नई दिल्ली, ऑनलाइन डेस्क। ऐसे समय में जब पूरा विश्व कोरोना वायरस (कोविड-19) की महामारी से संघर्ष कर रहा है, दक्षिण एशिया के विभिन्न देशों में स्कूलों के बंद होने से लगभग 430 मिलियन बच्चों पर शिक्षा व्यवस्था से बाहर होने का खतरा मंडराने लगा है।

यह दावा किया गया है यूनाईटेड नेशंस चिल्ड्रेंस फंड यानि यूनिसेफ द्वारा सोमवार को जारी एक विज्ञप्ति में, जिसके अनुसार कोविड – 19 संकट के पहले से ही दक्षिण एशियाई देशों में 95 मिलियन स्कूल जाने वाली उम्र के बच्चे शिक्षा से वंचित थे।

रिपोर्ट के अनुसार बंद रखे जा रहे स्कूलों के इस दौर में यदि हम शिक्षा के लिए वैकल्पिक माध्यमों की व्यवस्था नहीं करते हैं तो ऐसे बच्चे जो कि पहले ही शिक्षा से दूर थे, वे स्कूली शिक्षा व्यवस्था में कभी वापस नहीं लौट पाएंगे।

भले ही दक्षिण एशियाई देशों में विभिन्न परीक्षा नियामकों द्वारा टर्म और परीक्षाओं के लिए रचनात्मक विकल्पों के जरिए स्कूली छात्रों पर कोविड -19 के असर को कम किया है, लेकिन सम्बन्धित एजेंसियों के लिए जरूरी है कि वे छात्रों की घर से पढ़ाई के वैकल्पिक तरीकों के पहुंचाने के लिए नीतियां भी लागू करें। इसके लिए रेडियो, टेलीविजन और मोबाईल का सहारा लिया जा सकता है और, रिपोर्ट के अनुसार, जिन बच्चों के पास इनकी सुलभता नहीं है, उन्हें प्रिंटेड मैटेरियल उपलब्ध कराया जाए।

दक्षिण एशिया में यूनिसेफ के रीजनल ऑफिस में शिक्षा सलाहकार जिम आकर्स के अनुसार, अफगानिस्तान और नेपाल में तो वंचित बच्चों को लर्निग मैटेरियल्स की डिलीवरी भी शुरू की जा चुकी है। वहीं, बांग्लादेश में टीवी, रेडियो, मोबाईल और इंटरनेट के माध्यमों से अधिकतम छात्रों तक पहुंचाने के साथ-साथ पैरेट्स और लर्नर्स के लिए लर्निंग को ‘इंटेरैक्टिव’ और ‘इंगेजिंग’ बनाया जा रहा है।

Edited By: Rishi Sonwal