जागरण संवाददाता, सोनीपत। किसी भी कारोबार की बुनियाद ग्राहकों की संतुष्टि पर टिकी होती है। ग्राहकों का भरोसा कारोबार को दुश्वारियों से बचाता है। इन्हीं चीजों से सेठी इलेक्ट्रॉनिक्स ने कोरोना की मुश्किलों पर जीत हासिल की है। सेठी इलेक्ट्रॉनिक्स को चलाने वाले राजीव व गौरव सेठी ग्राहकों की संतुष्टि को अपनी असली कमाई मानते हैं। इसी कमाई से आज जिले में उनके 2 शोरूम चल रहे हैं। कोरोना लॉकडाउन के दौरान भी सेठी शोरूम का कारोबार ऑनलाइन बुकिंग से चलता रहा और ग्राहकों की अनिवार्य जरूरतें पूरी की गईं।

1995 में 46 गज की दुकान से हुई थी शुरुआत 

अशोक नगर निवासी राजीव सेठी व उनके भाई गौरव सेठी रेलवे रोड पर सेठी इलेक्ट्रॉनिक्स के नाम से शोरूम चलाते हैं। राजीव सेठी ने 1995 में छोटी-सी पूंजी से 46 गज की दुकान में इलेक्ट्रॉनिक्स का सामान बेचना शुरू किया था। मेहनत, लगन और ग्राहकों की संतुष्टि से कारोबार में इजाफा होता गया, तो दुकान को शोरूम में तब्दील कर दिया। फिर भाई गौरव के साथ मिलकर कारोबार को विस्तार देना शुरू किया। आज 3 शोरूम हैं, जिनमें फ्रिज, कूलर, एलइडी, वॉशिंग मशीन व अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स सामान मिलते है। उनकी मां ईश्वर देवी भी शोरूम पर कामकाज में हाथ बंटाती है। आइए, जानते हैं कि कोरोना के दौरान उन्होंने कैसे कारोबार को संभाला। 

समाधान 1: कोरोना काल में घर पर दी सुविधाएं 

जब कोरोना संक्रमण के खतरे के बीच लॉकडाउन की वजह से बाजार बंद थे तो ग्राहकों को घर पर ही सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। लॉकडाउन में किसी का कूलर, फ्रीज खराब हुआ तो गर्मी से बेहाल लोगों के फोन उनके पास आए। ऐसे में उन्होंने फोन पर ही अपने कारीगरों के जरिए उनके काम करवाए। ग्राहकों की मांग पर इलेक्ट्रॉनिक्स के सामानों की होम डिलीवरी भी बगैर अतिरिक्त शुल्क के कराई गई। 

समाधान 2: फाइनेंस की सुविधा ने भी की मदद

यहां ग्राहकों को जीरो प्रतिशत इंटरेस्ट पर फाइनेंस सुविधा मिलती है, जो कोरोना काल में भी जारी रही। हमें पता है कि कोरोना काल में लोगों की माली हालत कैसी है। फाइनेंस की सुविधा देने से ग्राहक कम बजट होने पर भी अपनी जरूरत के सामान खरीदने में सक्षम हो जाता है। ऐसी सुविधाओं से ग्राहक बार-बार उनके पास आते है। ग्राहक की जरूरत पूरी करना ही उनका लक्ष्य है। 

समाधान 3: ग्राहकों से बनाया दोस्ती का रिश्ता

हमारे पास जिले भर से ग्राहक आते हैं। आसपास के गांवों के लोग शादी-विवाह के लिए उनके पास से ही सामान खरीदते हैं। ग्राहकों के साथ दोस्ती है। कई तो फोन पर ही सामान पूछकर घर भेजने को कह देते हैं। कई ग्राहकों के घर तो सालों से शादी-विवाह तक में आना जाना है। यह केवल व्यापार का रिश्ता नहीं है, बल्कि ग्राहक के साथ दोस्ताना व्यवहार और उनकी इज्जत का ही परिणाम है कि वे खुद ही दूसरे ग्राहकों को भी शोरूम तक ले आते हैं।

समाधान 4: सुरक्षा मानकों का रखा जाता है ध्यान

कोरोना संक्रमण से बचाव का भी पूरा इंतजाम है। ग्राहक को सैनिटाइज करने व तापमान की जांच के बाद ही शोरूम के अंदर प्रवेश दिया जाता है। कोरोना संक्रमण से बचाव के अन्य उपायों का भी पालन किया जाता है। समय-समय पर स्टाफ का भी कोरोना टेस्ट कराया जा रहा है, ताकि कोई संक्रमण की चपेट में न आने पाए।

25 लोगों का दिया है रोजगार 

दोनों भाइयों द्वारा स्थापित किए गए कारोबार से करीब 25 लोगों के घर चल रहे। उनके तीनों शोरूम पर 25 लोगों को रोजगार मिला हुआ है। आसपास के एरिया में होम डिलीवरी दी भी दी जा रही है। डिलीवरी के लिए उन्होंने अपने साथ वाहन व रिक्शावालों को भी जोड़ रखा है, जिससे उनको भी रोजगार मिला हुआ है।