नई दिल्ली [अंशु सिंह]। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद हितेश राठी ने कुछ वर्ष नौकरी में अनुभव बटोरा और फिर उतर आए उद्यमिता के क्षेत्र में। लेकिन मकसद सिर्फ कारोबार करना नहीं, बल्कि राजस्थान एवं गुजरात के ऊंट पालक किसानों को नई राह दिखाना भी था। इसके बाद अगस्त 2015 में आदविक फूड्स की स्थापना हुई, जो आज देश में ऊंट के दूध और दुग्ध उत्पाद का पहला ब्रांड होने का दावा करता है। कंपनी के संस्थापक एवं निदेशक हितेश राठी की मानें, तो अब तक वे दो लाख से अधिक क्लाइंट्स को सर्व कर चुके हैं।

कंपनी इस समय दिल्ली, एनसीआर, बेंगलुरु, हैदराबाद, मुंबई एवं चेन्नई में फ्रोजन कैमल मिल्क उपलब्ध करा रही है। हाल ही में इन्होंने बकरी के दूध से बने उत्पाद को भी मार्केट में लॉन्च किया है। हितेश कहते हैं कि जब आपका काम समाज के हाशिये पर रहने वाले लोगों के उत्थान में सहायक बनता है, साथ ही दुनिया में आपके ब्रांड का सम्मान और उस पर विश्वास बढ़ता है, तो वह असली सफलता होती है।

मैं राजस्थान के बीकानेर जिले के नोखा शहर से हूं। 2012 में पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज से सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री लेने के बाद पुंज लॉयड, ब्रिज इंजीनियरिंग जैसी कई कंपनियों में अलग-अलग प्रोफाइल्स पर काम किया। चूंकि मेरा फैमिली बैकग्राउंड बिजनेस का था, इसलिए हमेशा से मन में एक चाहत थी कि स्क्रैच से अपना कुछ बनाना है। कॉलेज के दिनों में भी कुछ छोटे-मोटे कारोबार कर लेता था, जैसे बर्गर बेचना या रात में कैंटीन चलाना आदि। लेकिन म्यांमार में कुछ महीने काम करने के दौरान महसूस हुआ कि अब अपना बिजनेस करने का सही समय आ गया है। फिर मैंने नौकरी छोड़ दी। भारत वापस आया और ऊंट के दूध के आइडिया पर काम करना शुरू कर दिया। आखिर में 2015 में हमने आदविक फूड्स नाम से कंपनी लॉन्च कर दी।

सीमित फंड में किया काम

हमारी कंपनी शुरुआत में बूटस्ट्रैप्ड थी। इस वजह से मार्केटिंग, प्रोक्योरमेंट, ऑपरेशन या एचआर जैसे विभागों को प्रभावशाली तरीके से संचालित कर बिजनेस करने की प्रबल चाहत रहती थी। हालांकि कई स्तरों पर मुश्किलें और अवरोध आए। बाहर से कोई फंड नहीं लिया था। ऐसे में निर्णायक पोजिशंस में लोगों को रखने में दिक्कत आई, जिससे नए अवसरों पर तेजी से फैसले नहीं ले सके। लेकिन इन सबने हमें इनोवेटिव होने के लिए प्रेरित किया। हमने सीमित संसाधनों में स्मार्ट तरीके से काम किया।

किसानों को मनाने की चुनौती

भारत के रेगिस्तानी इलाकों में बीते दो दशक से ऊंटों की आबादी प्रभावित (कम) हो रही थी। इनसे स्थानीय किसानों को कोई आर्थिक फायदा नहीं हो रहा था। कोई आमदनी नहीं हो रही थी। इसलिए वे पशुओं की सही से देखभाल भी नहीं कर पा रहे थे। कोई भी किसान पैसे के लिए ऊंट का दूध नहीं बेचता था।

इसके अलावा, उन्हें ऊंट के दूध के मार्केट और उसके लाभ की भी पूरी जानकारी नहीं थी। जब मैं पहली बार किसानों से मिला, तो मैंने उन्हें सब कुछ बताया। यह भी बताया कि मैं उनसे अच्छी कीमत पर दूध खरीदूंगा। धीरे-धीरे वे तैयार हो गए।

इनोवेशन से मिली मदद

दूध तो मिल गया था, लेकिन उसका डिस्ट्रीब्यूशन भी एक प्रमुख चुनौती रही। क्योंकि ऊंट के दूध की सेल्फ लाइफ बहुत कम होती है। तब हमने फ्रोजन (जमा हुआ) दूध डिलीवर करना शुरू किया यानी दूध को प्रॉसेस करने के बाद उसे ग्राहकों को पहुंचाने तक फ्रोजन कंडीशन में रखा जाता। हमने कोल्ड चेन लॉजिस्टिक्स के ऊपर भी काम किया। देश के अन्य हिस्सों में इस दूध को उपलब्ध कराने के लिए हमने पहली बार फ्रीज ड्राइड कैमल मिल्क पाउडर भी लॉन्च किया है। इसे स्टोर करना और देश-विदेश में कहीं भी डिलीवर करना बेहद आसान है। इसके लिए हमने गुजरात एवं राजस्थान में छोटे सेटअप बनाए हैं।

Posted By: Neel Rajput

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