नई दिल्ली, अनुराग मिश्र। मौजूदा समय में इंडस्ट्री में जहां कई मुश्किलें हैं, वहीं कई नए अवसर भी निकल रहे हैं। लॉकडाउन के बाद डिजिटल की दुनिया में कई नई चीजें सामने आई हैं। इन क्षेत्रों में करियर की संभावनाओं के साथ एंटरप्रेन्योरशिप के मौके भी बढ़े हैं। इस दौर में स्टार्टअप कैसे खोले जाएं, नैस्कॉम सीओई-आईओटी इसी दिशा में काम कर रहा है। भविष्य में वह कैसे तरक्की की नई राह खोल सकता है, इस बारे में हमने हरियाणा के प्रिंसिपल सेक्रेटरी (डिपॉर्टमेंट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन) अंकुर गुप्ता और नैस्कॉम सीओई-आईओटी के सीईओ संजीव मल्होत्रा से बात की।

आईओटी और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस

संजीव मल्होत्रा कहते हैं कि आईओटी और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से भविष्य में स्टार्टअप शुरू करने के साथ रोजगार की नई संभावनाओं के द्वार खुलेंगे। यह इंडस्ट्री और इकोनॉमी के लिए ग्रोथ इंजन का काम करेगा। आईओटी सिर्फ एक इंडस्ट्री पर फोकस नहीं करता है, पर यह इंडस्ट्री के अलग-अलग डोमैन और इंडस्ट्री के लिए काफी उपयोगी होता है। बतौर नैस्कॉम सीओई हम इंडस्ट्री के साथ काम करते हैं और जानते हैं कि उनकी जरूरत क्या है। हम स्टॉर्टअप को उनके पास सॉल्यूशन के तौर पर लेकर जा रहे हैं। इससे फायदा यह होता है कि स्टॉर्टअप को काम मिल जाता है और इंडस्ट्री की समस्या सुलझ जाती है।

वह कहते हैं कि नैस्कॉम का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इंडस्ट्री के साथ मिलकर काम करता है। मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स और इन्फॉरमेशन टेक्नोलॉजी (मेटी) के साथ मिलकर नैस्कॉम सीओई ने प्रोजेक्ट शुरू किया था। हमने एक लैब सेट की थी। स्टॉर्टअप के पास इक्विपमेंट और मेजरमेंट के लिए फंड नहीं होता है, ऐसे में हमने लैब में इसे सेटअप किया। सरकार ने अच्छे रिस्पांस के साथ इसे आगे बढ़ाया। हम स्टार्टअप को फंडिंग ऑर्गेनाइजेशन से जोड़ते हैं, किसी टेक्नोलॉजी नेटवर्क से जोड़ते हैं और फिर कस्टमर कनेक्ट कराते हैं। डिजिटल को लेकर लोगों का माइंडसेट बदला है, साथ ही जरूरत भी बढ़ी है, जिससे आने वाले समय में टेक्नोलॉजी को बढ़ावा मिलेगा। मेटी और हरियाणा सरकार के साथ मिलकर हमने हरियाणा में मेटी और कर्नाटक सरकार के साथ मिलकर कर्नाटक, अहमदाबाद में नैस्कॉम सीओई-आईओटी को खोला है। आंध्र प्रदेश में भी इसे खोलने जा रहे।

इसे आप एक उदाहरण से समझ सकते हैं, जैसे लोग फिटनेस बैंड पहनते हैं, उसकी दिन भर की मॉनिटरिंग होती है। कुछ जगहों पर एआई आधारित एक्सरे आ रहे हैं। मौजूदा समय में नियम के हिसाब से डॉक्टर की राय जरूरी है। इसके साथ ही एग्रीगेटर कैब सेवा में सर्वर द्वारा कैब की पूरी प्रक्रिया का संचालन होता है।

हरियाणा के प्रिंसिपल सेक्रेटरी (डिपॉर्टमेंट ऑफ इंफॉर्मेशन-टेक्नोलॉजी इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन) अंकुर गुप्ता का कहना है कि हरियाणा सरकार राज्य में एक इनोवेटिव आइडिया, इंडीपेंडेट थिंकिग आदि पर लगातार काम कर रही है। वह स्टॉर्टअप की लगातार मदद कर रही है। हमने राज्य की सात यूनिवर्सिटी में इनक्यूबेशन सेंटर खोले हैं। प्रत्येक यूनिवर्सिटी को इसके लिए तीस लाख का अनुदान दिया जाता है। हमने विभिन्न स्टेकहोल्डर स्टॉर्टअप, इनक्यूबेटर, इंडस्ट्री आदि के साथ मिलकर एक पोर्टल शुरू किया है। यूनाइटेड नेशंस टेक्नोलॉजी इनोवेशन लैब भी सेटअप की गई है, जिसके माध्यम से महिला उद्यमियों को प्रोत्साहित किया जाएगा। हरियाणा सरकार और नैस्कॉम सीओई-आईओटी साथ मिलकर स्टॉर्टअप की समस्या को दूर करने का काम कर रहे हैं। यहां पर विश्वस्तरीय सुविधाएं हैं, जैसे थ्री-डी प्रिंटर, पावर एनालाइजर, टेस्टिंग इक्विपमेंट्स आदि। इसके अलावा मार्केट की जानकारी के लिए हम इनडेप्थ सेशन, फंडिंग और टेक्निकल सेशंस आदि करते रहते हैं।

मेक इन इंडिया की मांग

संजीव कहते हैं कि आने वाले समय में टेक्नोलॉली को काफी अहमियत मिलने वाली है। हम इसे बीते कुछ समय से नैस्कॉम सीओई-आईओटी में तकनीक और इनोवेशन को लगातार लागू कर रहे हैं। स्टार्टअप से निकल कर बड़े उत्पाद आएंगे, जिनमें कमियां होगी, उन्हें सुधार कर बेहतर किया जाएगा। इससे मेक इन इंडिया उत्पाद भी बढ़ेंगे। हम इन स्टार्टअप को कंपनियों से मिलवाते हैं, चाहें वो कंपनी भारत की हो या बाहर की। कई बार कंपनियां इन उत्पाद को पसंद भी करती हैं। कई कंपनियां इन स्टार्टअप को इस्तेमाल करने लगी हैं। हम इंडस्ट्री में ऐसे-ऐसे समाधान ला रहे हैं, जो प्रभावशाली हो और वाजिब कीमत के हो। मेक इन इंडिया उत्पादों में फ्लेक्सिबिलिटी होगी। हम दो उद्देश्यों की पूर्ति कर रहे हैं, जिनमें एक मेक इन इंडिया और एक डिजिटल इंडिया है। हमारा मुख्य काम है इनोवेशन को बढ़ावा देना। इस काम में हम काफी हद तक सफल भी रहे हैं। इनोवेशन के बढ़ने से रोजगार की संभावनाएं भी देश में बढ़ेंगी। हमारा लक्ष्य है कि भारत को इनोवेशन डेस्टिनेशन के तौर पर देखा जाए। इसे कंज्यूमर इकोनॉमी बनाया जाए। ताकि हम अपने उत्पादों और नए प्रयोगों को बाहर के देशों को भी बेच सकें। वह कहते हैं कि मैं कुछ ऐसे सॉल्यूशन के बारे में जानता हूं, जो छोटी कंपनियों ने बनाए और अस्पतालों ने अपनाए।

हमारी कोशिश है कि हेल्थ केयर, मैन्युफैक्चरिंग, रिटेल ऐसे सॉल्यूशन दे पाएं कि कंपनियां वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्द्धी हो जाएं। हरियाणा के प्रिंसिपल सेक्रेटरी (डिपॉर्टमेंट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन) अंकुर गुप्ता का कहना है कि नैस्कॉम सीओई आईओटी राज्य सरकार के साथ मिलकर स्टार्टअप द्वारा बनाए गए उत्पादों को लोगों और इंडस्ट्री तक ले जाने का काम कर रही है। यह इन स्टॉर्टअप को एक मंच प्रदान करने के साथ-साथ प्रोत्साहित भी करती है। हमने कोविड के दौरान तीन माह की वर्चुअल मेंटरशिप वर्कशॉप सीरीज भी आयोजित की।

कैसे- कब करें स्टॉर्ट अप की शुरुआत

नैस्कॉम सीओई-आईओटी के सीईओ संजीव मल्होत्रा कहते हैं कि स्टॉर्टअप शुरू करने से पहले इन बातों का ध्यान रखें-

जरूरत :

अगर आप स्टॉर्टअप शुरू कर रहे हैं तो देखें इसकी वैल्यू क्या है, किस समस्या का समाधान होने जा रहा है। यह भी देखें कि इसकी जरूरत कहां है।

इंडस्ट्री में अनुभव :

स्टॉर्टअप शुरू करने से पहले इंडस्ट्री में अनुभव जरूर ले लें। तीन से चार साल का अनुभव भी काफी अहम होता है। इससे आप अपने ज्ञान को वृहद कर सकते हैं। साथ ही अपनी स्किल को भी जांच लें, मसलन मैं मार्केटिंग का हूं, इंजीनियरिंग की जानकारी रखता हूं। मसलन, अगर आप मैकेनिकल इंजीनियर हैं तो आपको कंप्यूटर साइंस की प्रैक्टिकल नॉलेज भी होनी चाहिए। यह आपको कंपनी में मिल सकती है।

मेंटर और आइडिया :

स्टॉर्टअप शुरू करने से पहले तैयारी पुख्ता कर लीजिए। एक बेहतर, जानकार मेंटर का चुनाव कर लीजिए। एक अच्छे आइडिया का आकलन करिए, जो बाजार की जरूरत के अनुरूप हो।

वित्तीय स्थिति

अपनी वित्तीय स्थिति भी जांच लें, क्योंकि स्टॉर्टअप के पूर्ण रूप से चलने में कुछ समय लगता है। इसकी वित्तीय स्थिति का आकलन कर लें। मसलन वह अपनी कीमत निकाल सकता है।

जोखिम की क्षमता :

आपके अंदर काम करने का कितना पैशन है, जोखिम लेने की कितनी क्षमता है। स्टॉर्टअप खोलने से पहले उसका आकलन जरूर कर लें। कम उम्र में ही जोखिम लेना बेहतर होता है। 

Posted By: Vineet Sharan

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