नई दिल्ली, जेएनएन। UN Budget Crunch: 193 देशों के संगठन संयुक्त राष्ट्र में पैसों की कमी हो गई है। यह संकट इतना गहरा गया है कि यूएन में काम बंद करने की नौबत आ गई है। हालात इस कदर खराब हैं कि लिफ्ट और एसी जैसी बुनियादी सुविधाएं बंद हो गई हैं। यूएन के पास सिर्फ 15 दिन केे खर्च के ही पैसेे बचेे हैं। अब सवाल है कि आखिर दुनिया की पंचायत कहे जाने वाले इस संस्थान को इस हालत से क्यों गुजरना पड़ रहा है? इस मामले को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि आखिर यूएन को पैसा कहां से और कितना मिलता है? वह इन पैसों को कहां खर्च करता है और इसके बाद ऐसा क्या हुआ कि यूएन के पास अब बिल्कुल भी फंड नहीं बचा है...

सदस्य देश देते हैं फंड

यूएन का खर्च उसके मैंबर्स द्वारा दिए जाने वाले फंड से चलता है। संयुक्त राष्ट्र के कुल 193 सदस्य देश हैं। ये सभी एक तय रकम यूएन को देते हैं। इनमें सबसे ज्यादा फंड अमेरिका देता है, जो कि करीब 10 बिलियन डॉलर सालाना है। इसके बाद इंग्लैंड और जापान अपना हिस्सा देते हैं। फंड देने वाले देशों की सूची में भारत टॉप-20 में शामिल नहीं है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इसमें कटौती की बात करते रहे हैं।

कहां होता है खर्च

यूएन दुनियाभर में कई मानवीय काम करता है। इसके लिए वह खर्च भी करता है। मानवीय कार्य के लिए सहायता, विकास के लिए सहायता, पीसकीपिंग ऑपरेशन्स, संधि संबंधी काम और टेक्निकल ऑपरेशन मुख्य हैं, जहां सबसे ज्यादा पैसा खर्च किया जाता है। साल 2016 में सिर्फ मानवीय सहायता में यूएन ने 16.4 डॉलर खर्च किया है। वैश्विक समस्याओं की वजह से कुछ सालों  में यूएन के खर्च में वृद्धि हुई है। इस वजह से साल 2016 में कुल बज़ट में 5.7 बिलियन डॉलर की बढ़ोत्तरी की गई थी।

क्यों आई ये समस्या

यह समस्या इसलिए पैदा हुई है, क्योंकि कुछ देशों ने अभी तक अपना फंड नहीं दिया है। 193 देशों में से अब तक सिर्फ 129 देशों ने ही अपना फंड दिया है। इनमें केवल 35 देशों ने अभी कर पूरा फंड दिया है। फंड देने वाले इन 35 देशों में भारत भी शामिल है। वहीं, 65 देशों के पास अभी तक कुल 1.386 बिलियन डॉलर बकाया है, जिनमें ब्राजील, अर्जेंटीना, मैक्सिको, ईरान, इजरायल और वेनेजुएला प्रमुख देश हैं। इस रकम के अलावा अमेरिका को भी बड़ा हिस्सा चुकाना बाकी है। जबकि 35 देशों की लिस्ट में चीन और पाकिस्तान का नाम नहीं है।

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