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नई दिल्ली,जेएनएन। 15 अगस्त 1947 को जब ब्रिटेन का औपनिवेशिक शासन खत्म हुआ, तब दो अलग-अलग देश आजाद हुए। एक भारत और दूसरा पाकिस्तान। दोनों देशों ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ एक साथ संघर्ष किया। हालांकि, हालात ऐसे बने कि बंटवारा करना पड़ा। बंटवारे की तल्खी आज भी दोनों देशों की बीच देखी जा सकती है। ऐसे में सवाल उठता है कि दोनों देशों में आजादी को लेकर क्या पढ़ाया जाता है? यह जानना आपके लिए दिलचस्प होगा कि आजादी को लेकर पाकिस्तान में भारत से बिल्कुल अलग इतिहास पढ़ाया जाता है। 

इस मामले को लेकर द क्विंट में एक रिपोर्ट छपी है। जिसमें इस बात का जिक्र किया गया है कि पाकिस्तानी और भारतीय इतिहास की किताबों में कितना अंतर है। बंटवारों के लेकर और आजादी के संघर्ष को लेकर पाकिस्तानी टेक्स्ट बुक में क्या छपा है।

बंटवारा
बंटवारे का जिक्र दोनों देशों की किताबों में किया गया है, लेकिन तथ्य अलग हैं। जहां भारत की एनसीईआरीटी की किताब में लिखा गया है कि मुस्लिम नेता यहां तक मोहम्मद अली जिन्ना भी शुरुआत में बंटवारे कि खिलाफ थे। शुरुआत में किसी के भी पास ऐसा कोई आइडिया नहीं था। बाद में अंग्रेजों का विरोध करने और मुस्लिम आबादी की सहानुभूति हासिल करने के लिए इस विचार का जन्म हुआ। वहीं, पाकिस्तान केे पंजाब बोर्ड की उर्दू माध्यम की कक्षा चौथी की किताब में लिखा गया है कि आजादी की बाद मुस्लिम एक अपनी सरकार बनना चाहते थे। ताकि वह कुरान द्वारा निर्धारित इस्लामिक कानून के तहत जी सकें। लेकिन वे जानते थे कि भारत में हिंदू बहुसंख्यक हैं। ऐसे में वे अपना कानून लागू करेंगे। इस कानून में मुसलमानों के साथ अछूत जैसा व्यवहार किया जा सकता है।

सविनय अवज्ञा आंदोलन
भारतीय इतिहास की पाठ्यपुस्तकों में सविनय अवज्ञा आंदोलन को ब्रिटिश सरकार के कानूनों, मांगों और आदेशों का बहिष्कार करने के लिए लोगों के एक साथ आने के रूप में माना जाता है। वहीं पाकिस्तान की किताबों में इसका कोई जिक्र नहीं मिलता है।

1947 के दंगे
आजादी के ठीक बाद बंटवारे की आग दोनों देशों मेें फैल गई। विस्थापित लोग लूट के शिकार हुए। इसके बारे में भारत के एनसीआरटी की कक्षा 8वीं किताब में पढ़ाया जाता है कि बंटवारे के बाद एक किस्म का सिविल वॉर छिड़ गया। सीमा के दोनों पार काफी हिंसा हुई। वहीं, पाकिस्तान की लाहौर बोर्ड की नागरिक शास्त्र की किताब में जिक्र है कि पाकिस्तानी मुस्लिम ने गैर-मुस्लिम को मुल्क छोड़ने के लिए सभी प्रकार की मदद मुहैया कराई। वहीं, जो मुस्लिम भारत से पाकिस्तान आ रहे थे, उन पर हमला किया गया और उन्हें लूटा गया। उन्हें हिंसा का सामना करना पड़ा।

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Posted By: Rajat Singh

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