महाजाम से परेशान पुणे... फ्लाईओवर बनने के बाद भी ट्रैफिक से जूझ रहे लोग, कैसे निकलेगा समाधान?
पुणे में ट्रैफिक जाम दिन-प्रतिदिन और विकराल रूप लेता जा रहा है। सरकारें फ्लाईओवर तो बना रही हैं, पर क्या ...और पढ़ें

पुणे में ट्रैफिक जाम का संकट।
HighLights
पुणे में ट्रैफिक जाम की समस्या लगातार बढ़ रही है।
फ्लाईओवर स्थायी समाधान नहीं, बल्कि समस्या को बढ़ाते हैं।
सार्वजनिक परिवहन और दीर्घकालिक योजना ही असली हल।
डिजिटल डेस्क, पुणे। महाराष्ट्र का सांस्कृतिक और आईटी हब कहा जाने वाला पुणे शहर पिछले कुछ सालों से एक गंभीर समस्या से जूझ रहा है और इसका नाम है भीषण ट्रैफिक जाम।
'टॉमटॉम ट्रैफिक इंडेक्स' के मुताबिक, हाल तो यह है कि शहर में ट्रैफिक की भीड़भाड़ 2024 के 65.7% से बढ़कर 2025 में 71.1% हो गई है। यानी ट्रैफिक जाम की यह समस्या तेजी से विकराल रूप ले रही है।
नाकाफी साबित हो रहे बनाए गए फ्लाईओवर
हालांकि यह कहना गलत होगा कि भीषण ट्रैफिस से निपटने के लिए सरकार ने कोई कदम नहीं उठाए हैं। इस समस्या से निपटने के लिए पुणे नगर निगम (PMC) और राज्य सरकार ने धड़ाधड़ कई फ्लाईओवर बनाने की घोषणाएं की हैं और प्रोजेक्ट्स पर काम भी किया है। लेकिन, सवाल यह उठता है कि क्या फ्लाईओवर ही इस जाम का इकलौता और स्थायी समाधान हैं और अगर हां तो इसके बाद भी शहर भर में इतना ट्राफिक क्यों लग रहा है?
फ्लाईओवर क्यों नाकाफी साबित हो रहे हैं?
टीओआई की रिपोर्ट के अनुसार सरकारें और ठेकेदार जाम हटाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च करके फ्लाईओवर तो बना देते हैं, लेकिन जमीन पर उतरने वाली तस्वीर कुछ और ही बयां करती है।
जानकारों और नागरिकों का कहना है कि फ्लाईओवर ऊपर से गुजरने वाली गाड़ियों के लिए भले ही सफर आसान कर देते हैं, लेकिन वे उस फ्लाईओवर के उतरने वाले छोर या नीचे की सड़कों पर भीषण ट्रैफिक जाम पैदा कर देते हैं।
नल स्टॉप का उदाहरण भी समझिए
इस बात को ऐसे समझिए कि इसी क्रम में पुणे के कार्वे रोड से कोथ्रूड जाने वालों के लिए फ्लाईओवर वरदान साबित हुआ है। लेकिन जो लोग नीचे से लॉ कॉलेज रोड के रास्ते जाना चाहते हैं, उनके लिए पीक आवर्स में यह किसी बुरे सपने से कम नहीं है। मेट्रो स्टेशन, बस स्टॉप और फ्लाईओवर का ट्रैफिक एक ही जगह मिलने से भयानक भ्रम और जाम की स्थिति बन जाती है।
सिंहगढ़ रोड फ्लाईओवर का आधार भी समझिए
टोओआई की रिपोर्ट की माने तो रोजाना सफर करने वाले लोगों का कहना है कि गैर-पीक आवर्स में यह अच्छा है, लेकिन पीक आवर्स में फ्लाईओवर के दोनों सिरों पर गाड़ियां वैसे ही फंस जाती हैं, जैसे पहले फंसती थीं।
'पॉइंट सॉल्यूशन' बनाम 'नेटवर्क सॉल्यूशन' की कैसी जंग?
विशेषज्ञों का मानना है कि फ्लाईओवर बनाना कोई जादू की छड़ी नहीं है। एमआईटी डब्ल्यूपीयू के परिवहन इंजीनियरिंग के सहायक प्रोफेसर सागर कोलपकर का कहना है कि फ्लाईओवर बनाने से सड़क की क्षमता थोड़ी देर के लिए बढ़ती है, जिससे और ज्यादा लोग अपनी गाड़ियां लेकर उस रास्ते पर आ जाते हैं।
आखिरकार यह जाम को और बढ़ावा देता है। यह एक 'पॉइंट सॉल्यूशन' है, जबकि पुणे को एक 'नेटवर्क सॉल्यूशन' यानी पूरे शहर के लिए समग्र योजना की जरूरत है।
पैदल चलने वालों (NMT) के लिए खतरा
दूसरी ओर फ्लाईओवर बनने से गाड़ियां तेज रफ्तार से निकलती हैं, जिससे साइकिल चलाने वालों और पैदल चलने वालों के लिए रास्ता बेहद जोखिम भरा हो जाता है। पूर्व नगर योजनाकार प्रताप रावल के अनुसार, पुणे में गाड़ियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जबकि सड़कों की चौड़ाई वही है। बिना किसी गहन अध्ययन और अगले 10-20 साल की प्लानिंग के बनाए गए फ्लाईओवर सिर्फ थोड़े समय का भ्रम पैदा करते हैं।
फिर इस गंभीर ट्रैफिक जाम का असली समाधान क्या है?
विशेषज्ञों और शहरी परिवहन योजनाकारों का सुझाव है कि फ्लाईओवर को पहली प्राथमिकता बनाने के बजाय कुछ विकल्पों पर काम किया जाना चाहिए।
- सार्वजनिक परिवहन का एकीकरण- PMPML बसों, ऑटो और मेट्रो को एक-दूसरे के विकल्प के बजाय पूरक (Complementary) रूप में काम करना चाहिए, ताकि लोगों को घर से बाहर निकलने पर बेहतर कनेक्टिविटी मिल सके।
- जंक्शन का पुनर्निडिजाइन- चौराहों की बनावट को वैज्ञानिक तरीके से सुधारना ताकि ट्रैफिक का बहाव सुचारू रहे।
- सिग्नल सिंक्रोनाइजेशन- शहर के सिग्नलों को आपस में जोड़कर समन्वित करना।
- निजी वाहनों पर लगाम- 'पे एंड पार्क' जैसी सख्त पार्किंग नीतियों को लागू करना ताकि लोग बेवजह अपनी गाड़ियां सड़क पर न निकालें।
- लोगों को ले जाओ, सिर्फ गाड़ियों को नहीं- सिंगापुर और सियोल जैसे शहरों की तरह हमें गाड़ियों की जगह 'लोगों के आवागमन' को सुगम बनाने पर ध्यान देना चाहिए।
ट्राफिक केवल अधूरी प्लान का नतीजा
गौरतलब है कि पुणे का ट्रैफिक संकट केवल सड़कों की कमी का मामला नहीं है, बल्कि यह गलत प्राथमिकताओं और अधूरी प्लानिंग का नतीजा है। इस बात को ऐसे समझिए कि फ्लाईओवर बनाना आसान है और इससे तुरंत राजनीतिक वाहवाही मिल सकती है, लेकिन यह कैंसर के इलाज में सिर्फ 'बैंड-ऐड' लगाने जैसा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पुणे को वास्तव में रहने योग्य और यातायात के लिहाज से सुगम शहर बनाना है, तो प्रशासन को तात्कालिक जुगाड़ छोड़कर एक मजबूत, दीर्घकालिक और सार्वजनिक परिवहन-केंद्रित नीति पर काम करना होगा।
