प्रयागराज, जागरण संवाददाता। उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग ने आरओ/एआरओ यानी समीक्षा अधिकारी/सहायक समीक्षा अधिकारी (प्रारंभिक) परीक्षा 2016 को निरस्त कर दिया है। आयोग ने यह निर्णय सपा शासन में लखनऊ में पेपर लीक होने और निरंतर विवाद बढ़ने के कारण लिया है। प्रदेशभर के प्रतियोगी छात्रों ने हंगामा किया था व आइपीएस अमिताभ ठाकुर ने पेपर लीक की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। सीबीसीआइडी लखनऊ की जांच से कोर्ट संतुष्ट नहीं हुआ और कुछ दिन पहले कोर्ट ने नए सिरे से जांच का आदेश दिया है। यूपीपीएससी यह परीक्षा अब तीन मई 2020 को दोबारा कराएगा। इसके लिए किसी का आवेदन नहीं लिया जाएगा। जो अभ्यर्थी पहले परीक्षा में शामिल हुए थे उन्हीं को परीक्षा में बैठने का मौका मिलेगा।

पदों के लिए वर्ष 2016 में निकाली थी भर्ती

पेपर लीक प्रकरण की जांच के लिए उप्र लोकसेवा आयोग ने दो सदस्यीय जांच समिति गठित की है। इसके साथ ही आयोग ने विचार किया कि पुन: जांच कराने से प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम अनिश्चितकालीन रूप से अधर में लटक गया है। इसके मद्देनजर निर्णय लिया गया कि जब तक आपराधिक वाद निस्तारित नहीं होता तब तक प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम घोषित करने संबंधित निर्णय लिया जाना संभव नहीं होगा। इससे अनिश्चितता की स्थिति बनी रहेगी। इसीलिए प्रारंभिक परीक्षा निरस्त करके दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय लिया गया है। लेकिन, इसका अलग से विज्ञापन जारी नहीं किया जाएगा।

दो लाख अभ्यर्थियों ने दिया था इम्तिहान

यूपीपीएससी ने वर्ष 2016 में आरओ-एआरओ के 361 पदों की भर्ती निकाली थी। इसकी प्रारंभिक 27 नवंबर 2016 को दो पाली में प्रदेश के 21 जिलों में 827 केंद्रों में कराई गई। परीक्षा के लिए 3,85,192 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया था। उनमें से 2,04,900 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए। परीक्षा के दौरान लखनऊ के एक केंद्र से पेपर वाट्सएप पर वायरल हो गया। परीक्षा के बाद आइपीएस अमिताभ ठाकुर ने लखनऊ के हजरतगंज थाना में दोनों प्रश्नपत्रों के आउट होने की रिपोर्ट दर्ज कराई। रिपोर्ट के बाद उसकी जांच सीबीसीआइडी लखनऊ को सौंपी गई।

सीबीसीआइडी की रिपोर्ट खारिज

जांच पूरी करके सीबीसीआइडी की टीम ने 29 सितंबर 2018 को विशेष न्यायाधीश सीबीसीआइडी के कोर्ट में उक्त प्रकरण में अपनी अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत किया। लेकिन, वादी अमिताभ ठाकुर रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं हुए। उन्होंने अंतिम रिपोर्ट के विरुद्ध कोर्ट में आपत्ति दाखिल कर दी। इस पर विशेष न्यायाधीश सीबीसीआइडी ने एक जनवरी 2020 को सीबीसीआइडी की अंतिम रिपोर्ट को निरस्त कर दिया। साथ ही प्रकरण की जांच दोबारा कराने का आदेश दिया है।

Posted By: Neel Rajput

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