नई दिल्ली,  ब्रांड डेस्क। बाजार में तेजी का सिलसिला लगातार चौथे सप्ताह भी जारी रहा। क्योंकि जुलाई महीने के अमेरिकी मुद्रास्फीति के आंकड़ों से व्यापारी उत्साहित हैं, जो अनुमान से नीचे आया। और निकट भविष्य में अमेरिकी फेडरल रिजर्व बैंक जो आक्रामक तरीके दरों में वृद्धि करने वाली थी उसकी चिंताओं को शांत किया। निफ्टी 1.73% अप के साथ 17,698.15 पर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स 1.84% के अप के साथ 59,462.78 पर बंद हुआ।

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सप्ताह की शुरुआत के बाद से व्यापारी आशावादी बने रहे। ऐसा इसलिए है क्योंकि रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि ताइवान में हो रही नकारात्मक घटनाओं से भारत पर असर पड़ने की संभावना नहीं है। गवर्नर ने कहा कि भारत के कुल व्यापार का केवल 0.7% ताइवान के साथ है। इसके अलावा भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों से भी व्यापारियों को प्रोत्साहन मिला। बता दें कि 29 जुलाई को समाप्त सप्ताह के लिए भारत का विदेशी मुद्रा (forex) भंडार $573.875 बिलियन से बढ़कर $573.875 बिलियन डॉलर हो गया। ऐसा इसलिए हुआ है, क्योंकि इक्विटी मार्केट में पूंजी का मजबूत प्रवाह हुआ है और रुपये में रिकॉर्ड निचले स्तर से मजबूती देखी गई।

इसके अलावा, एक रिपोर्ट की भविष्यवाणी के बाद उस सेंटिमेंट्स को बढ़ावा मिला कि बढ़ती मुद्रास्फीति और बढ़ते व्यापार घाटे जैसी बाधाओं के बावजूद भारत इस साल सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था होगी। देखा गया कि इस वर्ष अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये का 7% डेप्रिसिएशन ज्यादा खतरनाक नहीं था और सरकार और RBI स्थिति को प्रबंधित करने की अपनी क्षमता से आश्वस्त हैं।

इसके अलावा, S&P Global Ratings ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था अपनी मजबूत बाहरी स्थिति के कारण अपने विदेशी मुद्रा भंडार के कुछ क्षरण का सामना कर सकती है।

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Edited By: Saurabh Verma