सीतामढ़ी। सीतामढ़ी जंक्शन पर रेलवे कैंटीन के संचालक अरुण कुमार सिंह (70) की बुधवार तड़के चाकू गोदकर हत्या कर दी गई। वे शिवहर जिले के पिपराही थाना क्षेत्र के धनकौल गांव के रहने वाले थे। प्लेटफार्म पर हत्या से सनसनी फैल गई। घटनास्थल के पास ही आरपीएफ थाना है। वहीं कुछ दूरी पर जीआरपी का भी थाना है। इस हत्या से स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

अरुण कुमार सिंह तकरीबन 40 वर्ष से रेलवे में कैटरिग व्यवसाय से जुड़े थे। रेलवे स्टेशन पर ठेला, खोमचा के साथ उनके और भी कई स्टाल थे। मंगलवार की रात कैंटीन में खाना बनाने वाली सूर्यकला देवी फर्श पर बिस्तर लगाकर और अरुण अपनी केबिन में रोजाना की भांति सो रहे थे।

मास्क में थे दो बदमाश : सूर्यकला ने बताया कि सुबह करीब साढे़े तीन बजे खटपट की आवाज के साथ नींद टूटी तो कमरे में दो अपराधियों को पाया। उसने शोर मचाने की कोशिश की तो अपराधियों ने मारपीट शुरू कर दी। उसका मोबाइल छीन लिया। इसके बाद फरार हो गए। दोनों कम उम्र के लग रहे थे। मास्क लगा रखा था। घटना के बाद जब वह कैंटीन संचालक को जगाने उनके कक्ष में गई तो उन्हें खून से लथपथ देख सकते में आ गई। उसकी सूचना पर आरपीएफ इंस्पेक्टर अनिता कुमारी और जीआरपी प्रभारी प्रवीण कुमार मौके पर पहुंचे।

डाग स्क्वाड को नहीं मिली सफलता : जांच में मृतक के कमरे में खून से सनी शर्ट मिली। कैंटीन में काम करने वाली महिला ने पूछताछ में बताया कि वह उनके मालिक की नहीं है। मौके पर डाग स्क्वाड को बुलाया गया। शर्ट को सूंघते ही खोजी कुत्ता एक किलोमीटर दूर कमला गार्डन की ओर लखनदेई नदी किनारे खेत में जाकर बैठ गया। इसी इलाके में भाड़े के मकान में कैंटीन संचालक रहते थे।

अरुण कुमार सिंह की पत्नी की मौत हो चुकी है। उनकी सिर्फ तीन बेटियां हैं। उनकी शादी हो चुकी है। मौके पर पहुंचे मुजफ्फरपुर रेल डीएसपी अतनु दत्ता व सीतामढ़ी सदर डीएसपी सुबोध कुमार ने बताया कि सभी संभावित बिदुओं पर तफ्तीश की जा रही है। घटना की वजह पारिवारिक संपत्ति का विवाद है या कैंटीन को हथियाने की साजिश, यह जांच के बाद ही पता चल सकेगा।

जीआरपी थानाध्यक्ष प्रवीण कुमार का कहना है कि मौके से खून से सटी शर्ट मिली है। खून लग जाने के कारण अपराधी छोड़कर भाग गए थे। हत्या का कारण पता नहीं चल सका है। रेलवे स्टेशन के सीसी कैमरे से अपराधियों की शिनाख्त की कोशिश की जा रही है।

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Edited By: Jagran