पुणे: पत्नी से छिपाकर महिला मित्र के साथ मलेशिया जा रहा था युवक, फिर एक गलती से खुल गई पोल
पुणे का एक बिजनेसमैन अपनी पत्नी से झूठ बोलकर महिला मित्र के साथ मलेशिया जा रहा था, लेकिन मुंबई एयरपोर्ट ...और पढ़ें

पत्नी से छिपाकर महिला मित्र के साथ मलेशिया जा रहा था युवक। (फाइल)
HighLights
बिजनेसमैन पत्नी से झूठ बोलकर महिला मित्र संग जा रहा था मलेशिया।
मुंबई एयरपोर्ट पर महिला मित्र के पुराने पासपोर्ट से खुली पोल।
पत्नी ने दर्ज कराई FIR, बाद में बिजनेसमैन ने कबूला सच।
डिजिटल डेस्क, मुंबई। पुणे के एक बिजनेसमैन ने अपनी पत्नी से इमिग्रेशन की समस्या का बहाना बनाया, क्योंकि जिस महिला के साथ वह विदेश यात्रा पर जा रहा था, उसका पासपोर्ट क्लियर नहीं हो पाया और यात्रा रद करनी पड़ी।
व्यक्ति ने अपनी पत्नी से कहा था कि बिजनेस ट्रिप के लिए कुआलालंपुर जा रहा है, जबकि असल में वह दूसरी महिला के साथ यात्रा पर जा रहा था।
मुंबई एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन जांच के दौरान अधिकारियों को पता चला कि महिला एक पुराना पासपोर्ट इस्तेमाल कर रही थी, जिसे उसने खोया हुआ बताया था।
अधिकारी ने बताया कि इमिग्रेशन विभाग की इस कार्रवाई के कारण कानूनी पेचीदगियां पैदा हो गईं। व्यक्ति को एहसास हुआ कि उसकी पत्नी को, जिसे बताया गया था कि यात्रा बिजनेस के लिए है, अब पता चल जाएगा कि उसके साथ एक महिला भी थी।
सहार पुलिस स्टेशन के अधिकारी ने बताया कि इमिग्रेशन विभाग द्वारा महिला मित्र को रोके जाने के बाद, बिजनेसमैन ने अपनी यात्रा रद कर दी, अपना मोबाइल फोन बंद कर दिया और उसके साथ दक्षिण मुंबई में सेंट्रल रेलवे के मुख्य स्टेशन, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस चला गया।
अधिकारी ने बताया कि रेलवे स्टेशन के लिए निकलने से पहले, उसने एयरपोर्ट के लैंडलाइन से अपनी पत्नी को फोन करके बताया कि इमिग्रेशन की समस्या के कारण उसे अपना मोबाइल फोन जमा करना पड़ा है।
पत्नी के दर्ज कराई FIR
अगले दिन पत्नी के साथ एक छोटी सी WhatsApp वीडियो कॉल के बाद, जिसमें उसने अपनी बात दोहराई, बिजनेसमैन का फोन अनरीचेबल हो गया। इसके बाद उसकी पत्नी पुलिस के पास गई और उसकी शिकायत के आधार पर अपहरण की FIR दर्ज की गई।
उसी रात बाद में, FIR के बारे में पता चलने पर वह व्यक्ति सहार पुलिस स्टेशन पहुंचा और कबूल किया कि उसने इमिग्रेशन की समस्याओं के बारे में झूठी कहानी बनाई थी।
अधिकारी ने समझाया कि हम कोर्ट में 'C समरी' क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करेंगे। यह एक ऐसा क्लासिफिकेशन है जिसका इस्तेमाल तब किया जाता है जब कोई मामला असल में तथ्य की गलती के कारण दर्ज किया जाता है या दो सप्ताह के भीतर न तो पूरी तरह सच और न ही पूरी तरह झूठ पाया जाता है।
(एजेंसी इनपुट के साथ)
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