नई दिल्ली, जेएनएन। दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) ने सभी पाठ्यक्रमों के लिए आवेदन की तिथि 22 जून तक बढ़ा दी है। दाखिला समिति के अध्यक्ष व स्टूडेंट वेलफेयर के डीन प्रो. राजीव गुप्ता ने बताया कि स्नातक, परास्नातक, एमफिल व पीएचडी पाठ्यक्रमों के लिए छात्रों को समान अवसर मिल सकें, इसलिए सभी पाठ्यक्रमों में आवेदन की तिथि बढ़ाई गई है। डीयू के कटऑफ से संबंधित नई तारीखें भी इसी हफ्ते जारी कर दी जाएंगी। पहले परास्नातक और एमफिल- पीएचडी पाठ्यक्रमों में आवेदन की अंतिम तिथि 17 जून थी।

पहली कटऑफ सूची 20 जून को आनी थी। बीए इकोनॉमिक्स ऑनर्स व बीकॉम ऑनर्स जैसे पाठ्यक्रमों के पात्रता मानदंड को इस वर्ष बदले जाने के खिलाफ छात्र दिल्ली हाई कोर्ट चले गए थे। हाई कोर्ट ने स्नातक पाठ्यक्रमों में रजिस्ट्रेशन तिथि 22 जून तक बढ़ाने का आदेश दिया था। सोमवार को डीयू ने सभी पाठ्यक्रमों की तारीखों को 22 जून तक बढ़ाने का फैसला लिया। माना जा रहा है कि जून के चौथे हफ्ते में पहला कटऑफ जारी हो सकता है। आमतौर पर स्नातक पाठ्यक्रमों में आवेदन की तिथि समाप्त होने के एक सप्ताह बाद तक पहला कटऑफ जारी किया जाता है।

डीयू में एडमिशन ब्रांच गठित करने की मांग: डीयू में सोमवार दोपहर बाद चार बजे स्टैंडिंग कमेटी की बैठक हुई, जिसमें फैसला लिया गया कि सभी पाठ्यक्रमों की न्यूनतम पात्रता पिछले शैक्षणिक वर्ष 2018-19 के तहत ही रहेगी। हाई कोर्ट के आदेश की पृष्ठभूमि में स्टैंडिंग कमेटी के सदस्यों ने डीयू प्रशासन से एडमिशन ब्रांच गठित करने का अनुरोध किया। यह ब्रांच सालभर दाखिले से जुड़ी नीति, सुधार की दिशा में काम करते हुए सभी हितधारकों से संवाद करके प्रवेश नीति बनाए। जिससे कि समय पर प्रवेश-नीति की घोषणा कर उसे लागू किया जा सके।

अकादमिक परिषद के सदस्य डॉ. रसार्ल सिंह ने कहा कि डीयू प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय है। यहां बड़ी संख्या में छात्र स्नातक, परास्नातक और शोध पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेते हैं। सभी कॉलेजों की स्टाफ काउंसिल, सभी विभागों की कमेटी ऑफ कोर्सेज, विभागीय शोध समिति, संकायों के शोध मंडल, संकायों की प्रवेश समिति, स्टैंडिंग कमेटी और अकादमिक परिषद जैसी डीयू की तमाम विधायी संस्थाओं की संस्तुतियों और निर्णयों से ही डीयू की प्रवेश नीति अंतिम रूप लेती है। इन सबकी भागीदारी और भूमिका निर्णायक होती है। इसलिए डीयू में एग्जाम ब्रांच की तरह अलग से एडमिशन ब्रांच होनी चाहिए, जो सालभर इस दिशा में काम करते हुए विधायी संस्थाओं के सभी हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श करके प्रवेश नीति बनाए और उसे लागू करें।

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Posted By: Neel Rajput

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