बरेली, जागरण संवाददाता। Bareilly News : कभी उच्च पदों पर बैठे बड़े मुस्लिम नेताओं से पद से इस्तीफा देकर पार्टी छोड़ने की अपील तो कभी मुस्लिम को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने की मांग। आजम खान (Azam Khan) और शहजिल इस्लाम पर होने वाली कार्रवाई पर पार्टी व राष्ट्रीय अध्यक्ष पर आंदोलन न करने का आरोप।

यह बरेली के मौलाना के वो बयान है जिनसे सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) परेशान हैं। इतना ही नहीं उन्हें कई बार जवाब भी देना पड़ा। अब आप सोच रहे होंगे कि यह मौलाना (Maulana) कौन है? तो आइए हम बताते है आपको कि ये मौलाना कौन है?

अगर आप मौलाना शहाबुद्दीन रजवी (Maulana Sahabuddin Razvi) को लेकर अंदाजा लगा रहे है तो आप बिल्कुल सही हैं। जी हां यही वो बरेली के माैलाना है जो अपने तीखे बयानों से राष्ट्रीय अध्यक्ष को जहां परेशान कर रहे है, वहीं उन्हें असहज करने वाले सवाल भी उठा रहे है।

उनकी तीखी बयानबाजी सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सहित सपाईयों के लिए भी परेशानी पैदा कर रही हैं।हालांकि इन दिनों वह प्रतिबंधित संगठन पीएफआई द्वारा दी गई धमकी के बाद अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। जिनकी डिमांड पर प्रशासन ने उन्हें गनर उपलब्ध करा दिए हैं।

मौलाना शहाबुद्दीन की बयान बाजी का दौर विधानसभा चुनाव का परिणाम घोषित होने के बाद से जारी हैं। शहाबुद्दीन ने विधानसभा चुनाव के परिणाम के घोषित होने के बाद अप्रैल माह में अपना पहला बयान जारी किया था। जिसमें उन्होंने चुनाव के परिणाम को लेकर चिंता जताई थी।

उन्होंने मुस्लिमाें के भविष्य पर चिंता जताते हुए अपनी हार का ठीकरा अन्य राजनीतिक दलों पर फोड़ा था। उन्होंने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा था कि राष्ट्रीय अध्यक्ष अपने स्वयं के समुदाय को पूरी तरह एकत्रित नहीं कर पाए। जिसके बाद उन्होंने मुस्लिमाें से नई रणनीति बनाने की अपील की थी।

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मौलाना ने आजम खान की रिहाई को लेकर भी अखिलेश यादव पर निशाना साधा था। उन्होंने ने जहां आजम खान की रिहाई को लेकर यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ व मुलायम सिंह को चिट्ठी लिखी थी। वहीं आजम खान के सपा में योगदान का भी जिक्र किया था।

इस मामले में उन्होंने सपा विधायक शहजिल इस्लाम पर भी होने वाली कार्रवाई का अखिलेश यादव पर विरोध न करने का आरोप लगाया था। जिसके बाद अखिलेश की परेशानी उस वक्त और भी बढ़ गई थी जब आजम खान ने सपा के प्रतिनिधि मंडल से किनारा कर लिया था।

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हाल ही में मौलाना ने अखिलेश यादव से जो डिमांड की वो उन्हें और भी असहज करने वाली थी। उन्हाेंने किसी मुस्लिम को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने की बात रखी थी। जिसके लिए उन्होंने बाकायदा तर्क भी दिया था। जिसमें उन्होंने यूपी में मुस्लिमों की भागीदारी को बताते हुए उनके समुदाय की भागीदारी काे भी बताया था।

उन्होंने कहा था कि अखिलेश सिर्फ पर ट्विटर पर राजनीति करते है।वे मुस्लिमों के हक में कोई आंदोलन नहीं करते।उन्होंने इसमें नाहिद हसन पर हुई कार्रवाई का भी जिक्र किया था।

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Edited By: Ravi Mishra

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