तेजपुर विश्वविद्यालय में मास कम्युनिकेशन विभाग की सिल्वर जुबली, फिल्म निर्माण पर विशेष सत्र
तेजपुर विश्वविद्यालय के मास कम्युनिकेशन विभाग ने अपनी सिल्वर जुबली फिल्म निर्माण सत्रों और कार्यशालाओं के साथ शुरू की। यह ...और पढ़ें

HighLights
सिल्वर जुबली की शुरुआत फिल्म निर्माण कार्यशालाओं और सत्रों से हुई।
असमिया सिनेमा की पहली फिल्म 'जॉयमोटी' की 91वीं वर्षगांठ पर आयोजन।
पार्थजीत बरुआ, रीमा दास ने छात्रों को फिल्म निर्माण के गुर सिखाए।
तेजपुर विश्वविद्यालय के मास कम्युनिकेशन एवं जर्नलिज्म विभाग ने मंगलवार को अपने सिल्वर जुबली वर्ष की शुरुआत फिल्म निर्माण पर केंद्रित विभिन्न सत्रों और कार्यशालाओं के साथ की। कार्यक्रम की शुरुआत ऐतिहासिक और प्रतीकात्मक रूप से 10 मार्च को की गई, जो असमिया सिनेमा की पहली फिल्म ‘जॉयमोटी’ के रिलीज़ होने की 91वीं वर्षगांठ का दिन है। इस फिल्म का निर्देशन प्रसिद्ध सांस्कृतिक व्यक्तित्व ज्योति प्रसाद अग्रवाल ने किया था, जिन्हें असमिया सिनेमा का जनक माना जाता है।
इस अवसर पर विभाग ने प्रख्यात फिल्मकार और फिल्म विद्वान पार्थजीत बरुआ द्वारा डॉक्यूमेंट्री फिल्म निर्माण पर कार्यशाला आयोजित की। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त फिल्मकार रीमा दास ने छात्रों के साथ संवाद किया।
कार्यक्रम की शुरुआत असम की सिनेमाई विरासत को श्रद्धांजलि देते हुए हुई। इसमें ‘जॉयमोटी’ और ‘इंद्रमालती’ जैसी शुरुआती असमिया फिल्मों के दुर्लभ दृश्य और अभिलेखीय फुटेज प्रदर्शित किए गए। साथ ही ज्योति प्रसाद अग्रवाल के जीवन के अंतिम दिनों में शिलांग से तेजपुर लौटने का एक दुर्लभ वीडियो भी दिखाया गया, जिसने उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया।
विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर अभिजीत बोरा ने स्वागत भाषण में कहा कि जिस दिन ‘जॉयमोटी’ रिलीज़ हुई थी, उसी दिन फिल्म निर्माण पर आधारित कार्यक्रम आयोजित करना विशेष महत्व रखता है। उन्होंने कहा कि यह भूमि ज्योति प्रसाद अग्रवाल की है और उनके योगदान को याद करना बेहद सार्थक है।
पार्थजीत बरुआ ने अपनी कार्यशाला में छात्रों को डॉक्यूमेंट्री फिल्म निर्माण की प्रक्रिया, शोध पद्धति, कहानी की संरचना और सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों को प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने विभाग के 25 वर्ष पूरे होने पर बधाई देते हुए कहा कि यहां का शैक्षणिक माहौल बेहद सक्रिय और प्रेरक है।
कार्यक्रम के दौरान फिल्मकार रीमा दास को हाल ही में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली उपलब्धि के लिए सम्मानित भी किया गया। उन्हें 2026 के बर्लिन अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में उनकी फिल्म ‘नॉट अ हीरो’ के लिए ‘क्रिस्टल बेयर स्पेशल मेंशन’ पुरस्कार मिला है।
छात्रों के साथ संवाद में रीमा दास ने अपने फिल्म निर्माण के अनुभव साझा किए और कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद सशक्त कहानी के दम पर फिल्में वैश्विक मंच तक पहुंच सकती हैं। उन्होंने छात्रों को अपनी कहानी पर विश्वास रखने और ईमानदारी से काम करने की सलाह दी।
विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज देओरी ने बताया कि यह कार्यक्रम विभाग के सिल्वर जुबली वर्ष की शुरुआत है और पूरे वर्ष व्याख्यान, कार्यशालाएं, फिल्म प्रदर्शन और संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। समारोह में विश्वविद्यालय के छात्र, शोधार्थी और शिक्षक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
