नई दिल्‍ली [जागरण स्‍पेशल]। बीते दिनों देश के पूर्वी तट पर आए भीषण चक्रवाती तूफान ‘फणि’ से निपटने की तैयारियों के लिए भारत की दुनियाभर में वाहवाही हो रही है। तूफान का सटीक पूर्वानुमान लगाने और सही वक्त पर चेतावनी जारी करने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने भारतीय मौसम विभाग की जमकर तारीफ की है। अत्याधुनिक तकनीक की बदौलत मौसम विशेषज्ञों/वैज्ञानिकों के लिए बदलते मौसम और प्राकृतिक आपदाओं की सटीक जानकारी उपलब्ध कराना पहले से आसान हो गया है। ऐसे में युवाओं के लिए इस चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में करियर का बेहतर विकल्प है...

एक दशक पहले तक अगर कोई मौसम पूर्वानुमान जारी होता था, तो लोग उसका उलटा ही अर्थ लेते थे, क्योंकि ये पूर्वानुमान ज्यादातर गलत साबित हो जाते थे। लेकिन आज स्थितियां काफी बदल चुकी हैं। अब कई दिन पहले ही मौसम की सटीक जानकारी हासिल की जा सकती है। आज हमारे शहर का मौसम कैसा रहेगा? तापमान कितना रहेगा? कहां झमाझम बारिश होगी या कहां आंधी- तूफान आ सकता है। मौसम विज्ञानियों के लिए यह जानना काफी आसान हो गया है। इतना ही नहीं, उपग्रहों की लॉन्चिंग करनी हो, हवाई जहाजों को उड़ान भरना हो या फिर समुद्रों में जहाजों के सुरक्षित आवागमन का मामला हो, हर जगह मौसम विज्ञान का बढ़-चढ़कर इस्तेमाल हो रहा है। मौसम के पूर्वानुमानों का उपयोग आजकल खेलों में भी होने लगा है।

मौसम का मिजाज देखकर ही क्रिकेट जैसे खेलों के शेड्यूल तय किए जा रहे हैं, ताकि आयोजन में बाधा न आए। ऐसे में यह कह सकते हैं कि पहले की तरह मौसम भविष्यवाणियों का उपयोग इनदिनों सिर्फ खेती-बाड़ी तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका दायरा और बढ़ा है। हाल-फिलहाल के वर्षों में भारत समेत दुनियाभर के महानगरों में जिस तेजी से पर्यावरण प्रदूषण के दुष्प्रभाव सामने आ रहे हैं, इसकी वजह से मौसम विज्ञानियों और इनके सहायकों की जरूरत प्रदूषण नियंत्रक एजेंसियों को भी पड़ रही है।

जॉब के अवसर: इस फील्ड में पूर्वानुमान, परामर्श, अनुसंधान और अध्यापन जैसे क्षेत्रों में अपनी रुचि के अनुसार करियर बनाया जा सकता है। मौसम विज्ञान की पढ़ाई के बाद युवाओं के पास सरकारी और निजी, दोनों क्षेत्रों में जॉब के मौके हैं। इसकी पढ़ाई करके आप इंडियन मीटिअरोलॉजिकल डिपार्टमेंट(भारतीय मौसम विज्ञान विभाग), इंडियन एयरफोर्स, इंडियन नेवी, इसरो, डीआरडीओ, स्पेस एप्लीकेशन सेंटर, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मीटिअरोलॉजी, नेशनल रिमोट सेंसिंग जैसे संगठनों में आसानी से नौकरी पा सकते हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अलावा आजकल सभी समाचार चैनल्स और न्यूज एजेंसियों में प्रतिदिन मौसम का पूर्वानुमान प्रसारित करने के लिए इसके जानकारों को जॉब में प्राथमिकता दी जाती है। इसके अलावा, धीरे-धीरे कुछ प्राइवेट वेदर कंपनियां (जैसे स्काईमेट) और एनजीओ भी अपने यहां पर्यावरण वैज्ञानिकों को रख रही हैं। दरअसल, ऐसे प्रोफेशनल पर्यावरणीय प्रदूषण को नियंत्रित करने में काफी माहिर माने जाते हैं। ग्लोबल वार्मिंग संकट बढ़ने से दुनिया के दूसरे देशों में भी आजकल मौसम विज्ञानियों की काफी मांग है।

बढ़ता आकर्षण: मौसम का क्षेत्र अपने आप में बहुत ही आकर्षक फील्ड है। अगर आपकी रुचि बादल, बारिश, आंधी-तूफान या धुंध-कोहरे जैसी पर्यावरणीय गतिविधियों के रहस्यों को जानने में है, तो यह आपके लिए करियर के लिहाज से एक अच्छा फील्ड हो सकता है। सेटेलाइट के इस युग में उपग्रहों, रडार, रिमोट सेंसर या एयर प्रेशर जैसे कई माध्यमों से मौसम संबंधी सूचनाएं एकत्र की जाती हैं। हाल के वर्षों में ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरण प्रदूषण के बढ़ते दुष्प्रभावों ने इस फील्ड की मांग और बढ़ा दी है।

कोर्स एवं शैक्षिक योग्यताएं: देश में कई विश्वविद्यालयों और कॉलेजों द्वारा मौसम विज्ञान में डिग्री, डिप्लोमा जैसे कोर्स ऑफर किए जा रहे हैं। मौसम विज्ञान में करियर बनाने के इच्छुक कैंडिडेट्स मौसम विज्ञान एवं समुद्र विज्ञान में स्नातक एवं स्नातकोत्तर के साथ ही मीटिअरोलॉजी में एक वर्षीय का डिप्लोमा कर सकते हैं। अंडरग्रेजुएट कोर्स में प्रवेश के लिए पीसीएम विषयों से 12वीं होना जरूरी है। अगर अनुसंधान व टीचिंग फील्ड में जाना चाहते हैं, तो आगे इसी में पोस्ट ग्रेजुएशन और पीएचडी भी कर सकते हैं। एनवॉयर्नमेंटल स्टडीज की पढ़ाई करके भी इस फील्ड में एंट्री पा सकते हैं।

सैलरी पैकेज: वैज्ञानिक ग्रुप ए श्रेणी के एंप्लायी होते हैं। सरकारी विभागों में किसी भी नए मौसम वैज्ञानिक को शुरू में 40-60 हजार रुपये तक सैलरी मिलती है। अनुभव के साथ सैलरी भी बढ़ती रहती है।

प्रमुख संस्थान

  • इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मीटिअरोलॉजी, पुणे https://www.tropmet.res.in/
  • आइआइटी, खड़गपुर https://erp.iitkgp.ac.in/
  • शिवाजी यूनिवर्सिटी, कोल्हापुर http://www.unishivaji.ac.in/
  • इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बेंगलुरु http://www.iisc.ernet.in/

तेजी से इंप्रूव हुई है फोरकास्टिंग

मौसम विज्ञान एक बहुत ही डायनामिक फील्ड है। सैटेलाइट्स के आ जाने से पहले की तुलना में फोरकास्टिंग भी काफी इंप्रूव हुई है। हमारे सैटेलाइट आजकल हर चीजें कवर करने लगी हैं। इससे हर चीज की सटीक जानकारी मिल जाती है। पहले इस फील्ड में कुछ ही जगहों पर नौकरियों के मौके थे, जिनमें भारतीय मौसम विभाग, इंडियन एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीट्यूट और एयरपोट्र्स हैं जहां पर वेदर फोरकास्टर की जरूरत होती थी। लेकिन भविष्य में यूथ के लिए नौकरियां अलग-अलग जगहों पर सामने आएंगी। वेदर फोरकास्टिंग के लिए हर शहर जाना जाएगा, क्योंकि हर शहर की अपनी विशेषताएं हैं। भविष्य में इसके जो स्कोप बन रहे हैं, वह है टूरिज्म व एक्सप्लोरेशन का क्षेत्र और निजी एजेंसीज, जहां पर आपकी जरूरत के अनुसार वेदर फोरकास्टिंग की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

-के. सिद्धार्थ, अर्थ साइंटिस्ट

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