होना चाहिए। अक्टूबर में आइएसएल शुरू होने वाला था, जिस पर अब संशय की तलवार लटक रही है। ऐसे में जमशेदपुर एफसी प्रबंधन भी टेंशन में है।

एआईएफएफ (अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ) का प्रतिनिधित्व करने वाले क्लबों और टीमें तब तक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लेने की हकदार नहीं हैं, जब तक कि निलंबन हटा नहीं लिया जाता। इसका मतलब यह भी है कि फीफा और/या एएफसी के किसी भी विकास कार्यक्रम, पाठ्यक्रम या प्रशिक्षण से एआईएफएफ और उसके किसी सदस्य या अधिकारी को कोई फायदा नहीं मिलेगा।

एएफसी कप में भाग नहीं ले पाएगा भारत

एआइएफएफ से जुड़ी सीनियर पुरुष टीमें पर हालांकि 2023 के अंत या 2024 की शुरुआत तक एएफसी एशियाई कप में भाग लेने के लिए कोई तत्काल खतरा नहीं है लेकिन अगले कुछ महीनों में आयोजित होने वाले क्लबों और आयु-वर्ग की राष्ट्रीय टीमों के लिए निर्धारित मुकाबलों को लेकर पेंच फंस सकता है। मोहन बागान को सात सितंबर को एएफसी कप के अंतर-क्षेत्रीय सेमीफाइनल में भाग लेना है लेकिन इसके लिए एएफसी के वेबसाइट पर जारी आठ टीमों की सूची में इस टीम का नाम नहीं है।

फीफा ने एक बयान में कहा फीफा परिषद के ब्यूरो ने सर्वसम्मति से अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) को तीसरे पक्ष के अनुचित प्रभाव के कारण तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का फैसला किया है। तीसरे पक्ष का हस्तक्षेप फीफा के नियमों का गंभीर उल्लंघन है।

बयान में आगे कहा गया है, निलंबन तभी हटेगा जब एआईएफएफ कार्यकारी समिति की जगह प्रशासकों की समिति के गठन का फैसला वापिस लिया जायेगा और एआईएफएफ प्रशासन को महासंघ के रोजमर्रा के काम का पूरा नियंत्रण दिया जायेगा ।

उच्चतम न्यायालय ने दिसंबर 2020 से चुनाव नहीं करवाने के कारण 18 मई को प्रफुल्ल पटेल को एआईएफएफ के अध्यक्ष पद से हटा दिया था और एआईएफएफ के संचालन के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश ए आर दवे की अध्यक्षता में तीन सदस्य प्रशासकों की समिति (सीओए) का गठन किया था।

सीओए को राष्ट्रीय खेल संहिता और दिशा निर्देशों के अनुसार एआईएफएफ के संविधान को तैयार करने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी। फीफा ने हालांकि कहा कि उसने भारत के लिए सभी विकल्प बंद नहीं किए हैं और वह खेल मंत्रालय के साथ बातचीत कर रहा है और उसे महिला जूनियर विश्व कप को लेकर सकारात्मक परिणाम की उम्मीद है।

Edited By: Jitendra Singh