OpenAI: 90 साल पुराने गणित के सवाल को 88 घंटों में किया हल, यह सवाल दुनिया के 7 सबसे मुश्किल सवालों में से एक था
ओपनएआई के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल ने 90 साल पुरानी नेवियर-स्टोक्स प्रॉब्लम को केवल 88 घंटों में हल करने का दावा ...और पढ़ें

OpenAI का दावा, 88 घंटों में सुलझाया दुनिया का सबसे मुश्किल सवाल।
HighLights
ओपनएआई के एआई ने 90 साल पुराना गणित सवाल हल किया।
नेवियर-स्टोक्स प्रॉब्लम को 88 घंटों में सुलझाया गया।
यह मिलेनियम प्रॉब्लम्स में से एक मुश्किल सवाल था।
एजुकेशन डेस्क, नई दिल्ली। ओपनएआई ने मंगलवार को दावा किया कि उसके आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल ने गणित के सबसे मुश्किल सवाल को हल कर दिया है। गणित के इस मुश्किल सवाल को सुझलाने में सिर्फ 88 घंटों का समय लगा है। बता दें, यह गणित के सबसे मुश्किल सवालों में से एक है। इस सवाल को नेवियर-स्टोक्स प्रॉब्लम (Navier-Stokes problem) कहा जाता है। यह सवाल 90 साल पुराना है, जिसे सुलझाने में अब तक कई गणितज्ञ नाकाम रहे थे।
क्या है नेवियर-स्टोक्स प्रॉब्लम
गणित के इन सबसे मुश्किल सवाल को नेवियर-स्टोक्स प्रॉब्लम कहा जाता है। यह सवाल 90 साल पुराना है। इस सवाल को अभी तक कोई भी गणितज्ञ हल नहीं कर सका था। दरअसल बात 2000 की है। जब एक मैथ्स इंस्टीट्यूट क्ले मैथमेटिक्स ने साल 2000 में दुनिया के सबसे कठिन सात सवालों को चुना था। इन सात सवालों में ये सवाल भी शामिल था। इन्हीं 7 सवालों को मिलेनियम प्रॉब्लम्स कहा जाता है। ये सवाल हवा और पानी जैसे तरल पदार्थों की गति समीकणों से जुड़ा हुआ है।
सिर्फ 80 घंटों में हल किया सवाल
जिस सवाल को कई गणितज्ञ सुलझाने में सालों से नाकाम थे। ओपनएआई ने दावा किया है कि उस सवाल को उसके एआई ने केवल 80 घंटों में सुलझा लिया है। हालांकि इस सवाल को सुझलाने के लिए ओपनआई ने लाखों डॉलर की कंप्यूटिंग पावर का इस्तेमाल किया। बता दें, अपनी इस कामयाबी का जिक्र करते हुए ओपनएआई ने एक ब्लॉग पोस्ट में कहा है कि उन्होंने अगस्त माह के अंत में एक नए मॉडल की ट्रेनिंग शुरू कर दी थी। कुछ दिनों बाद ऑनलाइन अफवाहों के जरिये उन्हें पता चला कि एक प्रतिस्पर्धी ने मिलेनियम प्रॉब्लम्स यानी गणित के उन 6 कठिन सवालों को हल कर लिया है। इसके बाद ओपनएआई ने अपने सिस्टम के जरिये गणित के उन 6 सवालों को हल करने में लगा दिया। ओपनएआई ने कहा इस समस्या पर काम करने से हमें उम्मीद से बेहतर परिणाम मिले।
कितना आया खर्चा
ओपनएआई के रिसर्चर सेबेस्टियन बुबेक ने बताया कि इन समस्याओं को हल करने के लिए कंप्यूटिंग का खर्च लाखों डॉलर था। बुबेक के मुताबिक यह यह कंपनी के इससे पहले गणितीय नतीजों पर किए गए खर्चों में से लगभग 1,000 गुना अधिक था। ओपनएआई ने दावा किया है कि प्रोजेक्ट शुरू होने के लगभग 88 घंटों बाद इस सवाल का हल ढूंढ लिया गया था।
