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'तकनीक नहीं, मानवीय ईमानदारी असली मुद्दा'; पेपर लीक पर बोले IIT मद्रास के डायरेक्टर

Published: Mon, 27 Jul 2026 07:56 PM (IST)Updated: Mon, 27 Jul 2026 08:10 PM (IST)

केंद्र सरकार की परीक्षा सुधार टास्क फोर्स के सदस्य वी. कामकोटी ने बताया कि प्रश्नपत्र तैयार करने वालों की ईमानदारी और विश्वसनीयता ही सबसे बड़ी चुनौती है।

आईआईटी मद्रास के निदेशक वी. कामकोटी(फाइल फोटो)

आईआईटी मद्रास के निदेशक वी. कामकोटी(फाइल फोटो)

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डिजिटल डेस्क, चेन्नई। परीक्षा सुधारों पर केंद्र सरकार के टास्क फोर्स के सदस्य और आईआईटी मद्रास के निदेशक वी. कामकोटी ने सोमवार को कहा कि परीक्षाएं आयोजित करने में सबसे बड़ी चुनौती प्रश्नपत्र तैयार करने वाले की ईमानदारी और विश्वसनीयता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह सुरक्षित और लीक-प्रूफ बनाने के लिए सिफारिशें देने हेतु इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में छह सदस्यीय उच्च स्तरीय टास्क फोर्स के गठन की घोषणा की थी।

पद्म श्री से सम्मानित कामकोटी ने कहा कि पिछले चार दशकों में सार्वजनिक परीक्षाओं में बैठने वाले छात्रों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है, जिससे इस क्षेत्र में तकनीकी हस्तक्षेप बेहद महत्वपूर्ण हो गया है।

परीक्षा प्रणाली के दो सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ

चेन्नई में पत्रकारों से बात करते हुए कामकोटी ने कहा कि किसी भी परीक्षा प्रणाली में दो समूहों का विश्वसनीय होना अनिवार्य है। पहला समूह प्रश्नपत्र तैयार करने वालों का है, जो सबसे महत्वपूर्ण हैं। दूसरा समूह परीक्षा केंद्रों पर तैनात निरीक्षकों का है। मेरी राय में, सबसे बड़ी चुनौती यह है कि हम प्रश्नपत्र तैयार करने वालों के बीच विश्वास का निर्माण और उसे कायम कैसे रखें।

उन्होंने आगे कहा कि निरीक्षण के स्तर पर हम निगरानी के लिए पहले ही कैमरों का इस्तेमाल शुरू कर चुके हैं। हालांकि, सबसे मुख्य मुद्दा अभी भी प्रश्नपत्र तैयार करने वाले की सत्यनिष्ठा और विश्वसनीयता का ही है।

विश्वसनीयता को बनाए रखना ही मूल चुनौती

कामकोटी ने कहा कि बुनियादी चुनौती भरोसे की है। उन्होंने कहा कि हमें ऐसे शिक्षकों की आवश्यकता है जिन पर हम भरोसा कर सकें, ऐसे लोग जो प्रश्नपत्र तैयार करें, पूर्ण गोपनीयता बनाए रखें, और इसकी सामग्री को उजागर किए बिना अपनी जिम्मेदारी का ईमानदारी से निर्वहन करें। यह हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती है।

इस टास्क फोर्स का गठन कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में नीट पेपर लीक को लेकर चले 36 दिनों के आंदोलन के खत्म होने के एक दिन बाद किया गया है। इस आंदोलन का अंत धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफे के साथ हुआ था।

अब विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों का एक बहुविषयक समूह राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा आयोजित की जाने वाली परीक्षाओं के सुधारों के लिए इस टास्क फोर्स का हिस्सा बनेगा। कामकोटी ने कहा, "एक समिति के रूप में, मेरा मानना है कि हमारी जिम्मेदारी एक ऐसी पूरी तरह से पारदर्शी, मजबूत, लीक-प्रूफ और तकनीक-संचालित परीक्षा प्रणाली तैयार करने के जनादेश को पूरा करना है, जो इतने बड़े पैमाने पर प्रभावी ढंग से काम कर सके। संरचनात्मक सुधार का यही असली मतलब है।"

साल 2024 और 2026 के पेपर लीक में अंतर

कामकोटी ने इस बात पर जोर दिया कि सार्वजनिक परीक्षाएं सालों से आयोजित की जा रही हैं, लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं। उन्होंने कहा कि जो चीज़ बदली है, वह है परीक्षाओं का पैमाना, अगर आप नीट 2024 को देखें, तो लीक तब हुआ था जब प्रश्नपत्र छपने के बाद रास्ते में थे।

उन्हें बक्सों में बंद करके वितरण केंद्र भेजा गया था और वहां से परीक्षा केंद्रों तक ले जाया जा रहा था। उस प्रक्रिया के दौरान कहीं लीक हुआ था। जांच एजेंसी ने स्पष्ट किया था कि वह घटना सीमित थी और उससे केवल 40 से 50 छात्र ही प्रभावित हुए थे।

उन्होंने आगे बताया, "साल 2026 में फिर से पेपर लीक हुआ। लेकिन इस बार यह वितरण प्रक्रिया के दौरान नहीं हुआ, जो कि 2024 के लीक का कारण था। इस बार एनटीए के परिसर से प्रश्नपत्र बाहर निकलने, छपने, बक्सों में पैक होने और परीक्षा के दिन परीक्षा केंद्र पर छात्रों तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया के दौरान कहीं कोई लीक नहीं हुआ, जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार, इस बार लीक की शुरुआत खुद प्रश्नपत्र तैयार करने वाले के स्तर से हुई थी।"

क्या प्रश्नपत्र तैयार करने में AI की मदद ली जा सकती है?

जब कामकोटी से पूछा गया कि क्या प्रश्नपत्र तैयार करने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद ली जा सकती है, तो उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता कि AI स्वतंत्र रूप से प्रश्नपत्र तैयार कर सकता है, AI प्रश्न उत्पन्न कर सकता है, लेकिन फिर भी किसी न किसी को उनकी समीक्षा करनी होगी।

उन्होंने आगे कहा, "नीट परीक्षा इस मामले में बहुत समावेशी है क्योंकि यह 12 भाषाओं में आयोजित की जाती है, इसलिए किसी को इसके अनुवादों की जांच भी करनी होगी। AI निश्चित रूप से अनुवाद में सहायता कर सकता है, लेकिन किसी व्यक्ति को उन अनुवादों का बारीकी से परीक्षण करना ही होगा।"

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