नई दिल्ली [अंशु सिंह]। रियल एस्टेट सेक्टर में अपनी विशेष पहचान बनाई है होम एेंड सोल कंपनी ने। हाल के वर्षों में इसने कई अल्ट्रा लग्जरी प्रोजेक्ट्स डिलीवर किए हैं और ग्राहकों का भरोसा जीतने में कामयाब रही है।

कंपनी की संस्थापक एवं सीईओ साक्षी कतियाल मानती हैं कि जैसे-जैसे घर खरीदने वाली महिलाओं की संख्या बढ़ रही है या वे खरीदारी की प्रक्रिया में हिस्सेदार बन रही हैं, वैसे-वैसे रियल एस्टेट सेक्टर में महिला उद्यमियों की स्थिति भी बेहतर होती जा रही है। साक्षी की मानें, तो उन्होंने एक एंटरप्रेन्योर के नाते खुद को स्थापित करने के लिए कड़ी मेहनत की है। अपनी कुशलता को साबित किया है, तब जाकर वे किसी सफलता की हकदार बन सकी हैं। वे कहती हैं कि सफलता के लिए धैर्य रखना होता है।

मैंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से बीकॉम करने के बाद देहरादून स्थित ओएनजीसी पॉलिटेक्निक से फैशन डिजाइनिंग किया। करियर की शुरुआत में कुछ मर्चेंडाइजिंग एवं फैशन ब्रांड्स के साथ काम किया। वहां मुझे जारा, जेसी पेन्नी, डीपैम, पंपकिन पैच जैसे ब्रांड्स के लिए काम करने का मौका मिला। हमारे देश में रियल एस्टेट सेक्टर पर अब तक पुरुषों का वर्चस्व रहा है। मैंने इसमें अपने लिए एक जगह बनाने की कोशिश की है।

2009 में इन्वेस्टर्स क्लीनिक ज्वाइन करने के बाद वहां विभिन्न प्रोजेक्ट्स को को-ऑर्डिनेट करने के अलावा कंपनी का पब्लिक रिलेशन देखा। एचआर डिपार्टमेंट स्थापित किया। इन सब अनुभवों के बाद 2013 के नवंबर महीने में मैंने होम एेंड सोल नाम से एक रियल एस्टेट डेवलपर कंपनी लॉन्च की। आज कंपनी के ऑपरेशंस, मार्केटिंग, सेल्स, ब्रांडिंग आदि की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालती हूं। साथ ही, प्रोजेक्ट के सिलसिले में हफ्ते में तीन से चार दिन शहर से 30-35 किलोमीटर दूर स्थित कंस्ट्रक्शन साइट्स पर भी जाती हूं।

पसंद है चुनौतियां लेना

एक दशक से अधिक के करियर में मुझे कई अवसर मिले, जहां मैंने खुद को साबित कर दिखाया। चाहे वह रियल एस्टेट सेक्टर ही क्यों न हो। हां, जब मैंने इस फील्ड में आने का निर्णय लिया, तो बहुत लोगों ने खिंचाई करने की कोशिश की। मुझे नैतिक समर्थन बिल्कुल नहीं दिया। लेकिन मैं उनकी बातों से हतोत्साहित नहीं हुई। इसके विपरीत नए मौकों को स्वीकार कर, फोकस रहकर काम किया और अंतत: अपनी काबिलियत साबित की। यही कारण है कि आज मुझे खुद पर गर्व है। मुझे नई चुनौतियां लेना अच्छा लगता है। अपने हर अनुभव से कुछ न कुछ सीखा ही है। उससे हिम्मत मिली है।

ग्राहकों का भरोसा है जरूरी

मैं यही मानती हूं कि रियल एस्टेट बाजार में मंदी, सुस्ती आदि प्रतिकूलताएं दीर्घकालिक नहीं हो सकतीं, क्योंकि भारत जैसे विशाल देश में घर या प्रॉपर्टी की मांग कभी खत्म नहीं हो सकती। आने वाला समय तो मिलेनियल्स का होगा, जो काफी महत्वकांक्षी होते हैं। उन्हें अफोर्डेबल घर के साथ क्वालिटी चाहिए। कुछ रिपोट्र्स के अनुसार, करीब 25 प्रतिशत मिलेनियल्स पैरेंटल घरों की जगह सिंगल फैमिली घरों में शिफ्ट करना चाहते हैं। इसके लिए उन्हें अपना घर चाहिए होगा। ऐसे में अगर समय पर प्रोजेक्ट्स पूरे होंगे, तो अधिक से अधिक खरीदार मिलेंगे। हमारी पूरी कोशिश रहती है कि समय पर प्रोजेक्ट्स पूरे करें।

परिवार का मिला साथ

मैं जो भी कर पाती हूं, उसकी एक बड़ी वजह परिवार का भरपूर सहयोग है। मेरे दो बच्चे हैं। बिजनेस के साथ उनका ख्याल रखना, जिम्मेदारी निभाना मुश्किल है। शुरू में यह एक बड़ी चुनौती रही, क्योंकि अपने ख्वाबों व इच्छाओं से समझौता किए बिना उनकी देखभाल भी करनी थी। लेकिन मैं खुद को खुशनसीब मानती हूं कि सबकुछ मैनेज कर सकी। हालांकि मैंने कई महिलाओं को देखा है कि वे मां की जिम्मेदारी निभाने के लिए अपना करियर त्याग देती हैं।

यह काफी हद तक परिवार द्वारा मिलने वाले सपोर्ट से संभव होता है। लेकिन जो महिलाएं उद्यमिता में आना चाहती हैं, उनसे यही कहूंगी कि अपने व्यक्तित्व को मजबूत बनाएं, नेटवर्किंग स्किल्स पर काम करें, विजन को बड़ा करें, संवाद कला को निखारें। इसके अलावा, खूब सारा धैर्य रखें और साथ ही यह निश्चय रखें कि सफलता एक दिन जरूर मिलेगी।

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