अरुण श्रीवास्तव। जनसंख्या की दृष्टि से दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश होने के कारण हमारे यहां बेरोजगारी हमेशा से एक बड़ी समस्या रही है। हालांकि इस दिशा में केंद्र और राज्य सरकारें लगातार प्रयास करती रही हैं, पर नौकरी/रोजगार की दिशा में युवाओं को अधिक राहत नहीं मिल पाई है। औद्योगिकीकरण और तकनीक का प्रसार होने से निजी क्षेत्र में नौकरियों की संख्या तेजी से बढ़ी तो हैं, पर यहां अकुशल लोगों के लिए ज्यादा गुंजाइश नहीं होती, जबकि हमारे देश में बड़ी संख्या में बेरोजगार युवा अकुशल ही होते हैं।

जहां तक उच्च शिक्षा की बात है, तो तकनीकी पढ़ाई करने वाले युवा तो देर-सवेर फिर भी नौकरी/रोजगार पा जाते हैं, लेकिन उन युवाओं को लंबे समय तक धक्के खाने पड़ते हैं, जो मानविकी विषयों के साथ पढ़ाई करने के कारण तकनीकी कामों के लिए उपयुक्त नहीं होते। हां, मानविकी विषयों में अच्छा प्रदर्शन करने वाले उत्साही और ऊर्जावान युवा विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता पाकर अपनी राह तलाश लेते हैं। बेरोजगारी की सतत समस्या को ध्यान में रखते हुए ही नई शिक्षा नीति के तहत अब पढ़ाई को वोकेशनल ट्रेनिंग और इंडस्ट्री की आवश्यकताओं से जोड़ने का उपक्रम किया जा रहा है।

कैसे कम हो इंडस्ट्री की चिंता: हालांकि सरकार के साथ एआइसीटीई के प्रोत्साहन से उच्च तकनीकी शिक्षा प्रदान करने वाले शैक्षणिक संस्थानों ने इंडस्ट्री की जरूरतों को समझने के लिए उनसे हाथ तो मिलाएं हैं, पर अभी भी इंडस्ट्री की सबसे बड़ी चिंता यही है कि उसे शैक्षणिक परिसरों से पूरी तरह ऐसे कुशल युवा नहीं मिल पा रहे, जो पहले दिन से ही आउटपुट यानी परिणाम देने में सक्षम हों। यही कारण है कि अच्छी गुणवत्ता वाले कुछ संस्थानों को छोड़ दें, तो ज्यादातर संस्थानों में प्लेसमेंट के लिए कंपनियां नहीं पहुंचतीं।

हालांकि नई शिक्षा नीति के तहत शैक्षणिक संस्थानों पर इस बात के लिए दबाव बढ़ा है कि वे अपने यहां शोध, नवाचार को बढ़ावा देने के साथ इंडस्ट्री की आवश्यकताओं को समझते हुए छात्रों को शिक्षित-प्रशिक्षित करें। इसके लिए यथासंभव इंडस्ट्री के विशेषज्ञों को फैकल्टी में शामिल किया जाए और आखिरी वर्ष के बजाय पहले से ही छात्रों को इंडस्ट्री विजिट के साथ वहां इंटर्न के रूप में काम करने के अवसर उपलब्ध कराए जाएं। इससे यह भी फायदा होगा कि जो छात्र इंटर्नशिप के दौरान बेहतर प्रदर्शन करेंगे, इंडस्ट्री उसी समय नौकरी का अवसर देने के लिए उनकी पहचान कर सकेगी।

सचेत रहकर सीखते रहें: छात्रों को भी इंडस्ट्री/जाब मार्केट की लगातार और तेजी से बदल रही जरूरतों को जानते-समझते हुए स्वयं को तराशने का निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए। इसके लिए सिर्फ कोर्स के भरोसे ही न बैठे रहें। सचेत रहते हुए अपनी पसंद के क्षेत्र से संबंधित व्यावसायिक अपेक्षाओं (तकनीकी और अन्य जानकारी) को भी समझने और सीखते रहने की पहल करते रहें। इसके लिए आपके शिक्षण संस्थान से जो भी मदद मिल सकती है, उसका पूरा लाभ उठाएं।

इसके अलावा, अब तो आप सभी के हाथ में स्मार्टफोन जैसा जादुई उपकरण है, जिसका भरपूर फायदा आप अपनी रुचि के करियर से जुड़े क्षेत्र में तमाम जरूरी चीजों को जानने-सीखने में कर सकते हैं। कोई भी क्षेत्र हो, हर किसी से संबंधित जानकारियां इंटरनेट/यूट्यूब पर बहुतायत में उपलब्ध हैं। यह आप पर है कि आप बुद्धिमत्तापूर्ण ढंग से किस तरह इसका उपयोग खुद को आगे बढ़ाने के लिए करते हैं।

Edited By: Sanjay Pokhriyal