नई दिल्ली, जेएनएन। CBSE बारहवीं में फेल होने या कम अंक पाने का मतलब यह कतई नहीं कि आप आगे कभी कामयाब नहीं हो सकते। देश और दुनिया के तमाम ऐसे लोगों का उदाहरण सामने है, जो स्‍कूली पढ़ाई में या करियर के शरुआती दौर में फेल कर दिए गए थे पर उन्‍होंने अपनी जिद और जुनून से कामयाबी की ऐसी इबारत लिख दी जिसकी आज मिसाल दी जाती है। आप भी इनसे प्रेरणा लेकर अपनी पसंद के क्षेत्र को जुनून बनाकर उसमें अपनी कामयाबी से हर किसी को चकित कर सकते हैं...  

अमिताभ बच्‍चन

अमिताभ बच्‍चन को आप सभी जानते पहचानते हैं। 76 साल की उम्र में आज भी अखबारों, पत्रिकाओं से लेकर टीवी के तमाम विज्ञापनों तक में सबसे ज्‍यादा वही दिखाई देते हैं। बॉलीवुड की फिल्‍मों में तरह तरह के चैलेंजिंग रोल में उनका जलवा जारी है। लेकिन क्‍या आपको पता है कि अदाकारी और आवाज के इस महानायक को कभी आल इंडिया रेडियो यानी आकाशवाणी ने ऑडिशन में रिजेक्‍ट कर दिया था। जिसकी आवाज को कभी अच्‍छा न कहकर खारिज कह दिया गया था, वही आवाज आज हर किसी को जादू की तरह लुभा रही है।  

सचिन तेंदुलकर

क्रिकेट के भगवान जाते रहे भारत के विख्‍यात बल्‍लेबाज सचिन तेंदुलकर को शुरू से ही केवल क्रिकेट का ही जुनून रहा। पढ़ाई में मन न लगने के कारण उन्‍होंने दसवीं के बाद पढ़ा ही नहीं। जरा सोचें, अगर सचिन पर उनके पिता ने पढ़ाई का दबाव बनाया होता तो क्‍या वे दुनियाभर में एक क्रिकेटर के रूप में पहचान बना पाए होते।  

रवींद्रनाथ टैगोर

भारत की ओर से सबसे पहला नोबल पुरस्कार जीतने वाले महान क़वि और साहित्यकार रवींद्रनाथ टैगोर स्कूली पढ़ाई के दौरान फेल हो गए थे। स्‍कूली दिनों में उनके अध्‍यापक उन्हें पढ़ाई में ध्यान न देने वाले छात्र के तौर पर जानते थे। लेकिन बाद में वही टैगोर देश के गौरव साबित हुए। टैगोर ने ही खुद लिखा था कि हर ओक का पेड़, पहले ज़मीन पर गिरा एक छोटा सा बीज होता है। उन्‍होंने आजादी की लड़ाई में भी भूमिका निभाई और गुरुदेवकी पदवी दी गई।  

बिल गेट्स

दुनिया के सबसे अमीर इंसान बनने से पहले माइक्रोसॉफ्ट के मालिक बिल गेट्स ने हार्वर्ड कॉलेज में बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी थी। इसके बाद उन्होंने अपना पहला बिज़नेस शुरू किया जो बुरी तरह असफल साबित हुआ।

अल्बर्ट आइंस्टीन

दुनिया में जीनियस के तौर पर पहचाने जाने वाले महान वैज्ञानिक आइंस्टीन चार साल तक बोल भी नहीं पाते थे। इतना ही नहीं, वे सात साल की उम्र तक पढ़ नहीं पाते थे। इस कारण उनके मां-बाप और टीचर उन्होंने एक सुस्त और निकम्‍मे छात्र के रूप में देखते थे। हद तो तब हो गई, जब उनकी सुस्‍ती की वजह से उन्हें स्कूल से निकाल दिया गया। इसके बाद उन्‍हें ज़्यूरिख पॉलिटेक्निक में दाखिला देने से इंकार कर दिया गया। इन सब के बावजूद आगे चलकर वे भौतिक विज्ञान की दुनिया में सबसे बड़े वैज्ञानिक बनकर सामने आए।

वॉल्‍ट डिज्‍नी

करियर के शुरुआती दौर में वॉल्ट डिज़्नी को अख़बार के संपादक ने यह कहकर निकाल दिया था कि उनके पास कल्पनाशीलता और नए विचार नहीं है। इसके बाद उन्होंने अपना व्यवसाय शुरू किया, लेकिन वह न केवल असफल रहा, बल्‍कि इस चक्‍कर में वे दिवालिया तक हो गए। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और प्रयास करते रहे। आज डिज्‍नी वर्ल्‍ड के रूप में उनके नाम से एक पूरा साम्राज्य चलता है, जिसके बारे में  पूरी दुनिया जानती है।

थॉमस एडीसन

थॉमस एडीसन ने लिखा है कि वह बचपन में स्कूल में जो भी सीखने की कोशिश करते थे, उसमें नाकाम साबित होते। करियर की शुरुआत में ही उन्हें पहली दो नौकरियों से निकाल दिया गया था। ऐसी तमाम नाकामियों के बाद उन्होंने वह कर दिखाया जिसके बाद पूरी दुनिया ने उनका लोहा माना। रोशनी के लिए बल्‍ब का आविष्‍कार करने से पहले वह 1000 बार नाकाम रहे। इसकी वजह से उनके सहयोगी तक उनका मजाक उड़ाने लगे थे। पर उन्‍होंने हार नहीं मानी। बाद में कामयाबी मिलने के बाद उन्होंने कहा, मैं हारा नहीं था, बल्कि मैंने ऐसे एक हज़ार रास्ते खोजे जिनसे सफलता नहीं मिल सकती थी और जो दूसरों के भी बहुत काम आती, क्‍योंकि वे इन हजार गलतियों से सबक लेकर आगे बढ़ते

विंस्टन चर्चिल

नोबल पुरस्कार जीतने वाले और दो बार ब्रिटेन के प्रधानमंत्री चुने गए विंस्टन चर्चिल की भी कहानी संघर्ष से भरी थी। स्कूली पढ़ाई के दौरान चर्चिल छठी कक्षा में ही फेल हो गए थे। इतना ही नहीं, राजनीति में आने पर प्रधानमंत्री बनने से पहले वे अपने हर चुनाव में असफल हुए थे, लेकिन उन्‍होंने खुद पर भरोसा बनाए रखा और मेहनत करने से कभी पीछे नहीं हटे।

विंसेंट वेन गॉग

आज विंसेंट की बनाई पेंटिंग्‍स करोड़ों में बिकती हैं, लेकिन आपको जानकर ताज्‍जुब होगा कि अपनी पूरी ज़िंदगी के दौरान विंसेंट अपनी बनाई सिर्फ एक ही पेंटिंग बेच पाए थे, उसे भी उनके एक करीबी दोस्त ने बहुत कम पैसों में खरीदी थी।

स्टीवन स्पिलबर्ग

दु‌निया में अरबों कमाने वाली जुरासिक पार्क जैसी फिल्म के निर्देशक स्‍टीवन स्पिलबर्ग को एक बार नहीं तीन बार कैलिफोर्निया की साउदर्न यूनिवर्सिटी ऑफ थियेटर एंड टेलीविज़न में एडमिशन देने से इंकार कर दिया गया था। उसके बाद उन्होंने कहीं और से शिक्षा ली। अपने काम के लिए बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी। 35 साल बाद वे दोबारा उस कॉलेज में पहुंचे और तब ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की।

Posted By: Vineet Sharan

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस