पुणे में डेंगू के 2,000 से ज्यादा मामले आए सामने, सालभर क्यों बना रहता है संक्रमण का खतरा?
पुणे में इस साल डेंगू के 2000 से अधिक संदिग्ध मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें से अधिकांश अगस्त से अक्टूबर के बीच सामने आए।

पुणे में डेंगू का बढ़ता खतरा

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, पुणे। पुणे में डेंगू का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। नए मामलों ने चिंता बढ़ा दी है। पुणे नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इस साल शहर में डेंगू के कुल 2009 संदिग्ध मामले दर्ज किए गए हैं।
चिंता की बात यह है कि इनमें से करीब 66 प्रतिशत मामले अकेले अगस्त, सितंबर और अक्तूबर के महीनों में सामने आए हैं।
हजारों ब्रीडिंग साइट्स पाई गईं
स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी मासिक आंकड़ों के अनुसार, इस साल अगस्त में 484, सितंबर में 508 और अक्तूबर में 346 संदिग्ध मामले दर्ज किए गए। इसके अलावा, शहर में चिकनगुनिया के 35 मामले भी मिले हैं।
नगर निगम की जांच के दौरान घरों, सोसायटियों, कार्यालयों और कॉलेजों में मच्छरों के पनपने की कुल 2,651 जगहें (ब्रीडिंग साइट्स) पाई गई हैं। निगम का कहना है कि घरों और निर्माण स्थलों पर जमा पानी इन बीमारियों को तेजी को बढ़ावा दे रहा है।
साल भर का खतरा बना डेंगू
एक्सपर्ट्स के अनुसार, डेंगू पहले मुख्य रूप से मानसून के मौसम में ही फैलता था, लेकिन अब बदलती पर्यावरणीय और मानवीय स्थितियों के कारण यह साल भर रहने वाला एक गंभीर शहरी स्वास्थ्य खतरा बन गया है। इसके पीछे कुछ मुख्य वजह हैं।
मच्छरों का अलग व्यवहार: डेंगू फैलाने वाला 'एडीज एजिप्टी' मच्छर घरों के अंदर और आसपास साफ, रुके हुए पानी में पनपता है। कूलर, गमले और फेंके गए टायरों में जमा पानी मच्छरों के लिए मुफीद जगह बनता है, जो बारिश पर निर्भर नहीं होता।
तापमान में वृद्धि: ग्लोबल वार्मिंग और तापमान बढ़ने से मच्छरों का जीवन चक्र तेज हो गया है। इससे मच्छरों के विकसित होने का समय कम हो जाता है और वायरस तेजी से पनपते हैं।
अनिश्चित मौसम: भारत में बेमौसम बारिश और उसके बाद पड़ने वाली गर्मी मच्छरों के लिए छोटे-छोटे प्रजनन केंद्र तैयार कर देती है, जिसके कारण अब जनवरी और फरवरी जैसे शुरुआती महीनों में भी डेंगू के मामले सामने आने लगे हैं।
डेंगू के लक्षण और पहचान
डेंगू एक वायरल संक्रमण है, जो संक्रमित एडीज मच्छर के काटने से फैलता है। इसके लक्षण आमतौर पर मच्छर के काटने के 4 से 10 दिन बाद दिखाई देते हैं।
सामान्य लक्षणों में शामिल हैं:
तेज बुखार और सिरदर्द
आंखों के पीछे दर्द
जोड़ों और मांसपेशियों में गंभीर दर्द
जी मिचलाना और उल्टी
अत्यधिक थकान
त्वचा पर लाल चकत्ते
नाक या मसूड़ों से हल्का खून आना
कितना गंभीर हो सकता है डेंगू?
अधिकांश मामलों में डेंगू हल्का होता है और मरीज ठीक हो जाते हैं, लेकिन गंभीर डेंगू जानलेवा साबित हो सकता है। जब वायरस रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाता है, तो ब्लीडिंग और अंगों को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है।
गंभीर डेंगू के चेतावनी संकेत:
पेट में बहुत तेज और लगातार दर्द
लगातार उल्टी आना या उल्टी-मल में खून आना
तेज-तेज सांस लेना और भारी कमजोरी महसूस होना
इस बीमारी से निपटने के लिए शुरुआती दौर में ही लक्षण पहचानकर समय पर इलाज कराना बेहद जरूरी है। गंभीर मामलों में जटिलताओं से बचने के लिए अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत पड़ सकती है।
