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पैरों से लिखकर परीक्षा की पास, सरकारी टीचर बनने के बाद अब UPSC लक्ष्य; जानें जामी सिम्हाचलम की रोचक कहानी

Published: Tue, 15 Sep 2026 06:02 PM (IST)

हाथ न होने पर पैरों से लिखकर सरकारी टीचर बनने वाले जामी सिम्हाचलम का सपना आईएएस बनकर समाज व देश की सेवा करना है।

Jami Simhachalam की सक्सेज स्टोरी।

Jami Simhachalam की सक्सेज स्टोरी।

HighLights

  1. पैरों से लिखकर पास की परीक्षा और बन गए सरकारी टीचर।

  2. यूपीएससी क्रैक करके करना चाहते हैं देश सेवा।

करियर डेस्क, नई दिल्ली। लगन, मेहनत और कुछ कर गुजरने की इच्छाशक्ति अवश्य ही व्यक्ति के जीवन को नई ऊचांइयां देता है और ऐसा ही कुछ कर दिखाया आंध्र प्रदेश के विजयनगरम जिले के एक छोटे से गांव गनीसेट्टीपालेम के रहने वाले जामी सिम्हाचलम नायडू ने। दोनों हाथों और एक पैर में गंभीर दिव्यांगता के साथ जन्मे नायडू ने अपनी शारीरिक कमियों को कभी अपनी पहचान नहीं बनने दिया।
जिसको देखकर लोग समझते थे कि दोनों हाथ न होने पर वे भविष्य में क्या कर पाएंगे उनको जामी सिम्हाचलम ने वो कर दिखाया जो पूर्ण रूप से स्वस्थ व्यक्ति भी नहीं कर सके।

चाचा के एक आईडिया ने बदल दी जिंदगी

जामी सिम्हाचलम नायडू के दोनों ही हाथ शुरू से ही काम नहीं करते थे। नायडू जब करीब साढ़े तीन साल के थे, तब उनके चाचा जामी नरसिम्हा राव ने एक पत्रिका में एक विदेशी व्यक्ति के बारे में पढ़ा जो पैरों से लिखता था। इसके बाद उनके मन में एक आईडिया आया जिसने जामी सिम्हाचलम की लाइफ बदल दी।
उनके चाचा ने उनको पैरों से लिखना सिखाया। शुरुआत में उन्होंने चॉक, पेन को उनके पैरों की उंगलियों में फंसाकर अभ्यास करना सिखाया। कहते हैं न कि "करत-करत अभ्यास के, जड़मति होत सुजान। रसरी आवत-जात तें, सिल पर परत निसान। यह कहावत जामी के लिए फिट बैठी। कुछ सालों के अभ्यास के बाद वे पैरों की उंगलियों से लिखना सीख गए।

पैरों से लिखकर दी परीक्षा और बन गए सरकारी टीचर

इसके बाद उन्होंने अपनी पढ़ाई और भर्ती क परीक्षाओं को स्वयं ही दिया। कभी भी उन्होंने लिखने के लिए राइटर का सहारा नहीं लिया। टीचर की परीक्षा में पास होने के बाद वे शानदार रैंक हासिल करके एक सरकारी ट्राइबल वेलफेयर हाई स्कूल में शिक्षक पद पर नियुक्त हुए। अब वे पैरों से ब्लैकबोर्ड पर लिखकर बच्चों को पढ़ाते हैं।

सरकारी टीचर बनने के बाद UPSC क्रैक करना लक्ष्य

सरकारी नौकरी पाने के बाद भी जामी सिम्हाचलम की कहानी खत्म नहीं बल्कि एक नई जर्नी की शुरुआत जैसी है। अब उनका लक्ष्य यूपीएससी क्रैक करके IAS बनने का है। आईएएस अधिकारी बनकर वह देश और समाज की सेवा करना चाहते हैं।

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