देहरादून, [जेएनएन]: सीबीएसई परिणाम में अंग्रेजी इस बार भी छात्रों पर भारी पड़ी। अन्य विषय में बेहतर अंक पाने वाले छात्र अंग्रेजी में पिछड़ गए। इसका असर उनके ओवरऑल रिजल्ट पर भी पड़ा। 

वैसे तो अंग्रेजी महज एक भाषा है और विज्ञान व गणित जैसी जटिल भी नहीं। शायद यही वजह है कि अधिकतर छात्र अंग्रेजी को आसान मानने की भूल कर बैठते हैं और पूरा ध्यान अन्य विषयों पर लगा देते हैं। विगत वर्षों में ऐसा कई बार हुआ कि इस चूक के कारण सर्वश्रेष्ठ का ताज दून के धुरंधरों के सिर सजते-सजते रह गया। दरअसल 12वीं के बोर्ड एग्जाम में अमूमन छात्र अंग्रेजी को इतनी गंभीरता से नहीं लेते। 

अधिकतर छात्र इसे टेक इट ग्रांटेड विषय के तौर पर लेते हैं। खासकर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों का ध्यान गणित व विज्ञान जैसे चुनिंदा विषयों पर ही होता है। इस सोच और अप्रोच का नतीजा बुरा होता है। अंग्रेजी अनिवार्य विषय है और इसमें गलतियों के कारण न सिर्फ अंग्रेजी के पेपर में कम नंबर मिलते हैं, बल्कि अंतिम नतीजों पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। यह असर इस बार भी दिखाई दिया। अन्य अंकों के शतकवीर अंग्रेजी में चूक गए। 

ग्रेस मार्क्‍स ने दी राहत 

परीक्षा परिणाम में अतिरिक्त अंक नीति का छात्रों को फायदा मिला है। इससे 90 फीसद से ऊपर अंक प्राप्त करने वाले छात्रों का प्रतिशत बढ़ गया है। हालांकि विशेषज्ञ यह मान रहे हैं कि 'स्ट्रीमलाइन' छात्रों को इसका फायदा नहीं मिला है। मॉडरेशन पॉलिसी खत्म करने के फैसले पर इस साल दिल्ली हाई कोर्ट ने रोक लगा दी थी। जिससे इस बार भी छात्रों को ग्रेस मार्क्‍स का तोहफा मिला। यह एक ऐसा नियम है, जिसमें उन छात्रों को ग्रेस माक्र्स दिए जाते हैं, जो थोड़े अंक से फेल होने वाले होते हैं। 

इसके अलावा इस नियम के तहत छात्रों को प्रश्न पत्र में दिए गए अत्यधिक कठिन प्रश्नों या गलत प्रश्नों के लिए भी ग्रेस मार्क्‍स देने का प्रावधान है। सीबीएसई के पास प्रश्न पत्रों में अत्यधिक कठिन प्रश्नों के बाबत शिकायतें आती हैं। जिनसे निपटने के लिए बोर्ड ने एक एक्सपर्ट पैनल बनाया है, जो मामले की जांच कर इस तरह के प्रश्नों के लिए हर छात्र को ग्रेस मार्क देने का फैसला करता है। 

विशेषज्ञों ने बताया कि फिजिक्स, गणित, अर्थशास्त्र व अकाउंट में मॉडरेशन पॉलिसी का असर दिखा है, लेकिन अंग्रेजी में इसका असर नहीं दिखा। इससे 90 फीसद वाले छात्र तो बढ़े, लेकिन पास होने के लिए जूझ रहे छात्रों को इसका फायदा नहीं मिला।

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Posted By: Sunil Negi