प्रयागराज, जागरण संवाददाता। शासन का जोर हर काम का त्वरित निस्तारण करने पर है। इसके मद्देनजर कई निर्देश जारी हो चुके हैं। लेकिन, उच्च शिक्षा निदेशालय व उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग में ऐसे निर्देशों को गंभीरता से नहीं लिया जाता। यही कारण है कि विज्ञापन संख्या 47 के तहत चयनित चार माह बाद भी नियुक्ति के लिए भटक रहे हैं। चयनित नियुक्ति के लिए अधिकारियों का चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनकी कहीं सुनवाई नहीं हो रही।

अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) डिग्री कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर की 1150 पदों की भर्ती प्रक्रिया कई महीने से चल रही है। विज्ञापन संख्या 47 के तहत लिखित परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों का साक्षात्कार उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग में 29 जुलाई से चल रहा है। मौजूदा समय में हिंदी व समाजशास्त्र के अभ्यर्थियों का साक्षात्कार लिया जा रहा है। इसके बाद शिक्षाशास्त्र व राजनीतिक विज्ञान विषय के अभ्यर्थियों का साक्षात्कार होगा।

साक्षात्कार के बाद अगस्त से रिजल्ट घोषित होने का सिलसिला शुरू हो गया। अभी तक 31 विषयों के 550 पदों का रिजल्ट घोषित हो चुका है। लेकिन, किसी भी चयनित को नियुक्ति नहीं दी गई। आयोग अभी तक सारे चयनितों का ब्योरा उच्च शिक्षा निदेशालय नहीं भेज पाया है। जबकि जिन चयनितों का ब्योरा पहुंच चुका है निदेशालय उनकी काउंसिलिंग भी नहीं करा रहा है। आयोग की सचिव डॉ. वंदना त्रिपाठी का कहना है कि 20 विषयों के चयनितों का ब्योरा निदेशालय भेजा जा चुका है। बचे चयनितों का ब्योरा जल्द भेज दिया जाएगा। रही बात नियुक्ति की तो यह कार्रवाई निदेशालय को पूरी करनी है।

निदेशक उच्च शिक्षा निदेशालय डॉ. वंदना शर्मा ने कहा कि विज्ञापन संख्या 47 के चयनितों की ऑनलाइन काउंसिलिंग होनी है। इधर निदेशालय के साफ्टवेयर में कुछ सुधार करके उसकी टेस्टिंग की जा रही है। टेस्टिंग पूरी करके एनआइसी की ऑडिट कराकर काउंसिलिंग शुरू कर दी जाएगी। इसमें एक सप्ताह का समय लगेगा।

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