नई दिल्ली, ब्रांड डेस्क। आज के समय में युवाओं का ध्यान निवेश की तरफ तेजी से आकर्षित हो रहा है। अधिकतर युवा अपने पैसों को ऐसी जगह पर निवेश करना चाहते हैं जहां उन्हें कम रिस्क में अच्छा रिटर्न मिले। इसके साथ ही अधिकतर युवा ऐसे प्लान में भी निवेश करना पसंद करते हैं जिसमें उन्हें एक निश्चित राशि हर महीने निवेश के रूप में डालनी होती है। इस प्रकार निवेश के लिए दो लोकप्रिय तरीके हैं। पहला है म्यूचुअल फंड का सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP), और दूसरा है रिकरिंग डिपॉजिट (RD), वर्तमान समय में सिस्टमेटिक निवेश के ये दो तरीके सर्वाधिक लोकप्रिय हैं। आज हम निवेश के इन दो तरीकों के बारे में जानेंगे।

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क्या होता है रिकरिंग डिपॉजिट (RD)

RD एक तरीके का डेब्ट इनवेस्टिंग इन्सट्रूमेंट है, जो निवेशकों को गारंटीड रिटर्न देता है। इसमें निवेशक एक निश्चित समय के लिए मासिक रूप से एक निश्चित धनराशि का निवेश करते हैं। यह समय एक साल से लेकर दस साल तक का होता है। इस तरह के निवेश की खास बात है कि यह बाजार के जोखिमों पर निर्भर नहीं होता और एक निश्चित रिटर्न निवेशक को मिलता है। चूंकि यह बाजार के जोखिमों पर निर्भर नहीं होता, इसलिए आपका पैसा पूरी तरह से सुरक्षित रहता है।

Mutual Fund Systematic Investment Plan (SIP) निवेश के लिए है युवाओं की पहली पसंद

Mutual Fund Systematic Investment Plan (SIP) निवेश के लिए आज के समय का सबसे लोकप्रिय इन्सट्रूमेंट है, जिसमें आप एक निश्चित धनराशि हर महीने निवेशित करते हैं। यह निवेश बाजार जोखिमों पर निर्भर करता है। लेकिन म्यूचुअल फंड में आपके पैसे को कई तरह के इक्विटी शेयर्स व बॉण्ड्स में लगाया जाता है। इसको एक्सपर्ट्स फंड मैनेजर द्वारा मैनेज किया जाता है, जिसकी वजह से इसमें शेयर मार्केट की तुलना में जोखिम काफी कम होता है और आप इसके द्वारा पारम्परिक निवेश की तुलना में अच्छा रिटर्न प्राप्त कर सकते हैं। म्यूचुअल फंड SIP की लोकप्रियता का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि इस साल के अगस्त महीने में लगभग 12,693 करोड़ रुपए का निवेश म्यूचुअल फंड SIP के द्वारा किया गया।

कौन सा इंस्ट्रूमेंट है ज्यादा फ्लेक्सिबल

SIP व RD दोनों निवेश के सबसे ज्यादा चर्चित तरीकों में से एक हैं और दोनों ही निवेशकों को फ्लेक्सिबिलिटी प्रदान करते हैं। लेकिन RD के मुकाबले SIP अधिक फ्लेक्सिबिलिटी प्रदान करता है। इसमें आप डेली, वीकली, मंथली व ऐनुअली फॉर्म में निवेश कर सकते हैं। तो वहीं RD में निवेशक मंथली बेस पर ही निवेश करते हैं।

लॉक इन की बाध्यता

म्यूचुअल फंड SIP में आपको लॉक इन की कोई बाध्यता नहीं रहती। आप जब चाहें अपनी जमा की गई राशि को निकाल सकते हैं। तो वहीं RD में लॉक इन पीरियड होता है, जिसके बीच में आप जमा की गई राशि यदि निकालते हैं तो आपको पेनाल्टी देनी होती है। RD का समय सामान्यतः 1 से 10 साल तक का होता है, ऐसे में आप 1 से 10 साल के बाद RD का टेन्योर पूरा होने पर ही अपनी राशि बाहर निकाल सकते हैं।

गारंटी रिटर्न व जोखिम

RD में निवेश करने पर आपको गारंटी रिटर्न प्रदान किया जाता है। जिसमें कोई भी जोखिम नहीं होता है, तो वहीं दूसरी तरफ SIP में आपका पैसा शेयर मार्केट में निवेश किया जात है, इसलिए यह बाजार के जोखिमों पर निर्भर होता है। हालांकि, आपका पैसा कई तरह के इक्विटी शेयर में निवेशित किया जाता है, जिससे आपका जोखिम काफी कम हो जाता है। इसके अतिरिक्त SIP में रिटर्न निश्चित नहीं होता व बाजार के आधार पर ही यह रिटर्न देता है।

तो इस प्रकार म्यूचुअल फंड SIP व RD दोनों की अपनी विशेषताएं होती हैं। ऐसे में किसी भी इन्स्ट्रूमेंट में निवेश के लिए अपने फंड मैनेजमेंट को समझना जरूरी होता है। इस प्रकार अपने रिस्क लेने की क्षमता के आधार पर ही अपने लिए सही टूल का चयन करना चाहिए।

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Note:- यह आर्टिकल ब्रांड डेस्क द्वारा लिखा गया है।

लेखक- सत्यम सिंह

Edited By: Siddharth Priyadarshi

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