हल्द्वानी, जेएनएन। अगर अपनी योजनाओं को धैर्य, ईमानदारी और दीर्घकालिक स्तर पर अनूठे तरीके से लागू किया जाए तो सफलता कदम चूमती ही है। हल्द्वानी के नैनीताल मोटर्स की कुछ नया करने की प्रतिबद्धता ऐसी ही थी, जिसने उन्हें कोरोना के संकट से निपटने में मदद की। प्रबंधन की पढ़ाई करने वाले और परिवार के पुश्तैनी कारोबार से अलग बिजनेस करने की ठानने वाले भूपेश का कोरोना से पहले कारोबार सरपट दौड़ रहा था। कोरोना के बाद भूपेश की गाड़ी लड़खड़ा गई, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने ग्राहकों से कनेक्शन बरकरार रखा। उनकी परेशानियों को जानकर उसके निदान के लिए सार्थक नीतियां भी बनाईं। काम करने के तरीकों में बदलाव भी लाए गए। सुविधा का ख्याल रखा गया तो ग्राहकों ने भी कारोबार का साथ दिया और नई गाड़ियों के लिए अपने गैरेज के दरवाजे खोले। इस तरह हल्द्वानी मोटर्स संकट काल से निकलने में कामयाब रहा।  

नैनीताल मोटर्स के भूपेश बताते हैं कि उनके परिवार का चावल और आटे की मिल का पुश्तैनी कारोबार था। उन्होंने मैनेजमेंट की पढ़ाई की थी। वह शुरुआत से अलग करना चाहता था। जब उन्हें मारुति शोरूम खोलने का अवसर मिला तो उन्होंने इसे हाथोंहाथ लिया। उन्हें तरक्की भी मिली, लेकिन कोरोना नाम का एक बड़ा स्पीड ब्रेकर भी आ गया। आइए, भूपेश से ही जानते हैं कि ग्राहकों के सहयोग से उन्होंने इस समस्या का क्या समाधान निकाला। 

(नैनीताल मोटर्स के भूपेश)

समाधान 1: ग्राहकों की आशंका को किया दूर, जिनके बुकिंग अमाउंट लौटाए, वे फिर लौटकर भी आए

मार्च माह में चैत्र माह में पड़ने वाले नवरात्र के लिए ग्राहकों ने बुकिंग कराई थी। लॉकडाउन के बाद ग्राहकों के मन में कई तरह के संशय थे। हमसे कुछ ग्राहकों ने बुकिंग अमाउंट के रिफंड की प्रक्रिया पूछी थी। हमें लगा कि संभव है कि कुछ अन्य ग्राहकों के मन में भी ऐसे सवाल हों। हमने ये फैसला किया कि जो भी ग्राहक बुकिंग के पैसे वापस चाहता है, हम वापस कर देंगे। हमने करीब 100 से अधिक ग्राहकों के बुकिंग अमाउंट को सहर्ष वापस कर दिया। इसे ग्राहक और दुकानदार का अटूट रिश्ता ही कहेंगे कि उनमें से अधिकतर ग्राहकों ने इस नवरात्र के लिए हमसे बुकिंग कराई। जहां हमने ग्राहक की परेशानी को समझा तो अब वही ग्राहक हम पर भरोसा जता रहे हैं। 

समाधान 2: कर्मचारियों की कराई ट्रेनिंग, सेफ्टी के लिए वर्क फ्रॉम होम भी

कोरोना काल में हमने अपने कर्मचारियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्हें वर्क फ्रॉम होम का विकल्प दिया। अगर किसी कर्मचारी का कोई आवश्यक काम होता था तो वह दफ्तर या फील्ड जाता था। हमने अपने कर्मचारियों की काम से संबंधित ट्रेनिंग करानी शुरू की। इसमें एसओटीएस ट्रेनिंग, कॉम्पिटीशन ट्रेनिंग, सेफ्टी ट्रेनिंग, स्किल डेवलपमेंट ट्रेनिंग आदि कराई। चूंकि, मौजूदा समय में सारे कर्मचारी ऑनलाइन उपलब्ध थे तो ट्रेनिंग प्रक्रिया में काफी आसानी रही। हमने गूगल मीट, वेबेक्स आदि की मदद से ये ट्रेनिंग कराईं। 

समाधान 3: गाड़ी की डिलीवरी, बुकिंग के लिए ऑनलाइन मॉडल

कोरोना काल में गाड़ियों की बिक्री काफी कम हो गई थी। ऐसे में हमने इसका समाधान निकाला। हमने गाड़ियों की बिक्री ऑनलाइन करने पर ध्यान दिया। हम मारुति के हाइपरलोकल ऐप का इस्तेमाल कर लोगों तक पहुंचने लगे। गाड़ियों की ऑनलाइन बुकिंग कर ऑनलाइन ट्रायल आदि की सुविधाओं को और पुख्ता किया। पहले जहां एक माह में 1 या दो गाड़ियों की बुकिंग होती थी, अब एक महीने में 40 से 50 हो गई। 

समाधान 4: सहयोग के लिए बनाया फंड

कोरोना काल में शो रूम के कर्मचारियों के लिए एक फंड बनाया था। फंड बनाने का मकसद यह था कि लोगों की आड़े वक्त में मदद की जा सकें। इस फंड को देने के लिए हमने समिति का गठन किया था जो यह तय करती थी कि अमुक व्यक्ति की जरूरत जायज है। इससे कर्मचारियों में सुरक्षा का विश्वास मजबूत हुआ। 

समाधान 5: आवागमन के लिए निकाला समाधान

कोरोना काल में मीटिंग और ट्रेनिंग के लिए दिल्ली और देहरादून जाना पड़ता था। लॉकडाउन और ट्रांसपोर्ट की पाबंदियों की वजह से ऐसा संभव नहीं था। ऐसे में हमारी ऑनलाइन मीटिंग और ट्रेनिंग शुरू हुई। इसका फायदा यह हुआ कि आने-जाने का समय बचा, जबकि मुलाकात और प्रशिक्षण बढ़ गए। 

समाधान 6: लोगों ने दिया फीडबैक, लॉकडाउन के बाद मिला फायदा

कोरोना काल के पहले ग्राहकों से संवाद और कनेक्शन मजबूत करने के लिए हम एक्टिविटीज करते रहते थे। कोरोना से थोड़े समय पहले ही ग्राहकों के लिए जिम कॉर्बेट में एक्टिविटीज की थी, जिसमें हमने ग्राहकों से गाड़ी रिफरेंस देने को कहा था। लॉकडाउन के बाद ऐसी एक्टिविटीज से जुड़े ग्राहकों ने लोगों को गाड़ी खरीदने के लिए हमारा रिफरेंस दिया। यह हमारा और ग्राहकों के बीच के बेजोड़ व बेमिसाल संबंधों का सबूत रहा।

(न्यूज रिपोर्ट: अनुराग मिश्रा, जागरण न्यू मीडिया)