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जिस टूल का गौरी लंकेश केस में हुआ इस्तेमाल, वही सुलझाएगा केतन हत्याकांड की गुत्थी

Published: Wed, 01 Jul 2026 07:52 PM (GMT+05:30)Updated: Wed, 01 Jul 2026 09:12 PM (GMT+05:30)

पुणे के केतन मर्डर केस की जांच में पुलिस 'गेट एनालिसिस' तकनीक का इस्तेमाल करने पर विचार कर रही है। ...और पढ़ें

पुलिस 'गेट एनालिसिस' तकनीक से सुलझाएगी केतन हत्याकांड की गुत्थी।

पुलिस 'गेट एनालिसिस' तकनीक से सुलझाएगी केतन हत्याकांड की गुत्थी।

HighLights

  1. पुणे केतन मर्डर केस में 'गेट एनालिसिस' का इस्तेमाल।

  2. गौरी लंकेश हत्याकांड में भी इसी तकनीक का प्रयोग हुआ।

  3. संदिग्धों की पहचान के लिए फोरेंसिक चाल विश्लेषण महत्वपूर्ण।

डिजिटल डेस्क, मुंबई। पुणे के केतन मर्डर केस की जांच के लिए पुलिस उसी तरीके पर विचार कर रही है, जिसका इस्तेमाल पत्रकार गौरी लंकेश मर्डर केस में किया गया था। पुणे मर्डर केस में 'गेट एनालिसिस' पर ध्यान दिया जा रहा है।

यह एक फोरेंसिक तकनीक है जो लोगों की पहचान उनके चलने के खास तरीके से करती है। जांचकर्ताओं का मानना है कि यह तकनीक उन मामलों में अहम भूमिका निभा सकती है, जहां पहचान के पारंपरिक तरीके, जैसे चेहरा पहचानना और मोबाइल फोन ट्रैकिंग काम नहीं आते।

गोरी लंकेश हत्या मामले में भी हुआ था 'गेट एनालिसिस'

2017 में बंगलुरु में पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या की जांच के दौरान 'गेट एनालिसिस' का इस्तेमाल किया गया था। चूंकि हमलावर का चेहरा हेलमेट से ढका हुआ था, इसलिए जांचकर्ता चेहरे से पहचान करने के तरीके पर निर्भर नहीं रह सकते थे।

कर्नाटक की स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम ने आरोपी परशुराम वाघमोरे की गिरफ्तारी के बाद क्राइम सीम को फिर से बनाया और सीसीटीवी फुटेज में दिखे कपड़ों जैसे ही कपड़े पहनकर उसकी चाल-ढाल को रिकॉर्ड किया। बाद में फोरेंसिक एक्सपर्ट ने उसकी चाल की तुलना सर्विलांस फुटेज से और जांच के दौरान यह जानकारी एक अहम सबूत के तौर पर सामने आई।

साकी नाका रेप केस में हुआ 'गेट एनालिसिस' इस्तेमाल

मुंबई में 2021 के साकी नाका रेप और मर्डर केस की जांच में भी 'गेट एनालिसिस' का इस्तेमाल किया गया था। इससे जटिल आपराधिक मामलों में इसकी बढ़ती भूमिका का पता चलता है, खासकर तब जब संदिग्ध अपनी पहचान छिपाने की कोशिश करते हैं।

हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि गेट एनालिसिस को आमतौर पर अकेले सबूत के तौर पर नहीं, बल्कि दूसरे सबूतों की पुष्टि करने वाले सबूत के तौर पर देखा जाता है।

कैसे होता है गेट एनालिसिस?

एक्सपर्ट्स ने बताया कि हत्या के मामले में आरोपी की मौजूदगी में घटनास्थल को फिर से तैयार किया जाता है। इससे पता चलता है कि आरोपी ने हत्या कैसे की, पीड़ित कहां खड़ा था, आरोपी उसके पास कैसे पहुंचा और हत्या किस तरह से की गई थी। इस घटनाक्रम को फिर से दोहराने की प्रक्रिया को वीडियो रिकॉर्डिंग और स्वतंत्र गवाहों के जरिए रिकॉर्ड किया जाता है।

एक्सपर्ट्स ने बताया कि गेट एनालिसिस यह साबित करने किे लिए किया जाता है कि हत्या के दिन आरोपी घटना स्थल पर मौजूद था। आरोपी को उस जगह ले जाया जाता है और उसके चलने के तरीके, चेहरे के हाव-भाव, बॉडी लैंग्वेज, लंबाई और अंगो की लंबाई के बारे में वैज्ञानिक रिकॉर्ड तैयार किया जाता है।

फॉरेंसिक गेट एनालिसिस के रिकॉर्ड को कोर्ट में चुनौती देना मुश्किल

फॉरेंसिक गेट एनालिसिस के रिकॉर्ड को कोर्ट में चुनौती देना मुश्किल होता है क्योंकि वे इस बात के सबूत होते हैं कि आरोपी घटनास्थल पर मौजूद था।

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