जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। जर्मनी में पढ़ाई करने या रोजगार के अवसर तलाशने वाले युवाओं व पेशेवरों के लिए यह अच्छी खबर है। भारत और जर्मनी के बीच सोमवार को एक समग्र इमाग्रेशन व माबिलिटी साझेदारी पर हस्ताक्षर किया गया है। यह समझौता तब हुआ है, जब जर्मनी ने अगले वर्ष ने अपने देश में गैर-यूरोपीय मूल के पेशेवर व कार्यकुशल कामगारों के लिए अपने देश के दरवाजे को खोलने का ऐलान किया है।

बता दें कि जर्मनी, ब्रिटेन के बाद दूसरा देश है जिसके साथ हाल ही में भारत ने इस तरह का समझौता किया है। समझौते पर भारत के दौरे पर आई जर्मनी की विदेश मंत्री एनालेना बेरबॉक और विदेश मंत्री एस जयशंकर ने किये। दोनों विदेश मंत्रियों के बीच लंबी द्विपक्षीय वार्ता हुई जिसमें द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और बहुपक्षीय मुद्दों को लेकर विस्तार से चर्चा हुई है। विदेश मंत्रालय ने मोबिलिटी एग्रीमेंट को दोनो देशों के बीच गहरे होते रणनीतिक रिश्ते का उदाहरण के तौर पर बताया है। विदेशियों को अपने देश में आगमन के लिए नए उदारवादी नियम जर्मनी अगले वर्ष के शुरुआत से लागू कर रहा है।

समझौते के मुताबिक दोनो देश एक दूसरे के प्रशिक्षित नागरिकों व पेशेवरों को आसानी से वीजा प्रदान करेंगे व काम करने का मौका देंगे। इसके तहत भारतीय छात्रों को पढ़ाई पूरी करने के बाद जर्मनी में 18 महीने रहने का वीजा, हर वर्ष तीन हजार कामगारों को वीजा, आसानी से आने-जाने के लिए मल्टी इंट्री वीजा जैसी सुविधाएं दी जाएंगी। जर्मनी की विदेश मंत्री ने कहा कि, इसमें किसी को शक नहीं होनी चाहिए कि 21वीं सदी में हिंद-प्रशांत क्षेत्र व दूसरे क्षेत्रों को दिशा देने में भारत की बहुत ही अहम भूमिका रहेगी। भारत ने जिस तरह से पिछले 15 वर्षों में 40 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है वह इसकी क्षमता को दर्शाता है। कई मायने में भारत दुनिया के कई देशों के लिए एक आदर्श है।

जर्मन विदेश ने भारत को जर्मनी का एक प्राकृतिक साझेदार बताया और कहा कि रक्षा क्षेत्र में सहयोग की अपार संभावनाएं हैं व इस बारे में दोनों देशों में बातचीत हो रही है। जर्मनी भारत के साथ अपने सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने को तत्पर है। विदेश मंत्री जयशंकर ने बताया कि उन्होंने बेरबॉक के साथ वार्ता में अफगानिस्तान, पाकिस्तान में पोषित होने वाले आतंकवाद, ¨हद प्रशांत क्षेत्र की स्थिति, यूक्रेन-रूस तनाव समेत अन्य सभी मुद्दों पर बात हुई है। जयशंकर ने दो टूक फिर कहा कि, जब तक पाकिस्तान की तरफ से आतंकवाद को समर्थन देना बंद नहीं होता है तब तक उसके साथ बातचीत करने का कोई मतलब नहीं है।

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Edited By: Devshanker Chovdhary

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