Independence Day 2026: कॉमेडी से भरपूर स्वतंत्रता दिवस की स्पीच, ठहाकों से गूंज उठेगा पूरा स्कूल
15 अगस्त पर अगर आप कुछ नया करना चाहते हैं तो यहां से कॉमेडी से लैस भाषण प्राप्त कर सकते ...और पढ़ें

Independence Day 2026: 15 अगस्त पर स्पीच
HighLights
15 अगस्त पर कॉमेडी वाली स्पीच।
इस बार 80वां स्वतंत्रता दिवस किया जा रहा सेलिब्रेट।
एजुकेशन डेस्क, नई दिल्ली। 15 अगस्त पर स्कूलों-कॉलेजों के साथ ही सार्वजनिक मचों से कविताओं, भाषण, गीत-संगीत, नाटकों का मंचन किया जाता है। लेकिन, इससे हटकर अगर आप 15 अगस्त के कार्यक्रम में कुछ ऐसा करना चाहते हैं जिससे पूरा सभागार ठहाकों की गूंज से पट जाये तो यह पेज आपके लिए बेहद उपयोग है।
हम यहां पर स्टूडेंट्स के लिए एक ऐसा भाषण दे रहे हैं जिसको आप स्कूल कॉलेज में देकर 15 अगस्त के माहौल को दिलचस्प बना सकते हैं। इस भाषण से आपका सम्मान तालियों और हंसी के ठहाकों से किया जायेगा।
कॉमेडी से लैस स्पीच
हेलो गाइज,
आदरणीय मुख्य अतिथि महोदय, पूजनीय गुरुजनों और यहां बैठे हमारे देश के भावी कर्णधारों के साथ ही हमेशा की तरह पीछे की बेंच पर बैठे मेरे परम मित्र बैकबेंचर्स को 15 अगस्त की बहुत-बहुत शुभकामनाएं।
जैसा कि हम सभी जानते हैं कि आज के दिन ही 15 अगस्त यानी 1947 को हमारे देश ने अंग्रेजों को 'टाटा-बाय-बाय' कहा था। अंग्रेजों ने सोचा था कि उनके जाने के बाद हम परेशान हो जायेंगे, लेकिन उन्हें क्या पता था कि हम भारतीय तो आजादी का उत्सव मनाने में इतने व्यस्त हो जाएंगे कि अंग्रेजों को याद करने की फुर्सत ही नहीं मिलेगी।
देश को तो आजादी 80 साल पहले मिल गई। सब अपने मन के मालिक हो गए। लेकिन, फिर भी हर सुबह उठकर आजादी की परिभाषा सबके लिए अलग-अलग हो जाती है, जो न कभी मिली है और न मिलेगी। अभी भी स्टूडेंट्स सुबह उठते ही पहली ही मैथ की क्लास से आजादी चाहते हैं। टीचर्स स्कूल में आकर साइलेंस... कीप साइलेंस!" न चिल्लाने की आजादी चाहते हैं और मम्मी-पापा सुबह-सुबह बच्चों को स्कूल भगाने की टेंशन से आजादी चाहते हैं।
हमारे प्यारे बापू, भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस, चंद्रशेखर आजाद और न जाने कितने अन्य नेताओं, महापुरुषों ने लड़-झगड़कर गोरे अंग्रेजों को तो भगा दिया, लेकिन दोस्तों, सच-सच बताना, क्या हम आज पूरी तरह आजाद हैं?
आज हमारे जीवन में नए अंग्रेजों का कब्जा हो चुका है। जैसे हमारे ऐसे रिश्तेदार जो हमेशा ये पूछते हैं कि- बेटा आगे का क्या सोचा है, ये बहुत फोन चलाता है, पूरा दिन TV-मोबाइल में लगा रहता है, पढ़ता नहीं है, कुछ भी काम नहीं करता है और Bla-Bla-Bla.
तो ऐसे में हमें आजादी कहां मिली, असली और सच्ची आजादी तो उसी दिन मानी जाएगी जब सुबह-सुबह अलार्म बजना बंद हो जाए और मम्मी यह न कहें कि"उठ जा, दोपहर के 12 बज गए हैं। लेकिन, असल में घड़ी में 8 ही बजे होते हैं।
खैर, ये तो हो गई मजाक की बात अब आते हैं सीरियस बात पर-
आज का दिन उन वीर जवानों को नमन करने का है जो माइनस डिग्री तापमान में भी सरहद पर पहरा देते हैं, ताकि हम अपने घरों में आराम से रजाई तानकर सो सकें। आजादी हमें प्लेट में सजी-सजाई नहीं मिली है, इसके पीछे लाखों बलिदान हैं।
और जिस आजादी की बाद हम ऊपर कर रहे थे वो भी नहीं चाहिए क्योंकि, माता-पिता हों या टीचर्स सभी हमारा भला ही चाहते हैं और हम जीवन में कुछ अच्छा कर पाएं इसके लिए हमें तैयार करते हैं।
इसलिए हमारा भी फर्ज बनता है कि- देश का नाम रोशन करें। इधर-उधर कचरा न फैलाएं और कम से कम आज के दिन सोशल मीडिया पर 'देशभक्ति वाला स्टेटस' लगाने के साथ-साथ दिल में भी थोड़ी देशभक्ति रखें।
अब बात करते हैं अपने बैकबेंचर्स दोस्तों की। हमें पता है वे यहां भाषण की गहराई समझने नहीं, बल्कि कार्यक्रम खत्म होने के बाद मिलने वाले समोसे और लड्डू के इंतजार में लगे हुए हैं। ऐसे में अब मैं अपना भाषण यहीं समाप्त करता हूं, क्योंकि मुझे पता है कि उनकी सहनशक्ति का बांध टूट रहा है और आपकी नजरें लड्डुओं पर टिकी हुई हैं। अगर मैंने 2 मिनट और बोला, तो आजादी के इस पावन पर्व पर भी ये मेरी आजादी एक बार फिर से खतरे में पड़ जाएगी।
तो आइए, पूरे जोश के साथ मेरे साथ बोलिये और दो लड्डू एक्सट्रा लेकर जाइये।
भारत माता की... जय!
वंदे... मातरम!
जय हिंद! जय भारत!
