वित्तीय अनियमितता पर चेयरमैन से मांगा स्पष्टीकरण

जागरण संवाददाता, हाथरस : नगर के विकास कार्यों में वित्तीय अनियमितता की शिकायतों का शासन ने संज्ञान लिया है। नगर विकास अनुभाग द्वितीय के प्रमुख सचिव अमृत अभिजात ने हाथरस नगर पालिका अध्यक्ष आशीष शर्मा को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। उनसे सात दिन के भीतर जवाब मांगा है। स्पष्टीकरण नहीं देने पर कार्रवाई की बात कही है। प्रमुख सचिव की ओर से जारी नोटिस में तीन बिंदुओं पर जवाब मांगा गया है। पहले बिंदु में शहर के प्राचीन तालाब को लेकर शिकायत का संज्ञान लिया गया है। इसमें कहा गया है कि तालाब चौराहे के सुंदरीकरण के लिए प्रथम डीपीआर दो करोड़ रुपये के सापेक्ष दूसरी डीपीआर 6.76 करोड़ रुपये प्रस्तुत की गई। इसके लिए न्यूनतम निविदा 5.94 करोड़ प्राप्त हुई। इस कार्य की अवधि 18 माह तय की गई थी। पांच करोड़ से अधिक का भुगतान संबंधित फर्म को किया जा चुका है, शेष 10 प्रतिशत धनराशि का भुगतान किया जाना अभी शेष है। तालाब का कार्य भी अभी पूरा न होकर रुका हुआ है। सचिव ने पूछा है कि डीपीआर से तीन गुना अधिक धनराशि व्यय होने के बावजूद कार्य अभी पूरा नहीं हुआ है, जबकि 18 माह की अपेक्षा चार वर्ष से अधिक समय व्यतीत हो चुका है। ऐसा क्यों? दूसरे बिंदु में कहा गया है कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की आपूर्ति के लिए मै. जिया इंटर प्राइजेज प्रा.लि. का अनुबंधन 31 मार्च 2019 को समाप्त होने के पश्चात कर्मचारियों की आपूर्ति नियमानुसार शहरी आजीविका केंद्र के माध्यम से करानी चाहिए, लेकिन शासन के नियमों की अनदेखी कर इसे ई-टेंडरिंग से कराया जा रहा है। इसमें वित्तीय अनियमितता परिलक्षित होती है। तीसरे बिंदु में प्रमुख सचिव ने पूछा है कि छह जून 2018 को छह माह के लिए 12 स्थानों पर तीन वर्ष के लिए 1.46 करोड़ की न्यूनतम निविदा गर्ग इंटर प्राइजेज की स्वीकृत की गई। वर्ष 2018-19 में फर्म को 50.68 लाख रुपये, वर्ष 2019-20 में 39.13 लाख रुपये का भुगतान किया गया है। वर्ष 2020-21 में जांच रिपोर्ट में कितनी धनराशि प्रदान की गई, इसका उल्लेख संबंधित पत्रावली में नहीं किया गया है। अनुबंध के अनुसार शहर में वाटर एटीएम लगाए जाने थे, जबकि पेयजल की सुविधा रिक्शा के माध्यम से कराई गई। कार्य की प्रकृति परिवर्तित होने पर अलग से बोर्ड की स्वीकृति और टेंडर की कार्यवाही नहीं कराई गई। गर्ग इंटरप्राइजेज फर्म में उपनीत गौड, ध्रुपित अग्रवाल, सुजीत कुमार पचौरी पार्टनर दर्शाए गए, जबकि ललित कुमार शर्मा का उल्लेख नहीं किया गया। इस संबंध में प्रमुख सचिव ने उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम की धारा-48 के तहत सात दिन के अंदर साक्ष्यों सहित स्पष्टीकरण शासन को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। इनका कहना है सांच को कोई आंच नहीं। शहर में जो भी विकास कार्य कराए गए हैं, वे नियमानुसार कराए गए हैं। कुछ लोग विकास विरोधी मानसिकता से शिकायत करते रहते हैं। किसी भी एजेंसी से जांच करा ली जाए, दूध का दूध, पानी का पानी हो जाएगा। सभी बिंदुओं पर शासन को साक्ष्यों सहित स्पष्टीकरण भेजा जाएगा। आशीष शर्मा, नगर पालिकाध्यक्ष, हाथरस

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