UGC Guidelines 2020: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी)  द्वारा अंतिम वर्ष की परीक्षाएं कराने को लेकर 6 जुलाई, 2020 को जारी अधिसूचना के मामले लगातार जोर पकड़ते जा रहे हैं। एक तरफ, देशभर के विभिन्न विश्वविद्यालयों के 31 छात्रों के द्वारा सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर यूजीसी की संशोधित गाइडलाइंस को रद्द करने की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट में विश्वविद्यालयों की अंतिम वर्ष / सेमेस्टर परीक्षाओं के मामले में अगली सुनवाई कल, यानी 31 जुलाई 2020 को होनी है। वहीं, अब इस मामले में एक नया मोड़ आ गया है। विश्वविद्यालयों में अंतिम वर्ष की परीक्षाएं 30 सितम्बर तक आयोजित करने को लेकर यूजीसी की 6 जुलाई की अधिसूचना के समर्थन में अब सुप्रीम कोर्ट में एक हस्तक्षेप याचिका दायर की गई है।

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पुणे के एक प्रोफेसर डीआर कुलकर्णी ने यूजीसी के गाइडलाइंस को चुनौती देने वाली याचिकाओं में हस्तक्षेप अर्जी दायर की है। याचिका में कहा गया है कि यूजीसी की संशोधित गाइडलाइंस छात्रों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किसी प्रकार से नहीं करता है। बता दें कि कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, बिहार, असम, मेघालय समेत देश भर के छात्रों ने यूजीसी द्वारा 6 जुलाई को जारी अधिसूचना को रद्द करने की मांग की है। जिसमें यूजीसी ने विश्वविद्यालयों और कॉलेजों से अंतिम वर्ष की परीक्षाएं अनिवार्य रूप से आयोजित करने को कहा है।

छात्र समेत नेता व अभिभावक भी कर रहे परीक्षा रद्द करने की मांग

अंतिम वर्ष की परीक्षाओं को लेकर यूजीसी की गाइडलाइंस के आने के बाद से लगातार इसका विरोध हो रहा है। छात्र सोशल मीडिया पर अंतिम वर्ष की परीक्षाओं का लगातार विरोध करते आ रहे हैं। इसके अलावे, कई नेता और अभिभावक भी यूजीसी के फैसले का विरोध कर रहे हैं। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल केंद्र सरकार को पत्र लिखकर परीक्षा रद्द करने की मांग कर चुके हैं। साथ ही कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी परीक्षा का विरोध किया है। वहीं, शिवसेना की यूथ विंग ने शीर्ष अदालत में याचिका दायर कर सितंबर तक परीक्षा कराए जाने के निर्णय को चुनौती दी है।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में विश्वविद्यालयों की अंतिम वर्ष / सेमेस्टर परीक्षाओं के मामले में अगली सुनवाई 31 जुलाई 2020 को है। पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यूजीसी को अंतिम वर्ष की परीक्षाएं कराने के विरोध में दायर याचिकाओं को लेकर जवाब दाखिल करने के लिए नोटिस जारी किया है। जस्टिस अशोक भूषण की नेतृत्व वाली बेंच ने आयोग से अपना जवाब दाखिल करने को कहा है। गौरतलब है कि छात्रों ने अपनी याचिका में अंतिम वर्ष की परीक्षाएं रद्द करने के साथ ही उनके परिणाम पूर्व के प्रदर्शन के आधार पर जारी किए जाने की मांग की है। छात्रों ने याचिकाओं में बिहार व असम में बाढ़ की वजह से भारी संख्या में प्रभावित छात्रों की परेशानियां और कई राज्यों द्वारा महामारी के कारण विश्वविद्यालयों की परीक्षायें रद्द करने के फैसले सहित अनेक मुद्दों का कारण दिया गया है।

Posted By: Rishi Sonwal

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