बरेली में जमीन कब्जाकर इरा कंपनी ‘फरार’ किसानों ने बेच दी लाखों की निर्माण सामग्री

जेएनएन, बरेली : किसानों की जमीन का एग्रीमेंट कर फरार होने वाली इरा कंपनी की लाखों की निर्माण सामग्री बेच दी गई। कब्जा हटाने के नाम पर किसानों ने इसका सौदा एक जनप्रतिनिधि से जुड़े लोगों से कर दिया। तीन दिन से वहां से निर्माण सामग्री हटाकर शाहजहांपुर जनपद में भेजी जा रही थी। गुरुवार को इसकी सूचना होने पर कंपनी मैनेजर ने पुलिस बुला ली। मौके से एक बुलडोजर पकड़ा गया तो उसे छुड़ाने के लिए जनप्रतिनिधि पहुंच गए। दिन भर खींचतान के बाद शाम को बुलडोजर छोड़ दिया गया। प्रकरण सत्ता पक्ष के नेताओं से जुड़ने के बाद अब शुक्रवार को सभी पक्ष थाने में बुलाए गए हैं। इरा कंपनी को बरेली-सीतापुर फोरलेन बनाने की जिम्मेदारी मिली थी। वर्ष 2010 में काम मिलने से पहले ही कंपनी ने राष्ट्रीय राजमार्ग किनारे किसानों ने जमीन लेनी शुरू कर दी थी। वहां प्लांट बनाकर निर्माण सामग्री आदि एकत्र कराई जाती थी। सिमरा हरीशचंद्र के किसानों के अनुसार, वर्ष 2008 में कंपनी ने करीब सवा सौ बीघा जमीन के लिए 12 किसानों से एग्रीमेंट किया था। जिसमें कहा गया कि प्रति वर्ष आठ हजार रुपये प्रति बीघा के हिसाब से उन्हें जमीन का किराया दिया जाएगा। इसके बाद हर वर्ष 10 प्रतिशत किराया वृद्धि होगी। प्रत्येक तीन वर्ष बाद एग्रीमेंट का नवीनीकरण कराया जाएगा। इसी अनुबंध के आधार पर किसानों ने जमीन दे दी। वर्ष 2011 से काम शुरू हुआ तो कंपनी ने उपकरण, निर्माण सामग्री आदि वहीं एकत्र कर दी। वर्ष 2015 में एक बार फिर नवीनीकरण हुआ। उस समय कंपनी का प्लांट बंद होने के कगार पर आ चुका था। कुछ ही महीने बाद कंपनी फरार हो गई, जिसके बाद यह काम दूसरे संस्था को दे दिया गया। इंतजार करते रहे किसान, नहीं हुई सुनवाई किसानों का कहना है कि वर्ष 2015 के बाद उन्हें जमीन का किराया नहीं मिला। कंपनी के अधिकारियों से कई बार संपर्क करना चाहा मगर, जवाब नहीं मिला। प्रशासनिक अधिकारियों से जमीन मुक्त कराने की मांग की तो उन्होंने एनएचएआइ अधिकारियों से संपर्क करने को कहा। किसानों को कहना है कि उन्हें न तो अपनी जमीन वापस मिल पा रही, न ही किराया मिल रहा। खुद कर दिया सौदा कुछ दिन पहले किसानों ने शाहजहांपुर के बंथरा में एक युवक से संपर्क कर जमीन खाली कराने का ठेका दिया। इसके लिए दोनों पक्षों से शपथ पत्र बनवाया गया कि बुलडोजर का उपयोग जमीन खाली कराने के लिए होगा, इसके बदले किसान किराया देंगे। इसी में निर्माण सामग्री भी चोरी-छिपे ठिकाने लगाने की योजना बना ली गई। 30 लाख से अधिक की निर्माण सामग्री बताया जाता है कि मौके पर करीब 30 लाख रुपये कीमत की बजरी, बजरपुर आदि सामग्री पड़ी थी। तीन दिन पहले दो किसानों ने अपनी करीब 40 बीघा जमीन से इस निर्माण सामग्री को हटवाना शुरू कर दिया। कुछ उपकरण कंपनी छोड़ गई थी, वे भी ठिकाने लगा दिए गए। ट्रैक्टर-ट्रालियों में बजरी आदि भरने के बाद ढककर शाहजहांपुर भेजी जा रही थी। कार्रवाई होते ही आने लगे नेताओं के फोन गुरुवार दोपहर को कंपनी के मैनेजर राहुल ने फतेहगंज पूर्वी थाने के प्रभारी धर्मेंद्र सिंह को फोन किया कि प्लांट से कुछ लोग निर्माण सामग्री चोरी कर शाहजहांपुर के बंथरा में बेच रहे हैं। मौके पर पहुंची पुलिस एक बुलडोजर व चालक को थाने ले आई। कुछ देर बाद ही जिले के एक पूर्व विधायक एवं भाजपा नेता ने फोन कर दिया। कहा कि बुलडोजर किराये पर लिया गया था, उसके चालक का निर्माण सामग्री हटाए जाने के मामले से वास्ता नहीं है। थाना प्रभारी ने अनसुना किया तो नेता ने एसपी देहात से बात की। देर शाम बुलडोजर छोड़ दिया गया। बताया जाता है कि बुलडोजर सत्ता पक्ष के नेता का था। पुलिस का कहना है कि कंपनी मैनेजर, किसानों को शुक्रवार को थाने बुलाया है ताकि समाधान कराया जा सके। शाहजहांपुर के एक भाजपा नेता का नाम भी आया ग्रामीणों में चर्चा रही कि प्लांट से उठाई गई निर्माण सामग्री का सौदा शाहजहांपुर के एक भाजपा नेता को कर दिया गया है। उनकी पत्नी इस समय जनप्रतिनिधि हैं। यह बात उन तक पहुंची तो खंडन किया। कहा कि कुछ किसानों ने अपनी जमीन मुक्त कराने की मांग की थी। इस पर उन्होंने पुलिस को फोन कर समाधान कराने को कहा था।

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