जासं, ग्रेटर नोएडा :

हस्तशिल्प उत्पादों के निर्यातकों के समूह एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (ईपीसीएच) ने उद्योग व वाणिज्य मंत्रालय और शिपिग मंत्रालय से कंटेनर व शिपिग शुल्क में राहत देने की मांग की है।

ईपीसीएच अध्यक्ष राज कुमार मल्होत्रा ने बताया कि महामारी ने दुनियाभर में एक्जिम लाजिस्टिक्स को बाधित कर दिया है। निर्यातकों को कंटेनरों की कमी और अधिक शुल्क का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिका की सरकार ने हाल में शिपिग और लाजिस्टिक्स के मनमाने और अनुचित कामकाज को रोकने के लिए ओशन शिपिग रिफा‌र्म्स एक्ट 2022 कानून पारित किया है। शिपिग कंपनियों ने चीन से संयुक्त राज्य अमेरिका जाने वाले कंटेनरों के किराये में भारी कटौती की है, जो कुछ महीने पहले लगभग 15000 अमरीकी डालर था अब लगभग 5500 अमरीकी डालर तक कम हो गया है। भारत से जाने वाले कंटेनरों का किराया 10,000 अमेरिकी डालर है। भारत से यूएसए जाने वाले एक कंटेनर के किराये के लिए लगभग पांच-छह हजार का अतिरिक्त शिपिग शुल्क लिया जा रहा है। ईपीसीएच महानिदेशक राकेश कुमार ने बताया कि ईपीसीएच ने वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय और शिपिग मंत्रालय से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। हस्तशिल्प के निर्यातकों को कंटेनर माल ढुलाई सब्सिडी पर विचार किया जा सकता है। माल ढुलाई का शुल्क अधिक होने से अमेरिकी आयातकों ने भारतीय हस्तशिल्प निर्यातकों को दिए गए आर्डर को या तो रोकना या रद करना शुरू कर दिया है। इसने छोटे और एमएसएमई निर्यातकों के सामने संकट पैदा कर दिया है।

Edited By: Jagran