जागरण संवाददाता, संगरूर

पंजाब सरकार की कर्मचारी विरोधी नीतियों के खिलाफ शिक्षा प्रोवाइडर अध्यापक यूनियन के समूह स्टेट कमेटी सदस्यों द्वारा सिटी पार्क संगरूर में बैठक की गई। इसमें पंजाब सरकार से आहत होकर 15 अगस्त को सामूहिक तौर पर कच्चे अध्यापक की नौकरी से इस्तीफा देने का फैसला लिया गया।

राज्य प्रधान मनप्रीत सिंह ने कहा कि वह पिछले 18 वर्षों से राज्य के सरकारी स्कूलों में कम वेतन पर नौकरी कर रहे हैं, सरकार उनको समय-समय पर रेगुलर करने के झूठे वादे कर रही है। 13 हजार कच्चे अध्यापकों का शोषण किया जा रहा है। उन्हे प्रति माह 3500 से 10 हजार रुपये तक वेतन मिलता है, लेकिन महंगाई के कारण उनकों परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यूनियन के सचिव गुरमीत सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान व अरविद केजरीवाल ने कच्चे अध्यापकों के मोहाली धरने में पहुंचकर सरकार बनते ही रेगुलर करने का वादा किया था, परन्तु सरकार रेगुलर की बजाय कानूनी अड़चन के बहाने पालिसी की चाल चल रही है जबकि सभी 13 हजार कच्चे अध्यापक योग्यता पूरी करते हैं। सभी को दस वर्ष से अधिक समय हो चुका है। उन्होंने एलान किया कि पंद्रह अगस्त को यूनियन नेता मुख्यमंत्री पंजाब के झंडा फहराने के स्थान पर पहुंचकर इस्तीफा देंगे।

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