प्यार एक ऐसा शब्द है जिसके बारे में बहुत कुछ लिखा-पढ़ा गया है। फिर भी कोई इसकी सही परिभाषा न आज तक निकल पाई है और न शायद आगे कभी निकल पाएगी। कहते हैं कि जब आप प्यार में होते हैं, तब जिंदगी बहुत हसीन लगने लगती है। एक-दूसरे के साथ सात जन्मों तक साथ निभाने की बातें होती हैं। प्यार में कही कोई भी बात खराब नहीं लगती, भले ही वह खराब शब्द ही क्यों न हो। प्यार से शादी तक का सफर बहुत सुहाना होता है, लेकिन शादी के कुछ सालों बाद वही प्यार कहाँ चला जाता है.. पता नहीं चलता।

प्यार में ऐसा होता है

* राह चलते भी हाथों में हाथ रहता है।

* अलग-अलग रेस्टोरेंट में अक्सर साथ-साथ खाना खाते हैं।

* एक सोफे में भी बैठे होने पर पास-पास बैठना चाहते हैं।

* एक ही कोल्ड ड्रिंक में बारी-बारी से सिप करते हैं।

* भविष्य के सपने संजोते हैं।

* हर पल रोमांस से भरा होता है।

* पानी का गिलास पहले उसे दिया जाता है।

* शाम को बाहर निकलने पर गजरा खरीदा जाता है।

* फोन की घंटी बजते ही दिल की भी घंटी बजने लगती है।

* रात-रात भर फोन का इंतजार रहता है।

शादी के कुछ समय बाद

* सड़क पर चलते हुये भी तू तू-मैं मैं होने लगती है।

* जल्दी दोनों कहीं साथ-साथ जाने के लिए तैयार नहीं होते।

* एक कमरे में बैठना भी पसंद नहीं आता।

* एक-दूसरे की वस्तु छू लेने पर हंगामा हो जाता है।

* सब कुछ सामान्य सा हो जाता है।

* प्यार भरी बातें सिर्फ रुपयों का लेन-देन करते समय ही होती है।

* पहले खुद की प्यास बुझाई जाती है।

* शादी के बाद घर की सब्जी खरीदकर लाने का मन भी नहीं करता।

* मोबाइल की स्क्रीन पर पत्नी का नाम आते ही चेहरे के भाव बदल जाते हैं कि पता नहीं क्या फरमाइश हो।

* पत्नी के मायके चले जाने पर भी दोनों को लगता है रात में फोन न आए, नहीं तो नींद डिस्टर्ब होगी।

[ईला शर्मा]

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