मुंबई, प्रेट्र। Coronavirus. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) प्रमुख शरद पवार ने सोमवार को पूछा है कि दिल्ली के निजामुद्दीन में तब्लीगी जमात के धार्मिक आयोजन के लिए अनुमति किसने दी है। पवार के मुताबिक, महाराष्ट्र सरकार ने इससे पहले यहां मुंबई और सोलापुर प्रस्वावित इसके सम्मेलनों को अनुमित नहीं दी थी।

उन्होंने कहा कि अगर महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख और सीएम उद्धव ठाकरे ऐसा फैसला ले सकते हैं, तो दिल्ली में इस कार्यक्रम की अनुमति से इन्कार क्यों नहीं किया गया, किसने इसके लिए मंजूरी दी। पवार ने कहा कि इस मामले को मीडिया में क्यों उछाला जा रहा है। उनके मुताबिक, देश के एक समुदाय को अनावश्यक रूप से निशाना बनाया जा रहा है।

महाराष्ट्र सरकार ने पिछले महीने पालघर में तब्लीगी जमात को सम्मेलन करने की इजाजत न देकर दिल्ली जैसी तबाही को होने से रोक लिया है। आधिकारिक सूत्रों ने शुक्रवार को बताया कि तब्लीगी जमात ने जनवरी के महीने में मुंबई से 30 किमी दूर वसई कस्बे के पालघर में 14-15 मार्च को एक दिल्ली जैसा ही सम्मेलन कराने की अनुमति मांगी थी। इस सम्मेलन में देश भर के जमातियों के अलावा विश्व के कई देशों से कुल 50 हजार लोग शामिल होने वाले थे। भारत में तब तक कोरोना वायरस के संक्रमण ने भी कदम नहीं रखा था।

जमातियों के इस सम्मेलन की मंजूरी शमीम एजुकेशन एंड वेलफेयर सोसाइटी ने मांगी थी। वह लोग पश्चिम वसई के गांव दिवामन में कुरान की आयातें पढ़ने, इस्लामिक चर्चा और नमाज पढ़ने की इजाजत मांग रहे थे। इस मामले में जिले के प्रशासन और राज्य की पुलिस ने गहन चर्चा की और फौरी तौर 5 फरवरी को इसकी इजाजत दे दी थी। तब तक कोराना का संक्रमण भारत में आ चुका था। विश्व स्वास्थ्य संगठन के इसे महामारी घोषित करने और संक्रमण महाराष्ट्र में फैलने पर राज्य सरकार को इस कार्यक्रम को लेकर खतरा महसूस हुआ। और राज्य के गृह मंत्रालय ने विगत छह मार्च को स्थानीय पुलिस की ओर से क्रार्यक्रम को मिली अनुमति को रद कर दिया। राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने बताया कि 24 मार्च को मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने राज्य में लॉकडाउन की घोषणा कर दी थी। 

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Posted By: Sachin Kumar Mishra

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