नई दिल्ली [अंशु सिंह]। किसान पिता चाहते थे कि बेटा इंजीनियरिंग की पढ़ाई करे। लेकिन बेटे को कुछ और ही मंजूर था। उसने अपने जुनून को प्राथमिकता दी और आज सभी को आकाश सिंह पर गर्व है, जिन्होंने 2018 में एनर्जीनी इनोवेशंस नाम से एक स्टार्टअप लॉन्च किया। इसके जरिए वे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ अनेक हाथों को रोजगार दे रहे हैं। आकाश मानते हैं कि समाज के हित में काम करना ही जीवन का मकसद है। लोगों के जीवन को बदलते देखना संतोष देता है। उसी को अपनी सफलता मानता हूं। वैसे, एनवॉयर्नमेंट एवं क्लाइमेट चेंज मंत्रालय के साथ-साथ एमएसएमई मंत्रालय ने भी आकाश के कार्यों की काफी प्रशंसा की है।

मैं उत्तर प्रदेश के छोटे से गांव जेवर (जिला-गौतमबुद्ध नगर) से हूं। जब नौवीं क्लास में था, तो विज्ञान एवं नवाचार के विभिन्न मेलों में शामिल होने का मौका मिला। इसके बाद मैंने सेल्फ पावर जेनरेटिंग वॉकिंग स्टिक, इरिगेशन स्प्रिंकलर और विंड हारनेसिंग मशीन विकसित की। इसी दौरान मैंने तय कर लिया कि 10वीं के बाद पढ़ाई नहीं करूंगा, बल्कि अपनी स्किल को और तराशूंगा, ताकि समाज में जो समस्याएं हैं, उनका समाधान निकाल सकूं। मैंने गुरुग्राम के सरकारी कॉलेज से दो वर्ष का डिप्लोमा इंजीनियरिंग कोर्स किया और फिर 2018 में एनर्जीनी इनोवेशंस नाम से स्टार्टअप शुरू कर दिया। इसके माध्यम से हम मंदिरों से आने वाले कचरे का प्रबंधन कर उससे विभिन्न प्रकार के इको फ्रेंडली उत्पाद का निर्माण करते हैं।

अटल इंक्यूबेशन सेंटर से मदद

मैंने वैसे तो अकेले ही शुरुआत की थी। बाद में अटल इंक्यूबेशन सेंटर से इंफ्रास्ट्रक्चर संबंधी मदद मिली। आज हमारे दो ऑफिस हैं। कुछेक एंजेल इंवेस्टर्स ने निवेश किया है। फिलहाल, 24 लोगों की टीम है, जिसमें अधिकांश युवाओं की उम्र 25 वर्ष से कम है। इनमें कुछ पुराने कैदी भी हैं, जिन्होंने हमारे साथ काम कर, एक नई जिंदगी की शुरुआत की है।

पर्यावरण संरक्षण के साथ रोजगार सृजन

हमारे देश में 50 लाख से ज्यादा मंदिर हैं, जहां से निकलने वाले कचरे को सीधे जल में प्रवाहित कर दिया जाता है। इससे प्रदूषण बढ़ता है। ऐसे में हम नोएडा, ग्रेटर नोएडा, दिल्ली, गाजियाबाद और गुरुग्राम के मंदिरों से कचरा एकत्रित करते हैं। टीम हर महीने लगभग 1200 से 1500 किलोग्राम के आसपास कचरा इकट्ठा कर लेती है। इस कचरे को फिर जीबी नगर के डिस्ट्रिक्ट जेल में भेजा जाता है। वहां के अंडरट्रायल कैदी इनसे कई प्रकार के प्रोडक्ट बनाते हैं, जिन्हें हम बाजार में बेचते हैं। इससे जो आमदनी होती है, उससे कैदियों को हर महीने वेतन दिया जाता है। इस काम से दो उद्देश्य पूरे होते हैं। पहला, नदी जल प्रदूषण कम होता है और दूसरा, युवा कैदी कौशल सीखते हैं, जिससे जेल से बाहर निकलने के बाद भी वे कहीं काम कर पाते हैं या अपना काम शुरू कर सकते हैं।

Posted By: Neel Rajput

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