अंशु सिंह। डिजिटल एसेट एक्सचेंज क्रास टावर एवं यूएस-इंडिया स्ट्रेटेजिक पार पार्टनरशिप फोरम की रिपोर्ट के अनुसार, ब्लाकचेन टेक्नोलाजी एवं वेब-3 इनोवेशन से डिजिटल इकोनामी का तेजी से विकास होगा। भारत के जीडीपी में इसका योगदान करीब 1.1 ट्रिलियन डालर के आसपास रहने का अनुमान भी जताया जा रहा है यानी इस क्षेत्र में कुशल युवाओं के लिए बेहतरीन मौके उपलब्ध होने जा रहे हैं।

भारत की सरकारी एवं निजी क्षेत्र की कंपनियां अपनी कार्यक्षमता को बढ़ाने एवं पारदर्शिता लाने के लिए ब्लाकचेन टेक्नोलाजी का बखूबी प्रयोग कर रही हैं। देश में करीब 56 प्रतिशत बिजनेस ब्लाकचेन टेक्नोलाजी के जरिये हो रहा है। सरकारी विभाग लैंड टाइटल रजिस्ट्री, व्हीकल लाइफसाइकिल मैनेजमेंट, फार्म इंश्योरेंस एवं इलेक्ट्रानिक हेल्थ रिकार्ड मैनेजमेंट के लिए इस टेक्नोलाजी का इस्तेमाल कर रहे हैं। नेशनल इंफार्मेटिक्स ने ब्लाकचेन टेक्नोलाजी में प्रशिक्षण देने के लिए सेंटर आफ एक्सीलेंस स्थापित किया है, जिसकी मदद से सरकार विभिन्न परियोजनाओं का टेस्ट रन करती है।

क्या है ब्लाकचेन टेक्नोलाजी: ब्लाकचेन दो शब्दों को मिलाकर बना है- ब्लाक एवं चेन। ब्लाकचेन में ब्लाक एक प्रकार के लेजर्स (स्टोरेज यूनिट) होते हैं, जो डाटा स्टोर करने में मदद करते हैं, खासकर ट्रांजैक्शनल डाटा। ब्लाकचेन डिस्ट्रीब्यूटेड लेजर टेक्नोलाजी (डीएलटी) के सिद्धांत पर काम करता है। डाटा को सुरक्षित रखने का यह सबसे अच्छा तरीका है, जिसमें डाटा को ब्लाक में स्टोर किया जाता है। वहां उसके साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं की जा सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि लोकप्रिय धारणाओं के विपरीत, हम ब्लाकचेन को बिटकायन नहीं कह सकते हैं। यह एक प्रकार की व्यवस्था है जो सूचनाओं को रिकार्ड एवं ट्रैक करने में मदद करता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत है कि एक बार डाटा स्टोर कर लिया गया, तो उसे हैक नहीं किया जा सकता है। न ही उसमें कोई बदलाव लाए जा सकते हैं। डिस्ट्रीब्यूटेड लेजर टेक्नोलाजी के इस्तेमाल के कारण ट्रांजैक्शन के लेजर की कापी पूरे कंप्यूटर सिस्टम के नेटवर्क में बन जाती है। सस्ती एवं सुरक्षित टेक्नोलाजी होने के कारण कारोबारी डाटा स्टोर एवं ट्रैक करने के लिए इन दिनों ब्लाकचेन का बखूबी प्रयोग कर रहे हैं। ब्लाकचेन में डाटा को एक्सेस करने के लिए उद्यमी के लिए यह जानना जरूरी है कि वे किस प्रकार के ब्लाकचेन का इस्तेमाल कर रहे हैं। क्योंकि ब्लाकचेन चार प्रकार के होते हैं- पब्लिक ब्लाकचेन, प्राइवेट ब्लाकचेन, कंसोर्टियम ब्लाकचेन एवं हाइब्रिड ब्लाकचेन।

शैक्षिक योग्यता: पारंपरिक उद्योगों से इतर ब्लाकचेन एक विकेंद्रीकृत एवं पारदर्शी इंडस्ट्री है। यह इंटरनेट पर संचालित होती है और इसमें सभी सूचनाएं आनलाइन उपलब्ध होती हैं। फिलहाल, देश के किसी भी विश्वविद्यालय में इससे संबंधित फुलटाइम कोर्स नहीं है। लेकिन कुछ संस्थाएं वोकेशनल कोर्स एवं वर्कशाप संचालित करती हैं, जिनसे फायदा उठाया जा सकता है। इंटरनेट पर भी ब्लाकचेन से जुड़ी तमाम सामग्री है, जिनसे खुद को स्किल किया जा सकता है। इसके अलावा, अगर स्टूडेंट्स प्रोग्रामिंग (जावा, सालिडिटी, सी प्लस, पाइथन, जावा स्क्रिप्ट), डाटा स्ट्रक्चर्स एवं आर्किटेक्चर, क्रिप्टोग्राफी, साइबर सिक्योरिटी आदि में कुशलता रखेंगे, तो उसके बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। आइटी या सीएस से बीटेक करने वाले स्टूडेंट ब्लाकचेन तकनीक को आसानी से सीख कर इसमें आगे बढ़ सकते हैं।

संभावनाएं: ब्लाकचेन इंडस्ट्री में संभावनाओं की बात करें, तो यह भविष्य के प्रति काफी उम्मीद जगाती है। अगर ब्लाकचेन एवं क्रिप्टो को मिला दिया जाए, तो काम के अवसर बढ़ जाते हैं। जुवोमो के प्रबंध निदेशक निखिल बताते हैं कि वर्तमाम समय में करीब 18,500 क्रिप्टो प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं। इन प्रोजेक्ट्स के लिए डेवलपर्स, प्रोग्रामर्स, डिजाइनर्स, मार्केटर्स, राइटर्स, प्रोजेक्ट मैनेजर्स, एचआर, अकाउंटेंट्स, लीगल प्रोफेशनल्स, सिस्टम इंजीनियर्स, फाइनेंशियल एनालिस्ट, सीए एवं वीडियो एडिटर्स की आवश्यकता है। इनके अलावा, बाजार में ब्लाकचेन से जुड़े कई स्टार्टअप्स हैं, जिन्हें कुशल लोगों की जरूरत है। आने वाले समय में ब्लाकचेन टेक्नोलाजी में स्किल्ड लोगों की बैंकिंग-पेमेंट्स, सप्लाई चेन मैनेजमेंट, फोरकास्टिंग, इंटरनेट आफ थिंग्स, इंश्योरेंस, क्लाउड स्टोरेज, सरकारी विभागों, हेल्थकेयर, एनर्जी मैनेजमेंट, रिटेल, रियल एस्टेट जैसे सेक्टर्स में काफी मांग होगी। अगर सैलरी पैकेज की बात करें, तो एक ब्लाकचेन डेवलपर को सालाना 12 लाख रुपये तक मिलते हैं। साफ्टवेयर इंजीनियर्स एवं सिक्योरिटी आर्किटेक्ट को भी 10 लाख रुपये तक मिलते हैं, जबकि कम्युनिटी मैनेजर एवं ब्लाकचेन कंटेंट राइटर्स छह से आठ लाख रुपये तक कमा लेते हैं। यह पैकेज देश, कंपनी एवं योग्यता के अनुसार, बदलता रहता है।

तकनीकी-गैर-तकनीकी दोनों के लिए हैं मौके: जुवोमो के प्रबंध निदेशक निखिल सेठी ने बताया कि ब्लाकचेन इंडस्ट्री में विविध प्रकार के स्किल्ड पेशेवरों की आवश्यकता है। इंजीनियरिंग ग्रेजुएट या गैर-तकनीकी पृष्ठभूमि से आने वाले युवा भी इसमें करियर बना सकते हैं, बशर्ते उन्हें इंडस्ट्री के बारे में अच्छी नालेज हो। यह इंडस्ट्री अभी अपने शुरुआती दौर में ही है। इसलिए इसके बारे में उतनी जागरूकता नहीं है। प्रतिस्पर्धा भी कम है। अच्छी बात यह है कि कोई भी कुशल युवा रिमोट वर्किंग कर सकता है। फ्रीलांसर्स एवं स्टूडेंट्स के लिए काफी संभावनाएं हैं। वे इसमें पार्टटाइम जाब कर सकते हैं। जहां तक नौकरी का सवाल है, तो अधिकांश कंपनियां बेसिक ग्रेजुएशन डिग्री देखती हैं। टेक्निकल बैकग्राउंड वाले युवा जहां ब्लाकचेन डेवलपर, साफ्टवेयर डेवलपर, डाटा एनालिस्ट, साइबर सिक्योरिटी एनालिस्ट, सिक्योरिटी आर्किटेक्ट, गेम डेवलपर के रूप में काम कर सकते हैं, तो वहीं गैर तकनीकी पृष्ठभूमि वाले ब्लाकचेन कम्युनिटी मैनेजर, ब्लाकचेन राइटर, फाइनेंशियल एनालिस्ट, अकाउंटेंट, ग्राफिक डिजाइनर एवं वीडियो एडिटर के रूप में कार्य कर सकते हैं।

इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स को है अतिरिक्त लाभ: एनआइईटी के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट रमन बत्रा ने बताया कि आइटी या सीएस से इंजीनियरिंग करने वाले युवा ब्लाकचेन तकनीक में दूसरों की तुलना में जल्दी कुशलता हासिल कर सकते हैं। कई जागरूक संस्थानों में अब नियमित कोर्स के साथ-साथ इस तकनीक की भी ट्रेनिंग दी जाने लगी है, जिसका लाभ वहां के ग्रेजुएट्स प्लेसमेंट के दौरान उठा सकते हैं।

प्रमुख संस्थान

इंडियन इंस्टीट्यूट आफ ब्लाकचेन टेक्नोलाजी, हैदराबाद

http://indianinstituteofblockchaintechnology.com/

एमिटी फ्यूचर एकेडमी, मुंबई

https://amityfutureacademy.com/

इंडियन ब्लाकचेन इंस्टीट्यूट, पुणे

https://indianblockchaininstitute.com/

एनआइईटी, ग्रेटर नोएडा, उप्र

https://www.niet.co.in/

इंडियन साइबर सिक्योरिटी साल्यूशंस, कोलकाता

https://indiancybersecuritysolutions.com/

Edited By: Sanjay Pokhriyal