श्रीलंकाई तमिल मुद्दे पर द्रमुक द्वारा यूपीए सरकार से समर्थन वापस ले लिया गया। केंद्र सरकार की तरफ से कहा जा रहा है कि सरकार को कोई संकट नहीं है। आपको बता दें कि सपा और बसपा ने सरकार को अपना समर्थन जारी रखने का वादा किया है। डीएमके सुप्रीमो करुणानिधि तमिलों के मुद्दे पर श्रीलंका के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की 22 मार्च को होने वाली बैठक में कड़ा प्रस्ताव लाने के लिए केंद्र सरकार पर दबाव बना रहे हैं। डीएमरे की मांग थी कि श्रीलंका में तमिलों पर हो रहे अत्याचार को देखते हुए प्रस्ताव में '''''नरसंहार'' शब्द को जोड़ा जाए। सरकार ने विदेश नीति का हवाला देते हुए ऐसी मांग मानने में अपनी असमर्थता जताई है। अलबत्ता, संसद में प्रस्ताव लाने पर जरूर आश्वासन दिया, लेकिन भाषा पर डीएमके राजी नहीं था। तमिलनाडु में जयललिता सरकार से बड़ी लकीर खींचने के लिए द्रमुक ने केंद्र सरकार से बाहर जाने का रास्ता अख्तियार किया।