जागरण संवाददाता, नोएडा। संकट की घड़ी में अगर सकारात्मक सोच से काम करते रहें तो सफलता निश्चित तौर पर मिलती है। संकट में हिम्मत न हारना और ये सोचना कि सबके साथ ये बुरा वक्त निकल ही जाएगा, एक बड़ा संबल होता है। नोएडा सेक्टर 9 स्थित बीजे टाइल्स शोरूम संचालक राजेंद्र भाटी इन्हीं मूल्यों से आगे बढ़ने में यकीन रखते हैं। तभी तो कोरोना संकट के दौरान उन्होंने न केवल ग्राहकों संग इंगेजमेंट बढ़ाने के लिए मेहनत की, बल्कि कर्मचारियों का भी पूरा ख्याल रखा। ग्राहकों और कर्मचारियों ने भी उनका पूरा सहयोग किया और कोरोना के झटकों से उबरने में पूरी मदद की। 

नए कारोबार को तुरंत झेलनी पड़ीं चुनौतियां 

नोएडा सेक्टर-9 स्थित बीजे इंटीरियर मॉल टाइल्स का शोरूम राजेंद्र भाटी ने जून 2019 में शुरू किया था। उनके साथ आठ कर्मचारियों की टीम काम को संभालने में लगी। शोरूम शुरू होने के बाद चीजें व्यवस्थित होनी शुरू ही हुई थीं कि मार्च 2020 के अंत में लॉकडाउन में शोरूम बंद हो गया। उस समय कर्मचारियों को लगा कि अब क्या होगा, इससे भी बड़ी चिंता राजेंद्र भाटी को थी कि जो शोरूम अभी ठीक से चलना भी शुरू नहीं हुआ था, उसके संग कर्मचारियों के भविष्य का क्या होगा। आइए जानते हैं कि उन्होंने इस संकट का समाधान कैसे किया: 

समाधान 1: कारोबार बढ़ाने के लिए नए उपाए आजमाए

कोरोना के खतरे के बीच शोरूम पर आने वाले लोगों की संख्या घट गई। ऐसे में कारोबार पर काफी असर पड़ा। इसे बूस्ट देने के लिए वह खुद नई-नई जगहों में स्कोप तलाशने में जुट गए। ऐसे प्रोजेक्ट, जहां टाइल्स की खपत है, वहां संपर्क किया गया। लगातार किए गए प्रयास के नतीजे अब सामने आने लगे हैं। इससे कारोबार बढ़ रहा है और शोरूम में मिलने वाली सुविधाओं को देखते हुए ग्राहकों की संख्या भी बढ़ रही है। 

(बीजे टाइल्स शोरूम संचालक राजेंद्र भाटी)

समाधान 2: सुरक्षा की प्रॉपर व्यवस्था से ग्राहकों को किया संतुष्ट

लॉकडाउन के बाद शोरूम खुलते ही सबसे पहले पूरे शोरूम को सैनिटाइज कराया गया। ग्राहकों की सुरक्षा के लिए गेट पर थर्मल स्क्रीनिंग के साथ सैनिटाइजर की व्यवस्था की गई। शोरूम में भी तीन-चार स्थानों पर सैनिटाइजर की व्यवस्था की गई। हर 15 दिन पर शोरूम को पूरी तरह से सैनिटाइज किया जा रहा है। शोरूम आने वाले ग्राहकों और अपने सभी कर्मचारियों के लिए मास्क अनिवार्य किया गया है। 

समाधान 3: कर्मचारियों को भी समझा परिवार 

कोरोना लॉकडाउन का झटका तगड़ा था। तीन माह तक शोरूम पूरी तरह से बंद रहा। इस दौरान कर्मचारियों को अपने परिवार को हिस्सा माना। उन्हें वेतन दिया, जितना संभव हो सका, उन्हें राशन व अन्य चीजें मुहैया कराईं। संकट की इस घड़ी में उन्होंने न तो स्वयं हिम्मत हारी, न ही कर्मचारियों का हौसला टूटने दिया। वह सभी कर्मचारियों को समझाने में कामयाब रहे कि यह बुरा दौर भी गुजर जाएगा। उन्होंने आश्वस्त किया कि जबतक शोरूम नहीं खुलता, कर्मचारियों के परिवार के लिए न्यूनतम धनराशि जरूर उपलब्ध कराएंगे। कर्मचारियों ने भी पूरा साथ दिया। 

नए उपाय हुए असरदार, अगस्त से सुधरता दिखा माहौल 

राजेंद्र भाटी बताते हैं कि करीब तीन माह तक शोरूम बंद रहने के बाद जुलाई में शोरूम तो खुला, लेकिन काम बिल्कुल नहीं था। समझ नहीं आ रहा था कि स्थितियां कब तक सामान्य होंगी। ऐसे में राजेंद्र भाटी ने शोरूम का काम बढ़ाने के लिए प्रोजेक्ट तलाशने शुरू किए। अगस्त में खरीदार आने लगे और एक-दो प्रोजेक्ट में भी काम मिल गया। इससे स्थिति कुछ सामान्य होती नजर आई। अब चीजें धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। राजेंद्र भाटी का कहना है कि कर्मचारियों के पास लॉकडाउन में कोई विकल्प नहीं था। समस्या तो गंभीर थी, लेकिन आपसी सहयोग से इस संकट से उबरने में कामयाबी मिली। अब फिर से कर्मचारी पूरी शिद्दत से काम में जुटे हैं।