नई दिल्ली [अंशु सिंह]। वह अभी बीटेक फाइनल ईयर में हैं, लेकिन एक सीरियल एंटरप्रेन्योर के तौर पर अपनी पहचान बनाने में कामयाब हुए हैं। 2018 में इन्होंने ‘एक्सप्लॉयटएक्स’ नाम से एक एडु टेक प्लेटफॉर्म शुरू किया, जो स्टूडेंट्स एवं प्रोफेशनल्स को साइबर सिक्युरिटी, एआइ एवं ब्लॉकचेन में ट्रेन करता है। कंपनी के संस्थापक, 21 वर्षीय चैतन्य लक्ष्मण कहते हैं कि इसे शुरू करने का उद्देश्य यही है कि पैसे कमाने के लिए किसी डिग्री की जरूरत नहीं। अगर स्किल है, तो कहीं भी काम कर सकते हैं। जो लोग स्टार्टअप करना चाहते हैं, उनसे यही कहना चाहूंगा कि सिर्फ आइडिया होना काफी नहीं है और न ही किसी की देखादेखी कोई शुरुआत करनी चाहिए। आज मार्केट में बहुत प्रतिस्पर्धा है, रिस्क फैक्टर काफी है। इसलिए जिस पर भरोसा हो, उसी आइडिया पर काम करें। मार्केट में उतरने से पहले पूरा होमवर्क कर लें और हमेशा एक बैकअप प्लान रखें।

मेरे पिता जी बैंक में सर्विस करते हैं। मां एजुकेशन ऑफिसर हैं। हम वैसे तो जयपुर से हैं। लेकिन मैं अभी पंजाब की लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस में बीटेक कर रहा हूं। मैंने देखा है कि जो युवा तकनीकी रूप से साउंड व कुशल होते हैं,जिनके पास अच्छे सर्टिफिकेशंस होते हैं, उनके रिक्रूटमेंट में ज्यादा दिक्कत नहीं आती। नौकरी मिलने पर कंपनी में आप एक बड़ी चेन का हिस्सा तो बनते हैं, रोजाना कड़ी मेहनत से काम भी करते हैं। लेकिन इससे लंबे समय के लिए उन्हें अधिक आर्थिक लाभ नहीं मिल पाता। वहीं, एंटरप्रेन्योरशिप हमें आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाता है। हम कई सारी समस्याओं का समाधान निकाल पाते हैं। इसी सोच के साथ मैंने पढ़ाई के साथ ही एंटरप्रेन्योरशिप में हाथ आजमाने का फैसला लिया। वैसे, मैंने रोचेस्टर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से साइबर सिक्युरिटी, मेरीलैंड ग्लोबल कैंपस से क्लाउड कंप्यूटिंग एवं कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी, बर्कले से ब्लॉकचेन में माइक्रोमास्टर्स प्रोग्राम भी पूरे किए हैं।

प्लेटफॉर्म से स्किल डेवलपमेंट

रिक्रूटमेंट सीजन में कॉलेज में कई कंपनियां आती हैं और अपने रिव्यूज देती हैं कि उन्हें किस तरह के स्किल्ड फोर्स की जरूरत है? जैसे आइबीएम ने एक रिपोर्ट में कहा था कि देश में 30 लाख के करीब साइबर सिक्युरिटी एक्सपट्र्स की जरूरत है, जबकि एक लाख भी नियुक्त नहीं हो पाते।

इसी तरह चीन की एक प्रतिष्ठित टेक कंपनी टेनसेंट की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में तीन मिलियन के करीब एआइ एक्सपट्र्स हैं, जबकि जरूरत इससे कहीं अधिक की है। अपने देश की भी बात करूं, तो हर साल लाखों इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स कॉलेजों से निकलते हैं, लेकिन स्किल डेवलप न कर पाने के कारण उन्हें काम मिलने में मुश्किल आती है। मुझे इस क्षेत्र में बिजनेस की एक संभावना नजर आई। इस तरह, थर्ड ईयर में आइडिया पर काम करना शुरू किया और फिर नींव पड़ी ‘एक्सप्लॉयटएक्स’ की। इस प्लेटफॉर्म के जरिये हम स्टूडेंट्स और प्रोफेशनल्स को साइबर सिक्युरिटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ब्लॉकचेन एवं बैकएंड जॉब्स जैसे ट्रैक्स में स्किल ट्रेनिंग देते हैं, जिससे कि उनका अच्छी कंपनी में रिक्रूटमेंट हो सके। कंपनियां भी सीधे हमारे प्लेटफॉर्म से हायर कर सकती हैं। इससे जहां रोजगार की दर बढ़ जाती है, वहीं कंपनियों द्वारा कर्मचारियों की ट्रेनिंग पर खर्च भी बच जाता है।

आइक्रिएट की मेंटरशिप आई काम

जहां तक कंपनी में निवेश या मेंटरशिप का प्रश्न है, तो फिलहाल यह बूटस्ट्रैप्ड है। शुरुआती निवेश परिवारवालों का ही रहा है। लेकिन इसे शुरू करने में आइक्रिएट (ऑटोनोमस सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर एंटरप्रेन्योरशिप ऐंड टेक्नोलॉजी) की अहम भूमिका रही है। दरअसल, मैंने स्टार्टअप इंडिया में अप्लाई किया था, जिसके बाद शीर्ष पांच स्टार्टअप्स में सेलेक्शन हुआ। कई जगह से इंक्यूबेशन के लिए ऑफर आए, जिसमें आइक्रिएट का भी एक था। मैंने उसे मंजूर किया। ये हमें ग्लोबल लेवल पर नेटवर्क बनाने में मदद कर रहे हैं।

स्किल पर है भरोसा

आज कई सारे युवा हैं, जिनके पास आइडिया है, जो स्टार्टअप करना चाहते हैं। लेकिन पूंजी न होने के कारण आइडिया को धरातल पर नहीं उतार पाते। स्टार्टअप के लिए फंड्स का होना बहुत जरूरी है। समस्या यह भी है कि एंटरप्रेन्योरशिप युवाओं के लिए एक बज वर्ड बन गया है। वे बीच में पढ़ाई तक छोड़ने से नहीं कतराते। उन्हें लगता है कि इसमें काफी पैसे हैं। हां, जब फेल होते हैं, तो डिप्रेशन में चले जाते हैं। यह सही नहीं है। मैंने भी जब शुरुआत की थी, तो एक ख्याल बार-बार आता था कि अगर कहीं फेल हो गया, तो क्या होगा? लेकिन अब ऐसा नहीं सोचता। दूसरा, खुद की स्किल पर भरोसा है कि कभी अगर नाकाम हुआ, तो नौकरी का विकल्प खुला है। 

Posted By: Neel Rajput

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