पानी में डूबी उजरिया के न मिलने से पथरा रहीं स्वजन की आंखें

जागरण संवाददाता, बांदा : मरका की यमुना नदी में नाव डूबने की घटना को सप्ताह भर बीत चुके हैं। लेकिन डूबी उजरिया अभी तक नहीं मिली है। स्वजन रोजाना नदी किनारे इस आस से टकटकी लगाए रहते हैं कि शायद वह कहीं मिल जाए। रिश्तेदारों के साथ करीब 50 किलोमीटर तक उन्होंने पैदल जाकर उसकी तलाश की है। इंतजार में उनकी आंखे पथरा रही हैं।

मरका से 11 अगस्त को रक्षा बंधन के मौके पर नाव से लोग फतेहपुर जनपद जा रहे थे। लेकिन बीच मझधार में तेज हवा की वजह से नाव की पतवार टूट गई थी। जिसमें नाव समेत उसमें बैठे सभी लोग डूब गए थे। प्रशासन ने 32 लोगों के नाव में सवार होना माना था। जिसमें 17 लोग घटना के समय सकुशल बाहर निकल आए थे। शाम तक तीन शव बरामद हुए थे। बाद में एक के बाद एक 10 शव और अलग-अलग दिन मिले थे। जिससे कुल बरामद शवों की संख्या बढ़कर 13 हो गई थी। दो लोगों की तलाश पानी में की जा रही है। बुधवार को फतेहपुर जनपद के किशनपुर थाना क्षेत्र में दो महिलाओं के शव मिले थे। लेकिन गौरी ताला निवासी अनोखेलाल ने पानी में डूबी पत्नी उजरिया के रूप में बरामद शवों की पहचान नहीं की थी। इसी तरह फतेहपुर के डूबे राजू की भी उनके स्वजन ने शिनाख्त नहीं की थी। उजरिया का पति व देवर राकेश आदि हर रोज यमुना नदी उसे खोजने जाते हैं। उनका कहना है कि अब आंखे भी तलाश करते-करते थक गई हैं। लेकिन वह हार नहीं मान रहे हैं। अपनी ओर से उसे खोजने का पूरा प्रयास कर रहे हैं। रिश्तेदारों से भी मदद ले रहे हैं। नदी के दोनों पाटों की ओर वह उसकी खोजबीन अभी तक कर चुके हैं।

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पुराने शव होने से नहीं हो रही पहचान

बांदा : किशनपुर क्षेत्र में बुधवार व गुरुवार में तीन शव बरामद हुए हैं। लेकिन सभी शव ज्यादा समय तक पानी में रहने से पहचान करने लायक नहीं हैं। युवती की उम्र कम होने से व उसके पहनावे से स्वजन ने उजरिया होने से इन्कार कर दिया था। इसी तरह दूसरी महिला के कंकाल बन चुके शव की भी उन्होंने शिनाख्त नहीं की है।

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तो आखिर कहां से बहकर आ रहे हैं शव

- जो शव यमुना नदी में अब बरामद हो रहे हैं। यदि वह नाव के साथ डूबे लोगों के नहीं तो आखिर सवाल यह उठता है कि इतने शव बहकर कहां से आ रहे हैं। उनकी मौत किस घटना में हुई है। यह भी एक चिंता का विषय बना है। उनकी पहचान कैसे हो पाएगी।

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यमुना में नहीं मिली नाव, एसडीआरएफ कर रही खोजबीन

- यमुना नदी में हादसा होने के बाद सबसे बड़ी बात तो यह है कि अभी तक राहत कार्य में जुटीं रहीं एनडीआरएफ (राष्ट्रीय आपदा मोचन बल) टीम व एसडीआरएफ (राज्य आपदा मोचन बल) के साथ पीएसी के जवान व करीब 60 गोताखोर मिलकर भी पानी में डूबी नाव को नहीं खोज पाये हैं। अब तो इधर यमुना का जलस्तर भी बढ़ गया है। इससे खोजबीन में और बाधा आ रही है। एनडीआरएफ के लौटने के बाद गुरुवार को एसडीआरएफ के 30 जवान स्थानीय गोताखोरों की मदद से राहत कार्य में जुटे रहे हैं।

Edited By: Jagran