नई दिल्ली [अंशु सिंह]। वैश्विक महामारी के दौरान वैसे भी डाटा की खपत पहले से कई गुना बढ़ चुकी है। जितना अधिक डाटा जेनरेट हो रहा है, उसी अनुसार उसकी खपत भी हो रही है। मोबाइल फोन,सोशल मीडिया,एप्स,पेमेंट वॉलेट्स से इतना डाटा जेनरेट हो रहा है कि उसे मैनेज करने के लिए विशेषज्ञों की जरूरत महसूस की जा रही है।

एक अध्ययन के अनुसार,विश्व भर में डाटा साइंटिस्ट की मांग में करीब 28 फीसद बढ़ोत्तरी का अनुमान है। वहीं, डाटा साइंस या एनालिटिक्स के क्षेत्र में सबसे अधिक नियुक्तियां करने के मामले में अमेरिका के बाद भारत का दूसरा स्थान है।

बेंगलुरु के एक शीर्ष मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट से एमबीए करने के बाद सुमंत एक मल्टीनेशनल बैंक में काम कर रहे थे। इसके अंतर्गत उन्हें बड़े स्तर पर डाटा के साथ काम करना होता था, तभी एक इंजीनियर दोस्त ने उन्हें डाटा साइंस के बारे में बताया। शुरू में उन्हें ज्यादा समझ में नहीं आया। लेकिन एक्सप्लोर करने के बाद पता चला कि डाटा साइंस काम को कितना सरल बना सकता है। तभी तो कंपनियां डाटा के जरिये ग्राहकों की मांग एवं पसंद आदि को आसानी से समझ पा रही हैं।

दरअसल, डाटा साइंटिस्ट डाटा का अध्ययन करते हैं। डाटा का विश्लेषण करके वे कंपनियों या संस्थानों को भविष्य की योजना बनाने में मदद करते हैं। इसके तहत पहले वे डाटा जुटाते हैं। फिर उन्हें स्टोर करते हैं और बाद में डाटा की पैकेजिंग यानी विभिन्न श्रेणियों में उनकी छंटाई करते हैं। आखिर में डाटा की डिलीवरी होती है। यूं कहें कि डाटा साइंटिस्ट डाटा को बेहतर तरीके से विजुअलाइज करना जानते हैं। इन सबके अलावा, वे खोए हुए डाटा को खोजने, गड़बड़ियों को दूर करने एवं अन्य खामियों से बचाव में भी मदद करते हैं।

पढ़ाई के साथ जरूरी स्किल्स

डाटा साइंटिस्ट बनने के लिए कैंडिडेट के पास मैथ्स, स्टैस्टिक्स, कंप्यूटर साइंस, इंजीनियरिंग, अप्लायड साइंस में एमटेक या एमएस की डिग्री होना जरूरी है। मद्रास स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से डाटा साइंस में पीजीडीएम (रिसर्च ऐंड बिजनेस एनालिटिक्स) का कोर्स कर रहे आकाश गुप्ता के अनुसार, डाटा साइंस के अंतर्गत हमें मैथ्स, एल्गोरिद्म टेक्निक, स्टैस्टिक्स, मशीन लर्निंग एवं पाइथन, हाइव, एसक्यूएल, आर, जैसे प्रोग्रामिंग लैंग्वेज सीखने होते हैं। इसमें काफी मेहनत, समय एवं धैर्य की जरूरत होती है।

एक स्टार्ट अप कंपनी में डाटा साइंटिस्ट के रूप में कार्यरत शिव्या बंसल की मानें, तो डाटा साइंटिस्ट के पास बिजनेस की अच्छी समझ एवं स्ट्रॉन्ग कम्युनिकेशन स्किल होनी चाहिए। इसके अलावा, किसी भी प्रोग्राम या कोर्स का चयन करने से पहले उसके बारे में पूरी जानकारी इकट्ठा करना अच्छा रहता है। वे खुद लर्नबे से ऑनलाइन कोर्स कर रही हैं, जो इंडस्ट्री ओरिएंटेड है। इससे प्रैक्टिकल काम करने में मदद मिलती है।

कोर्स

देश में कई शीर्ष संस्थानों में इससे संबंधित कोर्स संचालित किए जाते हैं। मसलन, आइआइएम कलकता, आइएसआइ कलकत्ता एवं आइआइटी खड़गपुर द्वारा संयुक्त रूप से संचालित पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन बिजनेस एनालिटिक्स (डाटा साइंस) प्रोग्राम काफी लोकप्रिय है।

इसके अलावा, आइआइआइटी बेंगलुरु से भी कोर्स कर सकते हैं। अगर, ऑनलाइन सीखना चाहें, तो सिंप्लीलर्न, जिगसॉ एकेडमी, एडुरेका, लर्नबे आदि के प्लेटफॉर्म को एक्सप्लोर कर सकते हैं। एक्सपर्ट्स की मानें, तो डाटा साइंस में करियर बनाने के लिए मैथ्स की पृष्ठभूमि फायदेमंद रहती है।

संभावनाएं

2026 तक इस क्षेत्र में करीब 1.1 करोड़ नई नौकरियां सामने आने की संभावना है। भारत की बात करें, तो 2018 में डाटा साइंटिस्ट्स की मांग में 417 फीसद का इजाफा देखा गया था,जिसके आने वाले समय में भी बने रहने की संभावना है। इस क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक युवा डाटा साइंटिस्ट के अलावा,डाटा इंजीनियर,डाटा एडमिनिस्ट्रेटर,स्टैस्टिशियन,डाटा एंड एनालिटिक्स मैनेजर आदि के प्रोफाइल पर काम कर सकते हैं। कृषि,हेल्थकेयर,एविएशन,साइबर सिक्योरिटी जैसे सेक्टर में इनकी अच्छी मांग रहेगी।

कोविड 19 के बाद भी बढ़ेगी हायरिंग

डाटा साइंटिस्ट्स बिजनेस एनालिटिक्स, डाटा प्रोडक्ट्स एवं स़ॉफ्टवेयर प्लेटफ़ॉर्म्स बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। आज विश्व में हर दिन 2.5 क्विंटिलयन बाइट्स डाटा क्रिएट हो रहा है, जिसे मैनेज करने के लिए स्किल्ड प्रोफेशनल्स की जरूरत होगी। इनके लिए अथाह अवसर होंगे। खासकर बिग डाटा एनालिटिक्स एवं आइटी इंडस्ट्री में इनकी विशेष मांग होगी।

एक वैश्विक अध्ययन के अनुसार, कोविड 19 के बाद अकेले अमेरिका में लाखों डाटा साइंस प्रोफेशनल्स की आवश्यकता होगी। ग्लोबल कंपनियां अपने बिजनेस को संभालने के लिए बड़ी संख्या में डाटा साइंटिस्ट को हायर करेंगी। भारत में भी समान स्थिति रहेगी। इसके लिए युवा देश की अलग-अलग यूनिवर्सिटीज में ऑफर किए जा रहे पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स में दाखिला ले सकते हैं या फिर कोरसेरा, मेटिस, एमआइटी (ईडीएक्स), हार्वर्ड या यूडेमी से ऑनलाइन कोर्स भी कर सकते हैं।

लेकिन फुल कोर्स करना ज्यादा अच्छा रहेगा। अगर वे मशीन लर्निंग के साथ न्यूरल नेटवर्क, टेंसरफ्लो, केरस, पाइटॉर्क जैसे डीप लर्निंग फ्रेमवर्क में काम कर सकते हैं, हडूप एवं स्पार्क की वर्किंग नॉलेज रखते हैं, तो इंडस्ट्री में आगे बढ़ने के सुनहरे मौके मिल सकते हैं। डाटा साइंटिस्ट के पास क्रिटकल थींकिंग होना भी जरूरी है। 

डॉ. आर. श्रीधरन, (डीन, फैकल्टी, कंप्यूटर एप्लीकेशंस, मारवाड़ी यूनिवर्सिटी, राजकोट)

प्रमुख संस्थान

आएसआइ कलकत्ता

www.isical.ac.in 

आइआइएम, कलकत्ता

www.iimcal/l.ac.in 

आइआइटी खड़गपुर

www,iitkgp.ac.in 

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, बेंगलुरु

https://www.iimb.ac.in 

ग्रेट लेक्स इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, तमिलनाडु

https://www.greatlakes.edu.in/ 

आइआइआइटी बेंगलुरु

https://www.iiitb.ac.in/

 

Edited By: Vinay Tiwari