नई दिल्ली, ऑनलाइन डेस्क। देशभर में 11 नवंबर को शिक्षा दिवस मनाया जा रहा है। हर साल राष्ट्रीय शिक्षा दिवस देश के पहले शिक्षा मंत्री, स्वतंत्रता सैनानी, स्कोलर और प्रख्यात शिक्षाविद मौलाना अबुल कलाम आजाद की याद में मनाया जाता है। शिक्षा दिवस के मौके पर भारत शिक्षा के क्षेत्र में कलाम द्वारा किए गए कार्यों को याद करता है। मौलाना आजाद का मानना था कि स्कूल प्रोयगशालाएं हैं जहां भावी नागरिकों का उत्पादन किया जाता है।

इतिहासकारों के अनुसार, मौलाना आजाद ने हायर एजुकेशन, तकनीकी और वैज्ञानिक अनुसंधान एवं शिक्षा के लिए आधार तैयार किया जो औद्योगिकीकरण और वर्तमान के ज्ञान आधारित उद्योगों के उद्भव में सहायक था।

कलाम शिक्षा के प्राथमिक उद्देश्य के बारे में स्पष्ट थे, उन्होंने सेंट्रल एडवाइजरी बोर्ड ऑफ एजुकेशन की पहली बैठक के दौरान अपने संबोधन में कहा था कि किसी भी सिस्टम का पहला उद्देश्य संतुलित दिमाग बनाना होना चाहिए जिसे गुमराह ना किया जा सके।

आपको बता दें कि अबुल कलाम ने 1947 से 1958 तक आजाद भारत के शिक्षा मंत्री के रूप में कार्य किया। वो मानते थे कि बच्चों को मातृभाषा में शिक्षा दी जानी चाहिए। कलाम ने ना सिर्फ महिलाओं की शिक्षा पर जोर दिया बल्कि 14 साल की आयु तक सभी बच्चों को निशुल्क शिक्षा देने की भी वकालत की। इसके अलावा उन्होंने प्राथमिक शिक्षा के साथ व्यावसायिक प्रशिक्षण और तकनीकी शिक्षा की तरफ भी सबका ध्यान आकर्षित करवाया।

Posted By: Neel Rajput

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