मुंबई, प्रेट्र। भारत का सुप्रीम कोर्ट पूरी तरह से ईमानदार है और ऐसा कोई उदाहरण नहीं है जिससे पता चलता हो कि न्यायपालिका के फैसले में हस्तक्षेप किया गया। यह बात भारत सरकार की अतिरिक्त महाधिवक्ता (एएसजी)

पिंकी आनंद ने एक मीडिया समूह के कार्यक्रम में कही। पिंकी का कार्यकाल हाल ही में 2020 तक के लिए बढ़ाया गया है।

पिंकी आनंद ने कहा कि जज लोया की मौत और आधार कार्ड जैसे मामलों में सुप्रीम कोर्ट और अन्य अदालतों के फैसलों, निर्देशों और टिप्पणी का केंद्र सरकार ने पूरी गंभीरता से संज्ञान लिया है। किसी भी मौके पर न्यायपालिका के महत्व को कम आकने की कोशिश नहीं हुई। सुप्रीम कोर्ट सभी मामलों का निपटारा कानून की रोशनी में करता है। अतिरिक्त महाधिवक्ता ने ये बातें वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह के उस आरोप के जवाब में कहीं जिसमें उन्होंने न्यायपालिका में भ्रष्टाचार होने की बात कही थी। इंदिरा भी इस कार्यक्रम में भाग ले रही थीं। उन्होंने इस सिलसिले में हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के चार कार्यरत न्यायाधीशों के सार्वजनिक आरोपों का जिक्र किया।

इंदिरा जयसिंह ने कहा, कार्यपालिका अक्सर न्यायपालिका के कार्यों में हस्तक्षेप करती है, खासतौर पर हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति के मामलों में। ज्यादातर नियुक्तियां राजनीतिक आधार पर होती हैं। जजों की कोलेजियम जिन नामों की सिफारिश करती है, उनमें से केवल उन्हीं को स्वीकृति मिलती है जो राजनीतिक

रूप से उपयुक्त होते हैं। यह ढर्रा 2014  के पहले से चला आ रहा है। वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा, हमें ध्यान में रखना चाहिए कि दबाव रहित मीडिया और स्वतंत्र न्यायपालिका देश को बड़े नुकसान से बचाने के लिए जरूरी हैं। दोनों

महिला अधिवक्ता इस बात से सहमत थीं कि न्यायपालिका के प्रति जनता का विश्वास कायम है। लोग व्यक्तिगत ही नहीं बड़े मुद्दों के निपटारे के लिए कोर्ट से ही उम्मीद रखते हैं। 

By Babita